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Showing posts from May, 2019

महिलाओं को शिक्षित करें और उन्‍हें प्रबुद्ध एवं सशक्‍त बनाएं : उपराष्‍ट्रपति

उपराष्‍ट्रपति श्री एम.वेंकैया नायडू ने शिक्षा पर विशेष जोर देने के साथ-साथ संसद और राज्‍यों की विधानसभाओं में आरक्षण जैसे प्रगतिशील उपायों पर अमल करके महिलाओं को सशक्‍त बनाने का आह्वान किया है। श्री नायडू ने महिलाओं और पुरुषों में भेदभाव किये जाने की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्‍यक्‍त करते हुए समाज में लोगों के व्‍यवहार एवं नजरिये में बदलाव लाकर इस पर अंकुश लगाने की आवश्‍यकता को रेखांकित किया है। श्री नायडू ने आज नई दिल्‍ली में अपने आवास पर चाणक्‍यपुरी स्थित कार्मेल कॉन्‍वेंट स्‍कूल की छात्राओं से संवाद करते हुए कहा कि किसी लड़की को शिक्षि‍त करना एक पूरे परिवार को शिक्षित करने के समान है, जबकि एक आदमी को शिक्षित करना सिर्फ एक व्‍यक्ति को शिक्षित करने के समान है। उपराष्‍ट्रपति ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिक्षा की अहमियत न केवल रोजगार, बल्कि सशक्तिकरण और ज्ञानोदय से भी जुड़ी हुई है। उन्‍होंने कहा कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना का लक्ष्‍य बालिकाओं का सशक्तिकरण करना है। श्री नायडू ने कहा कि शिक्षा निश्चित रूप से ऐसी होनी चाहिए जो नागरिकों को आदर्श एवं जिम्‍मेदार बनाए और इसके

तम्बाकू मुक्त परिसर" घोषित करने हेतु एक संवादात्मक वार्ता का आयोजन 

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आज दिनांक 31 मई, 2019 को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस (वर्ल्ड एंटी टोबैको डे) के अवसर पर मर्चेंट्स चैम्बर ऑफ उत्तर प्रदेश ने अपने परिसर को "तम्बाकू मुक्त परिसर" घोषित करने हेतु एक संवादात्मक वार्ता का आयोजन किया।   आज की यह वार्ता श्री बी.एम. गर्ग, अध्यक्ष, मर्चेंट्स चैम्बर ऑफ उत्तर प्रदेश, की अध्यक्षता में समपन्न हुई जिसमें मुख्य रूप से डॉ.  आई.एम. रोहतगी, श्री प्रेम मनोहर गुप्ता,  , सुनील खन्ना, संतोष गुप्ता, आत्मा राम खत्री, मुकुल टंडन, अतुल कनोडिया, डॉ. उमेश पालीवाल, विजय पांडे, सुशील शर्मा, महेंद्र नाथ मोदी उपस्थित थे। उक्त वार्ता में यह बताया गया कि पान, मसाला, व् तम्बाकू सेवन न केवल  बीमारियों के लिए आमंत्रण है वरन यह वह जानलेवा पदार्थ है जो उस व्यक्ति के साथ-साथ पुरे परिवार को तोड़ के रख देता है। तम्बाकू सेवन से होने वाली बीमारियों में हार्ट अटैक, ब्रेन-स्ट्रोक, मुँह का कैंसर, फेफड़ों का गलना व् बांझपन भी एक भयानक बीमारी है। अपना शहर कानपुर को अगर हम तम्बाकू सिटी के नाम से कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योकि लगभग अधिकांश नागरिक के मुँह में हम पान-मसाला व् तम्बाकू

आर्सेनिक की चपेट में उत्तर प्रदेश की ग्रामीणआबादी- उमाशंकर मिश्र

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 नई दिल्ली, 30 मई (इंडिया साइंस वायर): आर्सेनिक सेप्रदूषित जल का उपयोगस्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। भारतीय शोधकर्ताओं के एक नए अध्ययन में पता चला है किउत्तर प्रदेश की करीब 2.34 करोड़ ग्रामीण आबादी भूमिगत जल में मौजूद आर्सेनिक के उच्च स्तर से प्रभावित है। विभिन्न जिलों से प्राप्तभूमिगत जल के 1680 नमूनों का अध्ययन करने के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं। इस अध्ययन में उत्तर प्रदेश के 40 जिलों के भूजल में आर्सेनिक का उच्च स्तर पाया गया है। राज्य के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित जिलों में आर्सेनिक का उच्च स्तर पाया गया है। इनमें से अधिकांश जिले गंगा, राप्ती और घाघरा नदियों के मैदानी भागों में स्थित हैं। बलिया, गोरखपुर, गाजीपुर, बाराबंकी, गोंडा, फैजाबादऔर लखीमपुर खीरी आर्सेनिक से सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं। शाहजहांपुर, उन्नाव, चंदौली, वाराणसी, प्रतापगढ़, कुशीनगर, मऊ, बलरामपुर, देवरिया और सिद्धार्थनगर के भूजल में आर्सेनिक का मध्यम स्तर पाया गया है। उत्तर प्रदेश की करीब 78 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है जो सिंचाई, पीने, भोजन पकाने और अन्य घरेलू कामों के लिए भूजल पर नि

एनएसआईसी ने सूक्ष्‍म, लघु तथा मध्‍यम उद्यम मंत्रालय के साथ सहयोग ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किया

राष्‍ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (एनएसआईसी) ने वर्ष 2019-20 के लिए सूक्ष्‍म, लघु तथा मध्‍यम उद्यम मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किया है। समझौता ज्ञापन पर एएस तथा डीसी (एमएसएमई) तथा एनएसआईसी के सीएमडी राम मोहन मिश्रा तथा एमएसएमई मंत्रालय के सचिव डॉ. अरुण कुमार पांडा ने हस्‍ताक्षर किए। इस अवसर पर सूक्ष्‍म, लघु तथा मध्‍यम मंत्रालय की संयुक्‍त सचिव अलका नांगिया अरोड़ा निदेशक (एमएमई) मर्सी ईपाव, निदेशक पी तथा एम (एनएसआईसी) पी उदय कुमार और निदेशक वित्त (एनएसआईसी) ए के मित्तल उपस्थित थे। समझौता ज्ञापन में देश में सूक्ष्‍म, लघु तथा मध्‍यम उद्यमों के लिए एनएसआईसी द्वारा अपनी विपणन, वित्तीय, टेक्‍नोलॉजी तथा अन्‍य समर्थनकारी सेवा योजनाओं को बढ़ाने का प्रावधान है। निगम को 2019-20 में संचालन से राजस्‍व प्राप्ति 22 प्रतिशत बढ़ने की आशा है। यह राजस्‍व 2018-19 में 2540 करोड़ रुपये से 22 प्रतिशत बढ़कर 2019-20 में 3100 करोड़ रुपये हो जाएगा। वर्ष 2019-20 में एनएसआईसी  के मुनाफे में 32 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है। निगम प्रशिक्षुओं की संख्‍या में 45 प्रतिशत की वृद्धि लक्ष्‍य तय करके उ

भारत कथाकारों की भूमि; भारतीय फिल्‍म निर्माताओं को निजी कथाएं तेजी से बताने पर ध्‍यान देना चाहिए : जॉन बैली

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      सिनेमा में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज के अध्यक्ष जॉन बैली के साथ नई दिल्‍ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में बातचीत के विषय सत्र का आयोजन किया। सत्र के बाद श्री बैली ने प्रेस के साथ बातचीत की।   सत्र में श्री जॉन बैली ने एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज में भारतीयों की सदस्‍यता बढ़ाने की आवश्‍यकता के बारे में चर्चा की। उन्‍होंने एकेडमी में विविध सदस्‍यों की संख्‍या दोगुनी करने की एकेडमी की पहल को उजागर किया और कहा कि भारत अवसरों, चुनौतियों और विविधता को एकजुट करने का प्रतिनिधित्‍व करता है। इस बातचीत के जरिए अनेक जन संचार मीडिया संस्‍थानों से आए उभरते फिल्‍म निर्माताओं और छात्रों को न केवल एकेडमी के अध्‍यक्ष श्री जॉन बैली बल्कि मास्‍टर सिनेमेटोग्राफर जॉन बैली से भी बातचीत का अवसर मिला। बातचीत के दौरान न केवल फिल्‍म तकनीक की अग्रणी अवस्‍था में कला की बारीकियों पर प्रकाश डाला गया, बल्कि विश्‍व स्‍तर की विषय वस्‍तु तैयार करने के बारे में भी समझ विकसित करने में सहयोग किया गया। श्री बैली ने उन पर

विटामिन-डी की कमी से हो सकता है हार्ट फेल

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 दिनेश सी शर्मा नई दिल्ली, 28 मई (इंडिया साइंस वायर): शरीर में विटामिन-डी का उत्पादन करने के लिए हर रोज धूप की खुराक हड्डियों की मजबूती के साथ-साथ हृदय को सेहतमंद रखने में भी मददगार हो सकती है। एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि हृदय को स्वस्थ रखने में भी विटामिन-डी महत्वपूर्ण हो सकता है। यह तो दशकों से सभी जानते हैं कि शरीर में विटामिन-डी की कमी से हड्डियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। पिछले कुछ सालों में वैज्ञानिकों ने विटामिन-डी की कमी की पहचान हृदय के स्वास्थ्य को निर्धारित करने वाले कारक के रूप में की है। अब भारतीय शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि विटामिन-डी की कमी से होने वाले इंसुलिन प्रतिरोध के कारण भी हार्ट फेल हो सकता है। इंसुलिन बेहद उपयोगी हार्मोन है जो रक्त में उपस्थित शर्करा को ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। इंसुलिन शरीर में कई ऊतकों में कोशिकीय चयापचय के नियमन में भी भूमिका निभाता है। हृदय कोशिकाओं में इंसुलिन प्रतिरोध के कारण हृदय में ग्लूकोज और वसा अम्ल जैसे ऊर्जा उत्पादकों का उपयोग बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। हृदय को नुकसान पहुंचाने वाले अधिक वसा और उच्च कैलोरी वाले भोजन

पिछले एक दशक में कम हुए हैं गंभीर एनीमिया के मामले डॉ अदिति जैन

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 नई दिल्ली, 29 मई (इंडिया साइंस वायर): पुरुषों में हीमोग्लोबिन का स्तर 13.5 और महिलाओं के मामले में 12 से कम होने पर शरीर में रक्त कमी की स्थिति मानी जाती है। जबकि हीमोग्लोबिन का स्तर 07 से कम हो तो गंभीर एनीमिया का मामला बनता है। सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता से जुड़ा यह मामला भारत के लिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि गंभीर रूप से एनीमिया के शिकार दुनिया के एक-चौथाई और दक्षिण एशिया के 75 प्रतिशत लोग यहीं पर रहते हैं। एनीमिया उन्मूलन एक चुनौती है, पर हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम ऑफ इंडिया के आंकड़ों पर आधारित एक नए अध्ययन से पता चला है कि पिछले करीब एक दशक में भारत में एनीमिया के गंभीर मामलों में 7.8 प्रतिशत की गिरावट हुई है। वर्ष 2008-09 में गंभीर एनीमिया के 11.3 प्रतिशत मामलों की तुलना में वर्ष 2017-18 में इसके 3.29 प्रतिशत मामले सामने आए हैं। 2010-11 और 2017-18 के दौरान विभिन्र राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एनीमिया की स्थिति विभिन्न राज्यों में भी गंभीर एनीमिया के मामलों में विविधता देखने को मिलती है। केरल, नागालैंड, हिमाचल प्रदेश और गोवा में गंभीर एनीमिया के सिर्फ दो प्रतिशत मा

जहाँ पानी ज्यादा खारा नहीं है वहां आरओ बैन करे सरकार

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नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने केंद्र सरकार से कहा है कि जिन इलाकों में पानी ज्यादा खारा नहीं है, वहां रिवर्स ओस्मोसिस (आरओ) उपकरणों के इस्तेमाल पर बैन लगाया जाए। एनजीटी ने सरकार को इस बारे में नीति बनाने का भी निर्देश दिया। आदेश में कहा गया है कि जिन जगहों पर पानी में टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स (टीडीएस) की मात्रा 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम है, वहां घरों में सप्लाई होने वाले नल का पानी सीधे पिया जा सकता है। एनजीटी ने यह भी कहा कि 60 फीसदी से ज्यादा पानी देने वाले आरओ के इस्तेमाल की ही मंजूरी दी जाए। सरकार की प्रस्तावित नीति में आरओ से 75 फीसदी पानी मिलने और रिजेक्ट होकर निकलने वाले पानी का इस्तेमाल बर्तनों की धुलाई, फ्लशिंग, बागवानी, गाड़ियों और फर्श की धुलाई आदि में करने का प्रावधान होना चाहिए। एनजीटी ने केंद्र सरकार से यह भी कहा है कि लोगों को मिनरल वाले पानी से सेहत को संभावित नुकसानों के बारे में भी बताया जाए। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने उसके द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद आदेश पारित किया और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को निर्दे

पक्षियों के लिए खतरा बन रही हैं पवन-चक्कियां सुशीला श्रीनिवास

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बेंगलुरु, 27 मई (इंडिया साइंस वायर): पवन अक्षय ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत मानी जाती है। लेकिन, पवन- चक्की की टरबाइनें आसपास के क्षेत्रों में पक्षियों के जीवन के लिए खतरा बनकर उभर रही हैं। एक नए अध्ययन में पता चला है कि पवन-चक्कियों के ब्लेड से टकराने के कारण पक्षियों की मौत हो रही है। गुजरात के कच्छ में स्थित सामाख्याली और कर्नाटक के हरपनहल्ली और दावणगेरे में पवन-चक्की संयंत्रों के आसपास पक्षियों की मौतों के कारणों की पड़ताल करने के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं। इस अध्ययन के दौरान सामाख्याली में 11 प्रजातियों के पक्षियों के 47 कंकाल मिले हैं। इसी तरह, हरपनहल्ली के पवन-चक्की संयंत्रों के आसपास तीन प्रजातियों के सात पक्षी कंकाल पाए गए हैं। मृत पक्षियों के कंकालों का पता लगाने के लिए टरबाइनों के 130 मीटर के दायरे में खोजबीन की गई है। टरबाइन के आसपास के क्षेत्रों की पूरी तरह से खोजबीन करने के लिए पवन-चक्की के आधार से सर्पिल मार्ग चुना गया ताकि अधिक संख्या में मृत पक्षी कंकाल खोजे जा सकें। शोधकर्ताओं ने पवन-चक्की टावरों के आसपास पाए गए पक्षियों के शवों, उनके शरीर पर चोट के निशान और प

गोबर के कंडे का इतिहास

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धरोहर, गोबर कंडे का होली से क्या रिश्ता है, गोबर की राख में सोना, चांदी, बिजली, धुआं से देवता पुरखे के प्रसन्न क्यों होते हैं। गोबर शब्द का प्रयोग गाय, बैल, भैंस के मल को कहते हैं। घास भूसा खली जो कुछ चैपाया जानवर खाते हैं उनके पाचन से निकले रासायनिक प्रक्रिया को गोबर कहते हैं, ठोस या पतला होता है, रंग पीला काला होता है इसमें घास के टुकड़े अन्न के कुछ कर्ण होते हैं सूख जाने के बाद भी है कंडे के रूप में जाना जाता है। गाय का गोबर कंडे के लिए ज्यादा अच्छा होता है, गोबर में खनिजों की मात्रा अधिक होती है इसमें फास्फोरस, नाइट्रोजन, चूना, पोटाश, मैग्नीज, लोहा, सिल्कन, एलमुनियम, गंधक कुछ आंशिक मात्रा में विद्यमान रहते हैं। आयोडीन की मात्रा भी होती है इसीलिए गोबर को खेत में डाला जाता है जिन कारणों से मिट्टी को उपजाऊ बनाने में खेत के लिए मदद मिलती है गोवर में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो मिट्टी को जोड़ते हैं अंदर हवा देते हैं जैसे कंपोस्ट खाद केंचुआ खाद, जैविक खाद, गोबर की खाद से धूप अगरबती तैयार होती है। गोबर के कंडों को ईंधन के रूप में प्रयोग करते हैं जिससे खाना बनता है गोबर का महत्व इस बात से लगाय