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Showing posts from November, 2020

हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश उपाध्यक्ष ने किया यज्ञशाला का लोकार्पण

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सुनील कुमार गुप्ता   कैसरगंज। बहराइच जनपद के कैसरगंज तहसील के अन्तर्गत फखरपुर में हिन्दु युवा वाहिनी के कार्यकर्ता के द्वारा फखरपुर वि0ख0 में स्थित चौधरी सियाराम इंटर कॉलेज के बगल में पुराने शिव मंदिर का  जीर्णोद्धार कराया गया है। तथा एक विश्रामालय एवं यज्ञशाला का भी निर्माण कराया गया है। जिसके लोकार्पण के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रुप में राजदेव सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष हिंदू युवा वा हिनी के होगें तथा विशिष्ट अतिथि क्षेत्राधिकारी कैसरगंज एवं थाना अध्यक्ष फखरपुर विद्युत अभियंता विजय तिवारी तथा जिला महामंत्री इंद्र बहादुर सिंह उपस्थित रहे इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष अभय राज सिंह जिला मंत्री रणधीर सिंह ब्लॉक प्रभारी सुभाष दीक्षित सहित फखरपुर की पूरी टीम उपस्थित रही।    

  देश का प्रधानमंत्री अन्नदाता ही होना चाहिए 

महात्मा गांधी ने हम किसानों को भारत की आत्मा कहे थे, लेकिन आज हम देख रहे हैं कि अन्नदाताओ की समस्याओं पर केवल और केवल राजनीति करने वाले अधिकतर लोग हैं ,और हमारे समस्याओं की तरफ ध्यान देने वाले बहुत ही कम लोग  है। साथियों  स्वतंत्र भारत के पूर्व और स्वतंत्र भारत के पश्चात आज एक लंबा समय बीतने के बाद भी हम भारतीय किसानों की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ है, यह बात आज किसी से छुपी हुई नहीं है ।जिन अच्छे किसानों की बात कही जा रही है, उनकी गिनती उंगलियों पर की जा सकती है, बढ़ती आबादी ,औद्योगिकरण एवं नगरीकरण के कारण कृषि योग्य क्षेत्रफल में निरंतर गिरावट आई है। कृषि प्रधान हमारे राष्ट्र में लगभग सभी राजनीतिक दलों का कृषि के विकास और किसान के कल्याण के प्रति ढुलमुल रवैया ही रहा है, हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने किसानों को भारत का आत्मा कहे थे, इसके बावजूद भी केवल किसानों की समस्याओं पर ओछी राजनीति होती रही है, उनकी मुख्य समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं गया है। आज हम सभी देख रहे हैं कि देश की राजधानी दिल्ली में जब हमारे अन्नदाता अपने अधिकारों के लिए गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते

भारतीय संस्कृति : आधुनिकता एवं प्राचीनता दोनों संग लेकर चलें

सत्य, शिव और सुंदर के विवेचन कठिन हैं तो भी इन्हीं तीनों की त्रयी विवेचन का मूल आधार बनती है। आधुनिकता का आग्रह स्वाभाविक है। लेकिन स्वाभाविक आधुनिकता भी प्राचीनता के गर्भ से ही आती है। हमें जीवन मूल्यों का आयात नहीं करना चाहिए। यों आधुनिकता कोई जीवनमूल्य नहीं है और प्राचीनता भी नहीं। दोनो समय और परिस्थिति का ही बोध कराते हैं। ]   गतिशील समाज वर्तमान से संतुष्ट नहीं रहते, और अतीत से विचलित रहते हैं। सभी संस्कृतियों में प्राचीन के साथ संवाद की परंपरा है। सारा पुराना कालवाह्य कूड़ा करकट नहीं होता। वह पूरा का पूरा बदली परिस्थितियों में उपयोगी भी नहीं होता। पुराने के गर्भ से ही नया निकलता है। वास्तविक आधुनिकता विचारणीय है। यहां प्रश्न उठता है कि आधुनिकता के पहले वास्तविक विशेषण की आवश्यकता क्यों है? इसका सीधा उत्तर है कि आधुनिकता स्व्यं में कोई निरपेक्ष आदर्श या व्यवहार नहीं है। इसका सीधा अर्थ ही प्राचीनता का अनुवर्ती है। आधुनिकता प्राचीनता के बाद ही आती है। हरेक आधुनिकता की एक सुनिश्चित प्राचीनता होती है। इसी तरह प्राचीनता की भी और प्राचीनता होती है।   आधुनिकता को और आधुनिक कहने क

गरीबी कभी भी शिक्षा में बाधक नहीं 

 गरीबी में जीवन जीने वाले व्यक्तियों को ना तो अच्छी शिक्षा की प्राप्ति होती है ना ही उन्हें अच्छी सेहत मिलती है. भारत में गरीबी देखना बहुत आम सा हो गया है क्योंकि ज्यादातर लोग अपने जीवन की मुलभुत आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर सकते हैं। ] गरीबी का मुख्य कारण अशिक्षा है और अशिक्षा से अज्ञानता पनपती है. गरीब परिवार के बच्चे उच्च शिक्षा तो छोडिये सामान्य शिक्षा भी ग्रहण नहीं कर पाते हैं. शिक्षा का अधिकार सभी लोगों को है लेकिन गरीबी के कारण ऐसा नहीं हो पाता है. हमारी भारत सरकार गरीब लोगों के लिए कई सारे अभीयान चलाती है लेकिन अशिक्षित होने के कारण गरीबों तक उस अभियान की जानकारी नहीं पहुँच पाती है।    हम जिस युग में जी रहे हैं उसमे आधुनिक तकनीकी हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है जिसे सिखने या इस्तेमाल करने के लिए शिक्षा की अहमियत होती है. शिक्षा हम सभी के उज्जवल भविष्य के लिए एक बहुत ही आवश्यक साधन है. हम अपने जीवन में शिक्षा के इस साधन का उपयोग करके कुछ भी अच्छा प्राप्त कर सकते हैं. ये तो हम हमेसा से सुनते आये हैं की शिक्षा पर दुनिया के हर एक बच्चे का अधिकार है. देश के विकास के

दिल की आवाज सुनो राही

दिल की आवाज  सुनो  राही बंद   न   करना   आवाजाही   आपस  में  गर टकराए कभी बिन झगड़ा क्षमा करना तभी   झगड़ा कर कौन खुश हुआ है जीत  में  गम  दबाए  हुआ  है   रात  बिलखती  ही  रहती  है दिन   सहमा  हुआ  रहता  है   अफसोस  रहता  है  उम्र  भर दिल ने कहा था झगड़ा न कर   बात मान लिया  होता  अगर तो  ऐसे  ना  रहता  उम्र  भर   अब  जीना  दुश्वार  लगता है मरने  से  भी   जी  डरता  है   उधेड़बुन   में   है    ये    राही दिल की आवाज  सुनो  राही ।                  ✍️ ज्ञानंद चौबे                   केतात , पलामू                        झारखंड

भारतीय संविधान की गौरव गाथा 

 डॉ. भीम राव आंबेडकर को भारतीय संविधान का निर्माता माना जाता है. निःसंदेह उन्होंने समानुभूति के साथ संविधान को रूप, आकार, स्वरूप, चरित्र प्रदान किया. लेकिन वास्तविकता यह है कि संविधान के निर्माण में केवल डॉ. भीम राव आंबेडकर की ही भूमिका नहीं थी. भारत का संविधान एक साझा पहल का नतीजा है। ] भरतीय परिप्रेक्ष्य से अक्सर हमारे सामने यह तथ्य आता है कि भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीम राव आंबेडकर हैं, लेकिन यह एक अधूरा तथ्य है. डॉ. आंबेडकर ने भारत के संविधान में न्याय, बंधुत्व और सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र के भाव को स्थापित करने में केन्द्रीय भूमिका जरूर निभाई थी, किन्तु वे संविधान के अकेले निर्माता या लेखक नहीं थे। जहां तक संविधान निर्माण की पूरी प्रक्रिया का सवाल है, इसमें व्यापक रूप से संविधान सभा के कई सदस्यों ने ऐसी भूमिका निभाई थी, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है. मसलन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव पेश किया था, सरदार वल्लभ भाई पटेल ने मूलभूत अधिकारों और अल्पसंख्यक समुदायों के हितों की सुरक्षा के लिए बनाई गई समिति का समन्वय किया था. आदिवासी समाज के हकों पर जयपाल सिंह ने

भारतीय संस्कृति में पर्व एवं त्योहार एकता के प्रतीक हैं 

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जीवन को हंसी खुशी व रिश्तों को मजबूत बनाने में त्योहारों का अहम् योगदान है। भारत त्योहारों का देश है। साल के हर दिन कोई न कोई त्योहार यहां मनाया जाता है। त्योहार खुशियां बांटने और पूरे समाज को जोड़ने का काम करते हैं। ईद , तीज ,गणेश चतुर्थी ,कृष्ण जन्माष्टमी ,दशहरा ,होली, दीवाली ,क्रिसमस ,छठपूजा ,ओणम ,महाशिवरात्रि, नवरात्री ,मकर संक्रांति, पोंगल, लोहड़ी, कुम्भ मेला आदि। अनगिनत त्योहर और मेले हमें एकता और भाईचारे का सन्देश देते है। त्योहारों पर लगने वाले मेले कौमी एकता और सांप्रदायिक सोहाद्र के अनूठे उदहारण है। इन पर्वों और मेलों में समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल हो कर दुनियां को भारत की बहुरंगी संस्कृति झलक दिखाते है। मेले एवं त्योहार हमारी समृद्ध संस्कृति, परम्परा एवं रीति-रिवाजों के परिचायक हैं। विविधता में एकता के प्रतीक मेले और उत्सवों के आयोजन से हमारी संस्कृति को संजोने और सहेजने को बल मिलता है, साथ ही साथ नई पीढ़ी को हमारी स्मृद्ध संस्कृति एवं परम्पराओं का भी ज्ञान होता है। मेलों के आयोजन से भाईचारा, सद्भाव कायम रहता है। मेले ग्रामीण समाज को जीवंत बनाते है । मेलों के माध्यम से अन

भाई दूज मनाने की रोचक कथा

रक्षाबंधन पर्व के समान भाई दूज पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है|  इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है| भाई दूज का पर्व भाई बहन के रिश्ते पर आधारित पर्व है, भाई दूज दीपावली के दो दिन बाद आने वाला एक ऐसा उत्सव है, जो भाई के प्रति बहन के अगाध प्रेम और स्नेह को अभिव्यक्त करता है| इस दिन बहनें अपने भाईयों की खुशहाली के लिए कामना करती हैं|   इस बार भाई दूज का त्योहार 16 नवंबर को मनाया जाएगा। यह त्योहार भाई बहन के अटूट प्रेम और रिश्ते का प्रतीक होता है। इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक करके उनकी लंबी उम्र और उन्नति की प्रार्थना करती हैं। भाई भी अपनी बहन के प्रति कर्तव्यों के निर्वहन का संकल्प लेते हैं। इस त्योहार की पौराणिक कथा सूर्य पुत्र यम और पुत्री यमुना से जुड़ी हुई है।   शास्त्रों के अनुसार सूर्यदेव और पत्नी संज्ञा की दो संतानें थीं - एक पुत्र यमराज और दूसरी पुत्री यमुना। संज्ञा सूर्य का तेज सहन नहीं कर पा रही थी जिसके कारण अपनी छायामूर्ति का निर्माण किया और अपने पुत्र-पुत्री को सौंपकर वहां से चली गई। छाया को यम और यमुना से किसी प्रकार का लगाव नहीं था, परंतु

गाय माता के पूजा का पर्व गोवर्धन पूजा

गोवर्धनका अर्थ है गौ संवर्धन। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत मात्र इसीलिए उठाया था कि पृथ्वी पर फैली बुराइयों का अंत केवल प्रकृति एवं गौ संवर्धन से ही हो सकता है। गोवर्धन पूजा में गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। जो यह संदेश देता है कि हमारा सम्पूर्ण जीवन प्रकृति पर निर्भर करता है। इसलिए हमें प्रकृति का धन्यवाद देना चाहिए। इस दिन विशेष रुप से गाय माता की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन कोई दुखी है तो साल भर दुखी रहेगा। मनुष्य को इस दिन प्रसन्न होकर इस उत्सव को मनाना चाहिए। इस दिन स्नान से पूर्व तेला लगाना चाहिये। इससे आयु, आरोग्य की प्राप्ति होती है और दु:ख दारिद्र का नाश होता है। इस दिन जो शुद्ध भाव से भगवान के चरण में सादर समर्पित, संतुष्ट, प्रसन्न रहता है वह सालभर सुखी और समृद्ध रहता है।                दीपावली के दूसरे दिन यानी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन और गौ पूजा का विशेष महत्व है। आज गोवर्धन पूजा का पावन पर्व है, मान्यता है कि इस दिन गाय की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। आज गोवर्धन पूजा के साथ भगवान विश्वकर्मा की भी पूजा की जाएगी। शिल्पकार और श्रमिक वर्

भाई- बहन के प्यार व स्नेह का प्रतीक : भैया दूज

भाई-बहन के अटूट प्यार व स्नेह का प्रतीक भैया दूज का त्यौहार हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भैया दूज का त्योहार पूरे भारत ने बड़े उत्साह व उल्लास से मनाया जाता है। रक्षाबंधन की तरह भैया दूज का त्यौहार भाई बहन के अनन्य प्रेम और स्नेह का प्रतीक है ।     दीपावली के पांच दिवसीय त्योहार के अंतिम पांचवे  दिन भैया दूज का त्यौहार मनाया जाता है ।इसको यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विवाहिता बहन अपने भाई को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित करती है और भाई को तिलक कर,मुंह मीठा कराकर कलाई के कलावा बांधती है।और भाई की दीर्घायु व खुशहाल जीवन के लिए कामना करती है। एवं भाई भी अपनी बहन को उसके मान सम्मान की रक्षा करने व उसका साथ देने का वादा करता है ।और बहन को उपहार देता है। इससे भाई-बहन के अटूट प्यार व स्नेह में प्रगाढ़ता आती है।         प्राचीन काल से भाई-बहन के परस्पर प्यार व स्नेह का पर्व भाई दूज का त्यौहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है । रक्षाबंधन के बाद बहन भाई दूज की बेसब्री से इंतजार करती है,और विश्वास होता है उसका भाई कहीं भी,कितनी दूर क्यो

अपने ढँग से जीने दो

माना हम छोटे बच्चे हैं, अपनी भी इक्षाएं हैं। अपने भी तो कुछ सपने हैं, अपनी भी आशाएं हैं।   खेल खिलौने अजब अनूठे, अपनी भी कुछ बातें हैं। उजले-उजले दिन हैं अपने, सपनों बाली रातें हैं।   मन पतंग की तरह हमेशा, उच्च उड़ाने भरता है। अपने ढँग का काम अनोखा, करने को मन करता है।   इंद्रधनुष सा रंग-रँगीला, अपना तो संसार है। जिसमें राज कुँवर के जैसा, अपना तो किरदार है।   लेकिन कोई नहीं समझता, अपनी सोच थोपते हैं। उनके जैसा बनूँ, करूँ मैं, हमसे यही बोलते हैं ।   कैसे उनको समझाऊँ मैं, अमृत रस को पीने दो। बचपन की मस्ती के ये दिन, अपने ढँग से जीने दो।  

दीपोत्सव, गोवर्धन  का पर्व बड़े   हर्षोउल्लास से मनाया

नई दिल्ली 16 नवम्बर(डॉ शम्भू पंवार) भारतीय संस्कृति में हिंदुओं का सबसे प्रमुख त्यौहार दीपावली बड़े उत्साह ओर हर्षोल्लास से मनाया गया इस बार दीवाली पूजन का समय गोधूलि वेला से प्रारम्भ होने से सांय होते ही व्यवसायी अपने अपने प्रतिष्ठानों में ओर आमजन अपने अपने घरों में साफ-सफाई कर के युवतियां,बच्चे बड़े उत्साह से सुंदर सुंदर रंगोली बनाने में लग गई तथा सांय होते ही विधि विधान से विघ्नहर्ता गणेश लक्ष्मी,कुबेर जी की पूजा अर्चना की।  आज मार्किट में सुबह से लोगो की काफी गहमागहमी रही।कोरोना काल से त्रस्त लोग काफी समय बाद खुल कर बाजारों में खरीददारी को आये।फिर भी मास्क लगाना नही भूले।पूरी सतर्कता अपनाए हुवे थे।      यधपि कोरोना काल मे हुई आर्थिक मार का असर मार्किट में खरीदारी पर देखने को मिला।इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी, व  नए वाहन के प्रतिष्ठानों की सेल पहले की अपेक्षा बहुत कम रही। जबकि मार्केट में मिष्ठान,रेडिमेड, पूजा सामग्री, सजावटी सामान की दुकानों पर भीड़ देखने को मिली। दीपावली पर व्यवसायियों ने अपने व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को रंगीन इलेक्ट्रिक लाइट, बन्दरवार से काफी आकर्षक ढंग  से सजाया।  ल

मिस्टर एन्ड मिस आगरा के सेमीफाइनल में हुआ जमकर मुकाबला

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रैंप पर मॉडल अपने अलग अलग अंदाज में नजर आये टलेंगे राउंड में सपना चैधरी के गानों पर प्रतिभागियों ने दी प्रस्तुतियां आगरा । आरोही इवेंट्स के मिस्टर एन्ड मिस आगरा , सीजन-9, 2020 का सेमीफाइनल होटल मार्क रॉयल के प्रांगड़ में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगल सिंह धाकड़ एवं ग्लैमर लाइव फिल्म के निर्देशक सूरज तिवारी ने किया।आज के कार्यक्रम वशिष्ठ अतिथि के रूप में अनमोल जो कक फेम है आंटी जी जिसको सबाना आजमी के निर्देशन में थी। निदेशक अमित तिवारी ने बताया कि आज मिस्टर एन्ड मिस आगरा के सेमीफाइनल में मिस आगरा व मिस्टर आगरा के शीर्षक के लिए 20ध्20 प्रतिभागियों ने इंट्रोडक्शन व सवाल जवाब के साथ अपने टैलेंट राउंड से हुनर दिखाया। फाइनल में 7ध्7 प्रतिभागियों के चयन किया गया है, सेमीफाइनल में निर्णायक की भूमिका में  सारा मून (मिस यु.पी 2009),पी.एस गीत( मिस इंडिया क्वीन ऑफ ब्रिलिएन्सी इंटरनेशनल), मोनिका यादव(मिस नार्थ इंडिया फोटोजनिक) रही।  सारा मून ने बताया कि सेमीफाइनल में चुने गए प्रतिभागियों को 5 दिन की ग्रूमिंग दी जाएगी व इस बार की शो की थीम बहुत ही आकर्षित होगी। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उ

सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को जमानत दी, पुलिस कमिश्नर से कहा- आदेश पर तत्काल अमल किया जाए

इंटीरियर डिजाइनर को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार अर्नब गोस्वामी को 7 दिन बाद बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी। कोर्ट ने मुंबई पुलिस कमिश्नर से कहा कि इस आदेश पर तत्काल अमल किया जाए। अर्नब के साथ ही इस मामले में दो अन्य आरोपियों नीतीश सारदा और फिरोज मोहम्मद शेख को भी जमानत दी गई है। अर्नब की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उद्धव सरकार को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकारें किसी को निशाना बनाएं तो उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि हम उसकी हिफाजत करेंगे। अर्नब अपनी जमानत के लिए हाईकोर्ट भी गए थे, लेकिन हाईकोर्ट ने उनसे कहा था कि अंतरिम जमानत के लिए उनके पास लोअर कोर्ट का भी विकल्प है, लेकिन 4 नवंबर को गिरफ्तारी के बाद ही अलीबाग सेशन कोर्ट ने उनकी जमानत नामंजूर कर दी थी। हालांकि, अलीबाग कोर्ट ने पुलिस को रिमांड न देते हुए अर्नब को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां डेमोक्रेसी पर:  हमारा लोकतंत्र असाधारण रूप से लचीला है। महाराष्ट्र सरकार को यह सब नजरअंदाज करना चाहिए। आजादी पर:  अगर किसी व्यक्ति की निजी स्वतंत्रत

मौन साधक, मित्र मेरा- सुरेशचंद्र रोहरा 

*डॉ टी महादेव राव* चारों तरफ से हरे भरे और घने जंगलों से आच्छादित छत्तीसगढ़ अ हसदेव नदी के पावन तट पर बसी देश की ऊर्जाधानी कोरबा यूँ तो  अपनी अनेकों कोयला खादानों एवं बिजली के कल - कारखानों के नाम से मशहूर है। लेकिन इस रत्नागर्भा वसुन्धरा को अपनी मेहनत  , लगन और निष्ठा से आज के इस मुकाम तक पहुँचाया है यहाँ के आम मेहनत कश्मीर लोगों ने  । जहाँ एक तरफ यहाँ के श्रमिकों , किसानों , अधिकारियों , कर्मचारियों एवं शासन प्रशासन , व्यापार , व्यवसाय के लोगों ने इसके विकास पथ में अपनी भूमिका निभाई है वहीं इसकी सांस्कृतिक परंपरा और विरासत को समृद्ध करने का कार्य यहाँ के विविध कला क्षेत्रों में साधनारत कलासाधकों ने किया है । ये अलग बात है कि क्षेत्र के कलात्मक विकास में सक्रिय रहे कलासाधकों में कुछ चुने हुए और मुट्ठी भर लोगों के ही नाम कोरबा के जनमानस के सामने आ पाएँ  हैं। आज भी ऐसे कई कलमसाधक हैं जो प्रचार प्रसार को किनारे रख एक के बाद एक अनगिनत सृजन किए जा रहे हैं। और वह भी किसी लालसा या विशेष ईच्छा के बिना सिर्फ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी और सर्जनात्मकता के प्रति अपने अनुराग के कारण । वैसे

ऐतिहासिक कथा की मौलिकता

ऐतिहासिक कथा काल्पनिक शैलियों का सबसे आम है तकनीकी तौर पर, ऐतिहासिक कथाएं अतीत में किसी भी कहानी को सेट करती हैं, जिसमें समय की सच्ची विशेषताएं शामिल होती हैं, जिसमें काल्पनिक पात्रों या घटनाएं भी शामिल हैं। सदियों और संस्कृतियों में इस तरह के कार्यों के अनगिनत उदाहरण मौजूद हैं। इलियाड और ओडिसी के रूप में, जहां तक ​​प्राचीन यूनानियों (हालांकि वे भी विलक्षण तत्व होते हैं) का इतिहास एकाकी करने का प्रयास करता है।   सच्ची ऐतिहासिक कथा अपने संपूर्ण साजिश तत्वों में यथार्थवाद पर निर्भर करती है। ऐतिहासिक कथा के लेखक एक विश्वसनीय ऐतिहासिक दुनिया का निर्माण करने के लिए सावधान रहना चाहिए जिसमें सेटिंग, पात्रों, और वस्तुएं उनके युग में अपेक्षित होगा। अक्षरों को विश्वसनीय अवधि वार्ता के साथ बोलना चाहिए और परिवहन के उपयुक्त साधनों के साथ यात्रा करना चाहिए। आपको 1600 के दशक में एक चरित्र नहीं मिलना चाहिए, उदाहरण के लिए, "यह बहुत अच्छा था!" या सड़क पर साइकिल चलाने के लिए ऐतिहासिक कथा में, सभी संघर्षों, साजिश की घटनाओं, और विषयों को ऐतिहासिक रूप से संभवतः दुनिया के भीतर होना चाहिए जो लेखक

आप के लिए दुनियां में सब  कुछ संभव है !

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन में एक समानता थी साथियों ये दोनों ही अपने आप को निरंतर सार्थक विचारो से ऊर्जावान बनाए रखते थे ।याद रखना आप दृढ़ निश्चय वाले व्यक्ति कभी भी हार नहीं मानते हैं ,जब तक दोस्त हम प्रयत्न करना बंद नहीं कर देते ,तब तक कोई भी हार अंतिम हार नहीं होती है।हमें भी अपने  मार्ग पर निरंतर चलते रहना चाहिए,आप भी आज ही उमंग और कल्पना की उड़ान की सहायता से जीवन में ऊंचे लक्ष्यों को अपने मस्तिष्क में संजोइए। देखो साथियों दुनिया में सब कुछ सम्भव है, और आख़िर तक हार न मानने वाले एक दिन जीत ही जाते हैं। आप ही देखो साथियों जो बाइडेन 7 नवंबर 1972 को पहली बार अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए थे।आज 48 साल बाद नवंबर 2020 में  पहली बार राष्ट्रपति बने। अब जब बाइडेन राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए हैं तब उनकी उम्र 78 वर्ष है, वो अमेरिकी इतिहास के सबसे जवान सीनेटर बने थे और सबसे बूढ़े राष्ट्रपति बने हैं। वैसे दोस्त आम भारतीयों को इससे कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता कि अमेरिका का राष्ट्रपति कोई डेमोक्रेट बनता है या रिपब्लिकन लेकिन इस बात से ज़रूर फ़र्क़ पड़ता है कि

दिवाली मनाते है

'हम शिक्षक नित ही अज्ञानता का अंधकार मिटाते है, ज्ञान दीप के प्रकाश से हम तो रोज दिवाली मनाते है। कब,कहाँ,क्यो,कैसे ? यह सब बच्चों को समझाते है। क्या भला,क्या बुरा ? यह सब भी हम सिखलाते है। सरस्वती के पावन मन्दिर मे नया सबक सिखाते है, नवाचार का कर प्रयोग छात्रों को निपुण बनाते है। कबड्डी,खो-खो और दौड़ प्रतियोगिता हम करवाते है, पाठ्यसहगामी क्रियाओं का भी हम महत्व बताते है। बच्चो का कर चहुँमुखी विकास हम फूले नही समाते है। हम शिक्षक शिक्षा की लौ से रोज दिवाली मनाते है।'   रचनाकार:- अभिषेक शुक्ला 'सीतापुर'    

बाइडेन के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने पर भारत पर क्या असर होगा?

 साथियों  बाइडेन ने अमेरिका का राष्‍ट्रपति चुनाव जीत लिए है ,ये  उम्रदराज अमेरिकी राष्ट्रपति बनने तक का शानदार सफर तय करके शनिवार को इतिहास रच दिए हैं।  जैसा कि हम सभी जानते हैं कि  ट्रंप को हराकर बाइडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बन गए हैं। आपको बता दें कि  77 साल 11 महीने के  बाइडेन लंबे समय से ही राजनीति कर रहे हैं जो कि ओबामा  सरकार के दौरान बाइडेन ही उपराष्ट्रपति थे. मतलब  दोस्त बाइडेन राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। अमेरिका राजनीति में करीब पांच दशकों से सक्रिय जो बाइडेन ने सबसे युवा सीनेटर से लेकर सबसे उम्रदराज अमेरिकी राष्ट्रपति बनने तक का शानदार सफर तय करके इतिहास रच दिए हैं। आपको बता दें कि 77 वर्षीय बाइडेन छह बार सीनेटर रहे और अब अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हराकर देश के राष्ट्रपति बन रहे हैं. ऐसा नहीं है कि यह कामयाबी उन्होंने अपने पहले प्रयास में पा लिया  है. बाइडेन को वर्ष 1988 और 2008 में राष्ट्रपति पद की दौड में नाकामी  भी मिली थी । साथियों बाइडेन  को  अमेरिका के राष्ट्रपति बनने से  पूरी दुनिया का नजर कहीं ना कहीं भारत की तरफ भी है , मुझे लगता है क

मानव स्वास्थ्य के लिए काल है वायु प्रदूषण 

  एक सूचकांक से पता चला है कि वायु प्रदूषण पृथ्वी पर हर पुरुष, महिला और बच्चे की आयु संभाविता यानी लाइफ एक्सपेक्टेंसी को लगभग दो साल घटा देता है. सूचकांक का दावा है कि वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है।    यह दावा एयर क्वॉलिटी लाइफ इंडेक्स (एक्यूएलआई) द्वारा जारी किए ताजा आंकड़ों में किया गया है. एक्यूएलआई एक ऐसा सूचकांक है जो जीवाश्म ईंधन के जलाए जाने से निकलने वाले पार्टिकुलेट वायु प्रदूषण को मानव स्वास्थ्य पर उसके असर में बदल देता है. सूचकांक का कहना है कि एक तरफ तो दुनिया कोविड-19 महामारी पर काबू पाने के लिए टीके की खोज में लगी हुई है लेकिन वहीं दूसरी तरफ वायु प्रदूषण की वजह से पूरी दुनिया में करोड़ों लोग का जीवन और छोटा और बीमार होता चला जा रहा है।    एक्यूएलआई ने पाया कि चीन में पार्टिकुलेट मैटर में काफी कमी आने के बावजूद, पिछले दो दशकों से वायु प्रदूषण कुल मिला कर एक ही स्तर पर स्थिर है. भारत और बांग्लादेश जैसे देशों में वायु प्रदूषण की स्थिति इतना गंभीर है कि कुछ इलाकों में इसकी वजह से लोगों की औसत जीवन अवधि एक दशक तक घटती जा रही है. शोधकर्ताओं ने कहा है कि