हे राम प्रथम प्रहार करो

हे राम सृष्टि के रचनाकर, तुम ही इस पर अधिकार करो

ये वसुंधरा तेरी सारी, जग की पीड़ा स्वीकार करो,
इक चीन के कृत्यों पर अबतक खामोश खड़े प्रभु जड़वत से...
जैसे रावण को मारा था अविलम्ब चीन पर वार करो,
हे राम पुनः प्रहार करो, क्या चौदह बरस लगाओगे,
एक वर्ष में सहम गई धरती, विस्वास तोड़कर आओगे,
कब आओगे क्या फिर से जब वुहान का कीड़ा पनपेगा.
जैसे छोड़ा माँ सीता को, प्रभु वैसे ही पछताओगे,
हे राम प्रथम प्रहार करो, गलवान - सिंधु को याद करो,
तडफे है हम सब तड़फ तड़फ, भगवान विंदु को याद करो,
हर बरस जला रावण रघुवर, पूरी रामायण लिखवा दी..
हर दिन की जलती काया का वो दृश्य प्रभु तुम याद करो,

बजरंगी कूदे लंका में , पुरुषोत्तम तेरी शह पाकर,
आदेश पुनः खामोश है क्यों, चीनी कृत्यों की तह पाकर,
मर्यादा हो गयी तार तार, सभ्यता अमित तेरे अधीन...
कह रही अयोध्या राम राम, दुख सह न जाये न कह पाकर,

रचना : - अमित पाठक बहराइच

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