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Wednesday, May 13, 2020

संकट काल में सकारात्मकता के मायने

जैसा कि प्रकृति का नियम रहा है कि मौसम परिवर्तन के साथ मानव जीवन पर सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनो तरह से प्रभावित करती हैं ठीक उसी प्रकार इस महामारी कोरोना ने भी हमारे दैनिक जीवन में दोनो तरह के प्रभाव छोडे हैं कुछ सकारात्क तो कुछ नकारात्क।अब आवश्यक हो गया है कि हम सिर्फ सकारात्क पहलू की ओर देखे।

जिसका एक पहलू कल के सम्बोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्म निर्भर बनाने के लिए स्वदेशी निर्मित सामानो के उपयोग और उत्पादन पर जोर देने की बात कही।यह करोना में छिपे भविष्य का सकारात्मक पहलू साबित हो सकता है, जो एक साथ कई रास्ते खोलने वाला   है जो चीन जैसे मुल्कों पर प्रहार होगा। इसे सफल बनाने के प्रयासो को सरकार के साथ लोगो को एकजुटता और विदेशी समानो का वाहिष्कार करना आवश्यक होगा। भारत में हर वस्तु का उत्पादन होने का मतलब होगा रोजगार के नये अवसर सृजित करना। स्वदेशी सामान कीमतो को भी कम करेंगी और महँगाई नियंत्रित होगी। विदेश जाने वाले धन पर रोक लगेगी साथ ही साथ हमसे जो सामान लेंगे तो विदेशी मुद्रा भंडार बढेगा। स्वाबलंबन का यह पाठ एक नई ऊर्जा लेकर आयेगा ऐसी आशाएँ  देश की बनती दिख रही है।एक समय था जब हम ज्यादातर सामान विदेशो से लाते थे लेकिन बहुत से क्षेत्रो में हमने काफी हद तक तरक्की की है लेकिन जब सभी सामान देश में बने और बिकने लगेंगे तो इसके परिणाम सुखदायी और स्वाबलंबी बनाने मे कारगर होगा।संकट की घड़ी में ही समस्याओं का हल निकलता है जैसे हमने मास्क और टेस्ट ट्यूब बनाया। आज के इस टेक्नीकल युग में किसी भी सामान को बनाने की क्षमता हमारे पास होनी ही चाहिए तभी हम विकसित और सुदृढ अर्थव्यवस्था के साथ दुनिया से कदम से कदम मिलाकर चल सकेंगे।यह सोच नये भारत के स्वाबलंबन की ओर बढ़ते कदम है। जिसमें ऐसा भारत होगा जो पूरे विश्व को प्रेरित करेगा,तथा यह 21सदी का दौड़नेवाला भारत, हिफाजत  करने वाला भारत,  राह दिखाने वाला भारत तथा मदद करने वाला भारत बनेगा जिसकी झलक इस संकट के पल देखा भी गया।जब मेडिसीन और जरूरी सामान देकर हमने दुनिया की मदद की।

इस वायरस की मौजूदगी ने पूरे विश्व को अपने आगोश में ले लिया। दुनिया के पास विकल्प नहीं के बराबर था।कोई कारगर वैक्सीन नही थी। ऐसे में सुरक्षित उपायो पर प्रकाश डाला गया और फिर लाॅकडाउन को प्राथमिकता दी गयी।सबकुछ बंद करना पड़ा।जिससे थोड़ी दिक्कतें आयी परेशानियाँ बढ़ी लेकिन पर्यावरण को काफी लाभ हुआ ।जो एक अच्छी और भविष्य का विकल्प उपहार स्वरूप दुनिया को दे गया।जब भी प्रदूषण स्तर ज्यादा होगा कुछ दिन लाक डाउन किया जा सकता है।

बंदी के कारण ही ओजोन के होल भरने लगे पेड़ पौधे हरी और धूल रहित होने लगी। वायुमंडल में पर्याप्त शुद्धता है। हवा शुद्ध हुई। नदियां साफ हुई ।गंगा साफ हुई ।पानी का लेयर कम हुआ और तो और पशु पक्षी जो विलुप्त होने लगे थे वो भी दिखने लगी हैं।मानव शरीर को भी कुछ दिन ही सही आराम करने का मौका मिला।परिवार बच्चो के साथ समय बिताने के अवसर मिले है।कई लोगो ने इन खाली समय में जिसकी जिसमे भी रूचि थी वह कार्य करके जैसे कोई लिख रहा, कोई ओन लाइन पढ़ा रहा,  कोई पेटिग्स,  कोई गीत गजल गाकर विभिन्न प्रकार की प्रतिभाओ को निखारा है । जिससे उनको आने वाले समय में काफी लाभ मिलेगा।

हमें नकारात्मक पहलू को पीछे छोड़ आने वाले उन सुनहरे सपनो की ओर हिफाजत से बढ़ाने होंगे जिसके सपने हमारे प्रधानमंत्री ने दिखाया है।उन बूरे दिनों को भूलना होगा जो इस महामारी ने हमे दिखाए हैं।सिर्फ और सिर्फ सकारात्मक पहलू की ओर देखकर आगे बढ़ने का प्रयास करनी होगी ।

                                      आशुतोष

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