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Showing posts from October, 2020

अम्बे माँ का जगराता

          हमेशा की तरह हाथ में कपड़ो से भरा हुआ पुराना बैग लिए राजू के पड़ोस की सरोज अम्मा उसके पास से जा रही थी।सरोज रोज के मुकाबले आज बहुत ही खुश नजर आ रही थी।आमतौर पर सरोज के चेहरे पर हमेशा एक मंद मुस्कान दिखाई देती थी।लेकिन आज उनके चेहरे पर मुस्कान देखकर राजू ने उनसे पूछ ही लिया - अम्मा आज तो बहुत खुश नजर आ रही हो।क्या बात है?          सरोज हापुड़ के एक सरकारी मकान में काफी समय से अकेले रहती थी।सरोज के पति का जब स्वर्गवास हुआ तब वो एक सरकारी जॉब पर थे।उनका बेटा भी मुजफ्फरनगर में एक बहुत ही अच्छे सरकारी पद पर कार्यरत है और काफी संपन्न है।लेकिन राजू ने देखा की उनका बेटा काफी समय से उनसे मिलने आया नहीं है और ना ही उसने सरोज को कभी अपने बेटे के पास जाते हुए देखा।            लेकिन सरोज को देखकर कभी भी नहीं लगता कि सरोज किसी भी वजह से परेशान है।चाहे वह आज इतनी खुश हो या ना हो लेकिन उनके चेहरे पर एक मीठी मुस्कान हमेशा रहती है।अक्सर पड़ोस में चर्चाएं रहती हैं कि इतनी अच्छी सैलरी पर इनका बेटा कार्यरत है।लेकिन सरोज कुछ ना कुछ काम करते हुए अपने आपको हमेशा व्यस्त रखती है।कभी आसपास के दर्जियों क

आज समाज के भीतर पनप रहे रावण को जलाने की जरूरत 

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आज हर तरफ फैले भ्रष्टाचार और अन्याय रूपी अंध कार को देखकर मन में हमेशा उस उजाले को पाने की चाह रहती है, जो इस अंधकार को मिटाए। कहीं से भी कोई आस न मिलने के बाद हम अपनी संस्कृति के ही पन्नों को पलट आगे बढ़ने की उम्मीद करते हैं।   रावण को हर वर्ष जलाना असल में यह बताता है कि हिंदू समाज आज भी गलत का प्रतिरोधी है। वह आज भी और प्रति दिन अन्याय के विरुद्ध है। रावण को हर वर्ष जलाना अन्याय पर न्यायवादी जीत का प्रतीक है, कि जब जब पृथ्वी पर अन्याय होगा हिन्दू संस्कृति  उसके विरुद्ध रहेगी।   आतंकवाद, गंदगी, भ्रष्टाचार और महंगाई आदि बहुमुखी रावण है। आज के समय में ये सब रावण के प्रतीक हैं। सबने रामायण को किसी न किसी रुप में सुना, देखा और पढ़ा ही होगा। रामायण यह सीख देती है कि चाहे असत्य और बुरी ताकतें कितनी भी प्रबल हो जाएं, पर अच्छाई के सामने उनका वजूद उनका अस्तित्व नहीं टिकेगा। अन्याय की इस मार से मानव ही नहीं भगवान भी पीड़ित हो चुके हैं लेकिन सच और अच्छाई ने हमेशा सही व्यक्ति का साथ दिया है ।   दशहरा का पर्व दस प्रकार के पाप : काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी को हर

   साथियों वोट  देने चलो 

साथियों वोट देकर बनो लोकतंत्र का पहरेदार वोट से करो बदलाव नेता के बदलो हाव - भाव  आप साथी सही उम्मीदवार का करना चुनाव भूलकर भी बेईमानों को मत देना आप भाव  देखो साथी आपका वोट है आपकी ताकत  हम सभी का लोकतंत्र  में यही तो ताकत है  वोटर आईडी संग लेते जाना सुबह में ही आप ध्यान रहे साथियों उस इंसान को देना वोट जो हो सच्चा ईमानदार लोकतंत्र की प्रहरी हो मतदान के दिन घर में ही आप ना रह जाना  वरना पांच साल पड़ेगा सहना साथियों कुछ लोग तो लोकतंत्र  का आनंद उठाते हैं फिर ऐसे लोग वोट क्यों नहीं दे आते ? याद रखना आप वोट से आएगा बदलाव समाज सुधरेगा, कम होगा तनाव साथी लोकतंत्र की लाज बचाने वालों की पहचान करो घर से निकलें बाहर आए मिलकर मतदान करो अगर कुछ ना समझ में आए तो नोटा ही दबा देना  लेकिन लोकतंत्र की मजबूती के लिए वोट जरूर करें अधिकारों की खातिर हम सभी को लड़ना होगा चाटुकारिता व लालच से दूर सदा रहना होगा साथियों हमें चोर-उचक्कों से क्या डरना ? आओ हम सभी  ऐलान करें घर से निकले मिलकर मतदान करके लोकतंत्र को मजबूत करें।।  

रामविलास पासवान का निधन

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नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री के निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि उनके निधन से देश में ऐसा शून्य पैदा हुआ है जो शायद कभी नहीं भरेगा। पासवान का आज 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके बेटे  ने ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी। उनके निधन पर मोदी ने कहा, ‘‘दुख बयान करने के लिए शब्द नहीं हैं मेरे पास। हमारे देश में ऐसा शून्य पैदा हुआ है जो शायद कभी नहीं भरेगा’’ उन्होंने कहा, ‘‘रामविलास पासवान जी का निधन मेरी निजी क्षति है। मैंने अपना एक दोस्त, बहुमूल्य सहयोगी और एक ऐसा व्यक्तित्व खो दिया है जो हर गरीब इंसान को सम्मान का जीवन सु निश्चित करने को लेकर बहुत भावुक थे।’’  कड़ी मेहनत और दृढ़ता से राजनीति में अपनी एक विशेष पहचान बनाने वाले लोक जनशक्ति पार्टी के नेता की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक युवा नेता के रूप में पासवान ने ‘‘आपातकाल के दौरान लोकतंत्र पर हुए हमले और अत्याचार’’ का पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने कहा, ‘‘वह एक उत्कृष्ट सांसद और मंत्री थे जिन्होंने नीतिगत क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।’’ वह पांच दशक से अधिक समय से सक्रिय राजनीति

उमेश कुशवाहा को पुनः टिकट मिलने से कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर

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हनार (संवाददाता)दैनिक अयोध्या टाइम्स।अम्रपाली की भूमि वैशाली के महनार विधानसभा से जदयू ने निवर्तमान विधायक उमेश सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। जिससे कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। आज सिंबल प्राप्त कर विधायक उमेश सिंह कुशवाहा पटना से महनार पहुंचे। महनार के अंबेडकर चौक पर बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। जहां नगर अध्यक्ष अंशु राज जायसवाल और शिक्षा प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष चंदन कुमार सिंह के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने भव्य स्वागत किया। वही सूफी संत खाकी बाबा के दरबार में मन्नते मांगी। वहां से निकलकर विधायक जी ने बासुकीनाथ, केदारनाथ,बैजनाथ आदि नाथों के समूह बाबा गणिनाथ के दरबार में पहुंचे और आशीर्वाद लिया। जहां चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष इंद्रजीत राय,पथल राय,नगर निकाय के अध्यक्ष नागेश्वर चौधरी, अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष कुलदीप साह, रामसेवक सिंह आदि लोगों ने स्वागत किया। वहीं स्टेशन रोड बजाज एजेंसी के पास भाजपा के युवा प्रखंड अध्यक्ष अमिष कुमार के नेतृत्व में दर्जनों युवा कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। वही पहाड़पुर बिशनपुर में अरविंद रजक, मिथिलेश गुप्ता, राजेश र

"पारंपरिक और पोषक भोजन से समृद्ध होगा हमारा संस्कृति

अच्छा भोजन ही हमारा प्राथमिक भोजन है, जो कि हमारे समृद्ध परंपरा से ही प्राप्त होता है। हमें वही भोजन करना चाहिए जो प्रकृति और पोषण को आजीविकाओं के साथ जोड़ता है। ऐसा भोजन करने से दोस्त  स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छा है, जैसा कि आप जानते  ही हैं कि ऐसा भोजन हमें हमारी समृद्ध जैव विविधता से प्राप्त होता है जोकि लोगों को रोजगार भी प्रदान करता है। जैसा कि हम सब देख रहे हैं दोस्त की कोविड 19 से उपजी वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण जहां आज पूरा विश्व के इंसान अपने स्वास्थ्य को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक और सचेत हो चुके हैं। जहां भी देखे हम लोग हर तरफ चर्चा हो रही है कि अपनी इम्यूनिटी हम कैसे बढ़ाए , जिसके लिए लोग गिलोय, तुलसी और अदरक के साथ ही और भी विभिन्न प्रकार के औषधियों से अपने इम्यूनिटी को बढ़ा रहे हैं साथ ही हरी सब्जियों का अधिक से अधिक अब अपने घरों में जहां प्रयोग कर रहे हैं वही हम देख रहे हैं दूसरी तरफ की जैसे ही देश में लॉकडाउन में ढील दी गई फिर से लोग लापरवाही करना शुरू कर दिए हैं, देखने में आता है कि लोग मास्क तो लगाते है, ज्यादातर लोग इसलिए कि कहीं पुलिस  चलाना ना कर दें,

कोरोना का भय

चारों ओर मचा है देखो कोरोना का रोना , नहीं समझ में आता इसका अंत कहां है होना , चीन में इसने जन्म लिया और पहुंचा जाके इटली , सारे देश बने हैं अब इसके हाथों की तितली , मुश्किल किया सभी का इसने अब तो जगना सोना , चारों और मचा है देखो कोरोना का रोना , नहीं ढूंढ पाया अब तक उपचार कोई भी इसका ,  कैसे काबू करें इसे है अक्स न दिखता जिसका , इसके सम्मुख लगता है अब मानव बिल्कुल बौना , चारों ओर मचा है देखो कोरोना का रोना , इसके भय से छुप कर बैठे आज सभी हैं घर में ,  जान बचानी है अपनी तो रहना इसके डर में , पता नहीं कब धावा बोले हमको समझ खिलौना , चारों ओर मचा है देखो कोरोना का रोना  

आधुनिक समाज बनाम शार्टकट की बुनियाद 

जैसे-जैसे हम और हमारा समाज आधुनिकीकरण से रूबरू हो रहा है, वैसे-वैसे उसके जीने की कला और सोच में भी भारी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। आज के दौर का हमारा आधुनिक समाज दौड़ कर जीतने के बजाय, तोड़ कर हराने में ज्यादा विश्वास करने लगा है। आम आदमी हो या विशिष्ट, सबकी निगाहों में सफलता का यह शार्टकट सबसे आसान और कारगर लगता दिख रहा है। जीवन जीने की कला का दौड़ हो या कैरियर बनाने की होड़ सब पर यह शार्टकट लगभग हावी नजर आ रहा है। राजनैतिक क्षेत्रों में तो यह शार्टकट 'तोड़ कर हराना' बहुत ही पुराना व कारगर पैतरा माना जाता रहा है, परंतु पहले के समय में इसके भी कुछ अपने कायदे-कानून हुआ करते थे। आज के आधुनिक दौर में इस शार्टकट का ना तो कोई नियम है और ना ही कोई कानून! मगर अपनाए खूब जा रहे हैं। इस आधुनिक समाज में कोई यह सोचने को तैयार नहीं है कि यह तोड़ कर जीतने का शार्टकट मानवता के लिए कितना बड़ा खतरा हो सकता है।  आधुनिक युग हो या आदिकाल, जीतने, पाने व छीनने की चाह, सबकी प्रवृत्ति एक जैसी ही रही है, मगर यह प्रवृत्ति दौड़ कर जीतने की ज्यादा रहती थी, ना कि तोड़ कर हराने में! आधुनिकीकरण ने हमें औ

अन्नदाता राजनैतिक दलों का मोहरा बना हुआ है

कृषि बिल  को लेकर हम सभी देख रहे है कि आज  पूरे देश में माहौल गरमाया हुआ है. विपक्ष जहां एक तरफ जोरदार ढंग से प्रदर्शन कर रहा है. तो वहीं पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के किसान भी इन बिलों को  लेकर खासे आक्रामक हैं। ध्यान से देखिए आप आज कहीं ना कहीं खेती -किसानी के लिए सोच- विचार कुछ ज्यादा ही अचानक बढ़ गया है । आज सिर्फ किसान और सरकारे ही नहीं बल्कि शहरों में रह रहे नौकरीपेशा, उद्योग धंधों में लगे और सामाजिक चिंताशील लोग भी कृषि पर विमर्श करते दिख रहे हैं। इससे देश में कृषि पर संकट की तीव्रता दिखे या ना दिखे लेकिन राजनीतिक दलों के संकट कितना है यह जरूर दिख रहे,दोस्त आज आजादी के इतने वर्षों के बाद भी हमारे अन्नदाता के जीवन में कोई बदलाव तो नहीं आए हैं लेकिन राजनीतिक दल अपना हित साधने में जरूर सफल हो जाते हैं। कृषि और किसानों के लिए क्या और कितना किया जाए, इस विषय पर पिछले दो दशकों में सरकारी एवं गैर सरकारी स्तर पर खूब विचार विमर्श हुआ तथा दोनों ही स्तर पर विशेषज्ञ समितियों की ढेरों सिफारिशे हमारे सामने है। लेकिन दोस्त कृषि सुधार की हर योजना और उपाय की बात देश के सीमित संसाधन

अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर ज्ञान के प्रकाश का दीप जलायें 

5 अक्तूबर को विश्व शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। जीवन में सफलता का श्रेय शिक्षक को ही जाता है। कबीरदास जी कहते है कि बड़े-बड़े विद्वान शास्त्रों को पढ़कर ज्ञानी होने का दम भरते हैं, परंतु गुरु के बिना उन्हें ज्ञान नहीं मिलता और ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं मिलती है। इस बात में कोई संदेह नहीं गुरु द्वारा दिखाया गया मार्ग ही सफलती की कुंजी है। आज से ठीक एक महीने पहले यानी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस था, जिसे पूरे देश ने मनाया गया। हर साल ऐसा ही होता है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि विशेषता एक होने के बावजूद दिन अलग-अलग क्यों हैं। अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1966 में यूनेस्को और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की हुई संयुक्त बैठक के कारण मनाया जाता है। उस बैठक में अध्यापकों की स्थिति को लेकर चर्चा की गई थी और सुझाव भी प्रस्तुत किए गए थे। इस दिन मुख्य रूप से कार्यरत अध्यापकों एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों को उनके विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है।   इस विशेष दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन का जन्म हुआ था। उनके जन्म दिवस को

'नोटा ' आज के लोकतंत्र में नेताविहीन राजनीतिक आंदोलन की संज्ञा है

अगर हम 2017 में हुए पांच विधानसभाओं के चुनावों में नोटा के इस्तेमाल की बात करें तो सभी राज्यों में कई उम्मीदवारों की हार जीत में हमने देखा कि नोटा एक बहुत बड़ा कारण बनकर सामने आया था। इन विधानसभा चुनावों में नोटा को कुल नौ लाख छत्तीस हजार पांच सौ तीन  वोट मिले थे , दोस्त वोटों कि इस संख्या को किसी भी  सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि देश की आजादी के समय भारत में लोकतंत्र की स्थापना करते हुए जिस आम आदमी को इस लोकतंत्र की महत्वपूर्ण नीवं माना गया था , वह दोस्त हर 5 साल बाद इस भरोसे के साथ मतदान करता है कि चुनी जाने वाली सरकार उसके दुख दर्द को समझेगी और उसकी तरक्की के लिए हर संभव जरूरी कदम उठाएगी। किंतु दोस्त इस आम आदमी का भरोसा हर बार टूटता रहा और यह सिलसिला यथावत चला ही आ रहा है । बिहार में चुनावी बिगुल बज चुका है, सभी दल और प्रत्याशी जनता को अपने अपने तरीके से लुभाने का प्रयास कर रहे हैं । लेकिन हम आम आदमी का भरोसा हर बार टूटता जा रहा है इसके चलते ही हम मतदाताओं के मन में रोष पनपता जा रहा है , क्योंकि चुनावों के दौरान हमारे समझ कोई विकल्प मौजूद नहीं प

डाकघर में कल लगेगा  आधार के लिए विशेष शिविर

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राहत भरी खबर उरई प्रधान डाकघर से दैनिक अयोध्या टाइम्स ब्यूरो रिपोर्ट उरई- स्कूल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्र छात्राओं से लेकर अन्य कार्य के लिए आधार कार्ड बनवाने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है । आधार कार्ड में संशोधन कराने व नया आधार बनवाने के लिए मंगलवार 6 अक्टूबर को डाकघर की तरफ से आधार के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा। डाकघर की ओर से महा लॉगिन डे के रूप में मनाते हुए सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक प्रधान डाकघर उरई में आधार कार्ड संशोधन व नया आधार बनाने का कार्य किया जाएगा । जिले में इन दिनों आधार कार्ड बनवाने और संशोधन को लेकर मारामारी मची हुई है । कई डाकघर व बैंक की शाखाओं में आधार का कार्य या तो कम हो रहा है या हो ही नहीं रहा है इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रधान डाकघर में विशेष शिविर का आयोजन किया जा रहा है जिससे लोगों की परेशानियों को कुछ कम किया जा सके सहायक  डाक अधीक्षक उरई राजीव तिवारी ने बताया कि इसके लिए विशेष काउंटरों की व्यवस्था प्रधान डाकघर उरई में की गई है उन्होंने कहा कि 6 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक आधार बनाने व संशोधन का करने का कार्य शुर

भारतीय सेना को अपनी सेकुलर पहचान पर गर्व है

पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान द्वारा भारतीय सेना के खिलाफ और विशेष रूप से सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) में तैनात वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल तरनजीत सिंह के खिलाफ राज्य प्रायोजित दुर्भावनापूर्ण सोशल मीडिया अभियान चलाया गया। देश के भीतर धर्म आधारित असहमति को भड़काने में लगातार असफल होने के बाद पाकिस्तान हताश है। उसने अब भारतीय सेना के भीतर विभाजन की कोशिश कर रहा है। भारतीय सेना संस्थान को बदनाम करने के ऐसे कुत्सित प्रयासों को स्पष्ट रूप से खारिज करती है। भारतीय सेना एक धर्मनिरपेक्ष संगठन है, और इसके सभी अधिकारी, सैनिक अपने धर्म, जाति, पंथ या लिंग का ख्याल किए बिना राष्ट्र की सेवा करते हैं।

पीड़ा

क्या कहूं बहुत ही पीड़ा है ये हृदय भयानक जलता है इस जग में ऐसा घोर भयानक अधम कर्म क्यों पलता है क्यों बार-बार नारी का पावन आंचल मैला होता है सुन घोर भयानक कृत्यों को पत्थर का मन भी रोता है घनघोर अधम इन पापों का क्या कोई भी उपचार नहीं इन दुष्टों, नीचों, अधमों का होता अब क्यों संहार नहीं यूं भीड़ जुटाकर, शोक मनाकर चुप हो जाएंगे बस हम कुछ दिन ऐसे ही रो लेंगे पर पाप कभी न होंगे कम   रंजना मिश्रा ©️®️ कानपुर, उत्तर प्रदेश    

हमारी बीमारी को आदर्श नहीं चाहिए, हम झेल लेंगे! 

आदर्श गाँव के बारे में तो सबने सुना ही होगा कि किसी रियायतदार के हाथ एक गाँव को गोद लिया जाता है, मगर हमारा गाँव अपंग, अनाथ तो नहीं! कि उसे गोद लेना पड़े। हम अपनी शारीरिक, मानसिक और सामाजिक सभी बीमारियों से निपटने में स्वयं सक्षम हैं। देखा नहीं है क्या? कि जब हमारे बीच अनबन होती है, तो हम गाली-गलौच से अनबन का निपटारा कर ही लेते हैं। इससे भी अगर बात नहीं बनती तो लाठी-डंडों से समझौता हो ही जाता है, ऐसे में जब हम अपने मामलों को स्वयं येन-केन-प्रकारेण निपटा ही लेते हैं, तो हमारे गाँव को पुलिस स्टेशन जैसे आदर्श संरक्षण की क्या आवश्यकता? हमारा गाँव तो स्वयं में ही एक आदर्श है कि अपने मामलों को स्वयं निपटा लेता है। बाहरी हस्तक्षेप हमें बर्दाश्त नहीं! क्योंकि हमारा गाँव परिवार सरीखा है, अपंग, अनाथ नहीं कि कोई आए और उसे गोद लेकर आदर्श बनाए। चलो एक बार यह मान भी लेते हैं कि हमारे गाँव को आदर्श गाँव बनाने की जरूरत है, पर क्या यह बताएंगे? कि यह आदर्श गाँव बनाने की जरूरत क्यों केवल चुनावी दंगलों में ही महसूस होती है? क्या चुनावी दौर से पहले व बाद हमारा गाँव अपंग व अनाथ नहीं हो सकता?  यह एक गाँव है

जैविक और प्राकृतिक कृषि में सुनहरा भविष्य 

देश की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है, वहीं यह सेक्टर 50 फीसद से ज्यादा आबादी को रोजगार भी उपलब्ध कराता है। इसके अलावा हाल के वर्षों में जिस तरह से कृषि क्षेत्र में आधुनिकीकरण हुआ है, इसमें नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा है। पारंपरिक खेती के साथ-साथ आर्गेनिक और इनोवेटिव फार्मिंग हो रही है, उसने एग्रीकल्चर के प्रति समाज और खासकर युवाओं का नजरिया काफी हद तक बदला है। यही कारण है कि बीते कुछ समय में आईआईटी और आईआईएम से पास आउट कई युवाओं ने मल्टीनेशनल कंपनियों का जॉब छोड़कर एग्रीकल्चर और एग्रीबिज़नस की ओर रुख किया है।   जैविक खेती का जिक्र तो आजकल बहुत हो रहा है, लेकिन सवाल यह है कि किसी को इसमें करियर बनाना है, तो वह क्या करे। गौरतलब है कि यह ऐसी खेती है, जिसमें सिंथेटिक खाद, कीटनाशक आदि जैसी चीजों के बजाय तमाम आर्गेनिक चीजें जैसे गोबर, वर्मी कम्पोस्ट, बायो फर्टिलाइजरस, क्रॉप रोटेशन तकनीक आदि का इस्तेमाल किया जाता है। कम जमीन में कम लागत में इस तरीके से पारंपरिक खेती के मुकाबले कहीं ज्यादा उत्पादन होता है। यह तरीका फसलों में जरुरी पोषक तत्वों को संरक्षित रखता है और नुकसानदेह केमिकल्स से

 गूंगे बहरे और अंधो अब उठो 

ये कैसी राम राज गला घोट दिया लोकतंत्र का  देखो वो एक नही जो बे-आबरू हुई आज रे क्या हम सबकी रूह बेज़ार नहीं हुई देखकर ? वो बहन जो लुटी सर-ए-बाज़ार आज साथियों क्या वो बहन  इज्ज़त की हक़दार नहीं  यारों कितने ही आज दुर्शाशन खड़े  इस बाजार में  पर कोई रखवाला गोपाल नहीं नजर आता  कहां  छुपे हो तुम आज कृष्ण,चौकीदार  क्यों किया द्रौपदी पे आज उपकार नहीं रे लुटते मरते सब देख रहे कर रहे सियासत गांधी के देश में अब कैसा हो गया देश मेरा देखो ना यहाँ कोई भी शर्म सार नही साथियों  सिर्फ आबरू नहीं लुटी बल्कि रूह को चिरा है उसकी आँखों में दहशत है आहो में पीड़ा है वो शर्मनाक हरक़त वाले उन्हें पाप का अंजाम दो उसे मौत दो,उसे मौत दो दरिंदे ओ जानवर  किसी माफ़ी के हक़दार नही साथियों मिटा सके जो दर्द तेरा वो शब्द कहां से लाऊं चूका सकूं एहसान तेरा वो प्राण कहां से लाए खेद हुआ है आज मुझे लेख से क्या होने वाला लिख सकूं मैं भाग्य तेरा वो हाथ कहां से लाऊं देखा जो हालत ये तेरा छलनी हुआ कलेजा  रोक सके जो अश्क मेरे वो नैन कहां से लाए कैंडल मार्च, आंदोलन करके थक गए हम  लेकिन वजीर के कानों में जूं

 रीढ़ आज बेटी का ही नहीं टूटा है बल्कि देश के सभी मानव का रीढ़ टूटा है 

हम सभी ने 3 दिन पहले ही डॉटर्स डे बड़ा ही धूमधाम से मनाया, देश की बेटियों के लिए बड़ी-बड़ी बातें कही गई, तस्वीर साझा की गई बेटियों के सुनहरे भविष्य की कामना की गई, लेकिन क्या दोस्त हम एक समाज के तौर पर देश की बेटियों को आज हम यह आश्वासन दे सकते हैं कि बस अब बहुत हो गया अब ऐसा हमारे समाज में नहीं होगा, क्या हमारा शासन प्रशासन व कानून व्यवस्था यह आश्वासन भी दे सकता है कि अब ऐसा अन्याय हमारी बेटियों पर नहीं होगा? दोस्तों याद रखना संस्कार ही ऐसे घिनौनी मानसिकता से हमारे समाज मे होने वाले अपराधों से बचा सकता है। उत्तर प्रदेश के हाथरस में दो हफ्ते पहले गैंगरेप का शिकार हुई बेटी की  29 सितंबर को मौत हो गई ये 19 साल की बेटी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती थी  परिवार के मुताबिक पुलिस ने मदद नहीं किया बल्कि जब जरूरत थी इस बेटी को इलाज की तब पुलिस ने थाने में रखा हुआ था । जानकारी के मुताबिक 14 सितंबर को जब पीड़िता की हालत बिगड़ने लगी तब रिश्तेदार उसे पास के एक अस्पताल में लेकर गए. पुलिस ने शुरुआत में सिर्फ गला दबाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत ही मामला दर्ज किया था. आपको बता दें कि गैंगरेप की ध

नेता जी तुम क्यो अकड रहे हो

नेता जी तुम क्यो अकड रहे हो ? बिन पेंदे के लौटे सा लुढ़क रहे हो तुम थाली के बैगन से दिख रहे हो हर चुनाव मे दल क्यो बदल रहे हो? नेता जी तुम क्यो अकड रहे हो? गिरगिट सा रंग रोज बदल रहे हो चुनाव मे किये सारे वादे भुलाकर तुम क्यो अपनी ढ़पली बजा रहे हो? नेता जी तुम क्यो अकड रहे हो? जनता को मूर्ख क्यो समझ रहे हो? जाति,धर्म और मानवता की बलिवेदी पर  तुम तो राजनीति की रोटी सेक रहे हो। नेता जी तुम क्यो अकड रहे हो? वोट के लिए धर्म भी बदल रहे हो एक दूजे पर तंज भी कस रहे हो वोट पाने का ताना बाना बुन रहे हो। नेता जी तुम क्यो अकड रहे हो? रोजगार,शिक्षा,स्वास्थ्य और विकास भूलकर तुम कैसी ये राजनीति अब कर रहे हो? बोलो सपनो का भारत तुम कैसा रच रहे हो?   रचनाकार:- अभिषेक कुमार शुक्ला सीतापुर, उत्तर प्रदेश

 गाँधी जी की राय

       राजू एक नवी कक्षा का छात्र है और अपने घर के पास ही एक सरकारी स्कूल में पढ़ता है।राजू बचपन से ही पढ़ने बहुत होशियार विद्यार्थी है।लेकिन उसके दिमाग की सारी अच्छाइयां उसके गणित के अध्यापक के सामने खत्म हो जाती हैं। वह लगातार अपने गणित के अध्यापक के हाथों डांट खाता रहता है और कक्षा से बाहर किया जाता रहता है।राजू इस बात से बहुत ही दुखी था।क्योंकि अपनी तरफ से तो वह सभी सवालों का सही जवाब देता है।लेकिन ना जाने क्यों गुरुजी लगातार उसे डांटते रहते है और कक्षा से बाहर निकालते रहते हैं।           गाजियाबाद के सरकारी स्कूल मैं पढ़ रहा राजू बड़ी ही मेहनत से अपनी पढ़ाई कर रहा था।क्योंकि उसे पता था कि वह अपने गरीब मां-बाप का भविष्य पढ़कर ही सुधार सकता है।2 अक्टूबर आने वाली थी यानी कि हमारे *प्यारे बापू ( महात्मा गाँधी )*जी का जन्म जिस दिन हुआ था।आज रात राजू कुछ ज्यादा ही परेशान था।रात को परेशान होते-होते राजू ने महात्मा गांधी जी की तस्वीर, जो कि उसके घर की दीवार पर टंगी हुई थी।उसने बापू के हाथ जोड़े और प्रार्थना की,बापू मुझे अपने गणित के अध्यापक की डाट खाने से बचा लो।उसके बाद वो सो गया।