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Saturday, May 9, 2020

"दोस्तों मां के चरणों में ही स्वर्ग  है""

दोस्तों हम मदर्स डे एक दिन ही क्यों मनाया क्यों नहीं हम हर रोज मां दिवस मनाए मां भगवान का बनाया गया सबसे नायाब तोहफा है दोस्तों एक शिशु का जब जन्म होता है तो उसका पहला रिश्ता मां से होता है मां हमें पूरे 9 माह अपनी कोख में रखने के बाद असहनीय पीड़ा सहते हुए हमें जन्म देती है  दुनिया में लाती है 9 महीनों में मां और हमारा एक अदृश्य प्यार भरा गहरा रिश्ता उसी वक्त बन जाता है और जन्म के बाद अद्भुत प्यार होता है और जीवन पर्यंत बना रहता है दोस्तों जरा से भी तकलीफ हो हमें तब मां बेचैन हो उठती है इसलिए ही ममता और स्नेह की इस रिश्ते को संसार का खूबसूरत रिश्ता कहा जाता है मां हमारी जननी है दुनिया का कोई भी रिश्ता इतना मर्मस्पर्शी नहीं हो सकता धरती पर मौजूद प्रत्येक इंसान का अस्तित्व मां के कारण ही हैं मां जन्म देती है  तभी हम धरती पर आते हैं दोस्तों हम देखते हैं कि हर वर्ष मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे के रूप में मनाते हैं दोस्तों मेरी नजरों में हर एक नारी मां है चाहे उससे मेरा कोई भी रिश्ता हो एक नारी कभी बहन कभी मां कभी दोस्त कभी पत्नी कभी दादी मां अनेक रिश्तो में एक नारी हमें प्यार देती है इसलिए हर एक नारी किसी न किसी की मां है दोस्तों बहुत लोग सिर्फ इस दिन को पूरी तरह अपनी मां को समर्पित करते हैं जबकि हमें रोजाना करने की जरूरत है वैसे दोस्तों 1912 में मदर्स डे की शुरुआत अमेरिका से हुई एना जर्विस एक प्रतिष्ठित अमेरिकन एक्टिविस्ट उन्होंने कभी शादी नहीं की मां की मौत होने के बाद प्यार जताने के लिए उन्होंने इस दिन की शुरुआत की थी इसके बाद से पूरी दुनिया में 10 मई को मदर्स डे मनाने का एक परंपरा शुरू हो गई l आगे चलकर दोस्तों 1941 में वुड्रो विल्सन ने एक घोषणा पर हस्ताक्षर किए जिसके बाद अधिकारिक रूप से पूरे विश्व में मनाया जाने लगा दोस्तों मां का जगह कोई नहीं ले सकता दोस्तों मां का प्यार करने और तोहफे देने के लिए किसी खास दिन की जरूरत नहीं है फिर भी हम जागरूकता लाने के लिए इस दिवस को बनाते हैं फिर मिठाई और ढेर सारा प्यार के साथ अपने जननी ईश्वर के स्वरूप मां को प्यार करते हैं याद रखना दोस्तों हर एक नारी मां है चाहे उससे मेरा कोई भी रिश्ता हो लेकिन किसी न किसी की मां है या कभी ना कभी मां बनेगी एक नारी है और मां ईश्वर के स्वरूप है इसलिए ईश्वर की पूजा करने की जरूरत नहीं है

मां का ही पूजा ईश्वर का पूजा है...

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