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Saturday, February 29, 2020

क्या इसको जीना कहते हैं

भड़क रही सीने में पल- पल ,आग नफरतों की यह कैसी ।

दुखी हृदय सब देख विकल है ,क्या इसको जीना कहते हैं ।

 

भ्रष्ट हो गयी राजनीति है , भूल चुकी ईमान तभी ये,

क्यों विनाश की और चले हैं,भ्रमित हुए इंसान सभी यें ,

होली खेलें चलो रक्त से ,चौड़ा कर सीना कहते हैं ।।

 

दुखी हृदय सब देख विकल है ,क्या इसको जीना कहते हैं।।

 

चेहरे पर चेहरा रख घूमें,हैवानों की भीड़  बढ़ी अब,

अस्मत लुट जाए अबला की ,क्या जाने किस दुखद घड़ी रब ,

वस्त्रहीन कर जिस्म जलाकर ,रसिक ज़रा पीना कहते हैं ।।

 

दुखी हृदय सब देख विकल है ,क्या इसको जीना कहते हैं।।

 

कैसी ये आजादी पायी ,क्या अब झूमूं नाचूँ गाऊं ,

जाति धर्म टकराव देखकर ,या रब जिंदा ही मर जाऊं ,

कदर गँवा दी वही देश जो गौरों से छीना कहतें हैं ।।

 

दुखी हृदय सब देख विकल है ,क्या इसको जीना कहते हैं।।

 

कर्मचारी चयन आयोग मार्च 2021 तक 1, 40, 000 रिक्तियों को भरेगा

कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष श्री ब्रज राज शर्मा ने आज पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह से मुलाकात की। उन्‍होंने श्री सिंह को अवगत कराया कि आयोग मार्च 2021 तक भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/ विभागों और कार्यालयों के लिए ग्रुप-बी एवं ग्रुप सी में लगभग एक लाख चालीस हजार रिक्तियों को भरेगा। उन्होंने कहा कि गैर-तकनीकी पदों के अलावा राजपत्रित एवं अराजपत्रित दोनों तरह की रिक्‍तयों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा।

      हालांकि वर्ष 2019-20 में 28-02-2020 तक आयोग भारत सरकार में 14,611 उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए सिफारिश पहले ही कर चुका है। आयोग जून 2020 तक भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/ विभागों/ कार्यालयों में 85,000 अतिरिक्त पदों को भरने के लिए परिणाम की घोषणा कर सकता है। श्री शर्मा ने बताया कि आयोग द्वारा वित्त वर्ष 2020-21 के शेष भाग में (यानी जुलाई 2020 से मार्च 2021 तक) अतिरिक्त 40,000 रिक्त पदों को भरे जाने की संभावना है।


कर्मचारी चयन आयोग निम्‍नलिखित पदों के लिए भर्ती करता है:



  1. भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग में ग्रुप-बी (राजपत्रित) पदों के लिए।

  2. भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/ विभागों/ कार्यालयों के लिए ग्रुप-बी (अराजपत्रित) पदों के लिए।

  3. भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/ विभागों/ कार्यालयों के लिए ग्रुप-सी (गैर-तकनीकी) पदों के लिए।



सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2019-20 (सीरीज एक्‍स)- निर्गम मूल्‍य

 भारत सरकार की अधिसूचना एफ. संख्‍या (7) – डब्‍ल्‍यू एंड एम / 2019 दिनांक 30 सितंबर 2019 के संदर्भ में सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 (सीरीज एक्‍स ) की अवधि 02 से 06 मार्च 2020 तक खोली जाएगी। सबस्क्रिपशन अवधि के दौरान इस बॉन्ड का निर्गम मूल्य 4,260 रुपये (चार हजार दो सौ साठ रुपये) प्रति ग्राम होगा। इसकी निपटान तिथि 11 मार्च 2020 होगी जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रेस विज्ञप्ति में भी 28 फरवरी 2020 को प्रकाशित किया गया है।


 भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से भारत सरकार ने उन निवेशकों को निर्गम मूल्य से प्रति ग्राम 50 रुपये (पचास रुपये) की छूट की अनुमति देने का फैसला किया है जो ऑनलाइन आवेदन करते हैं और भुगतान डिजिटल मोड के माध्यम से किया जाता है। ऐसे निवेशकों के लिए गोल्ड बॉन्ड का निर्गम मूल्य 4,210 रुपये (चार हजार बीस रुपये) प्रति ग्राम होगा।



श्री पीयूष गोयल थिम्पू में भूटान के नेताओं से मिले

रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल भूटान- भारत स्टार्ट-अप समिट 2020 में भाग लेने वाले एक उच्चस्तरीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख के रूप में फिलहाल भूटान में हैं।


भारत और भूटान के बीच साझेदारी विशेष और समय पर परखी हुई है जो साझा सांस्‍कृतिक विरासत और लोगों से लोगों के बीच मजबूत संबंधों से पोषित आपसी समझ और सम्‍मान पर आधारित है। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अगस्त 2019 में भूटान की राजकीय यात्रा ने दोनों देशों के बीच सहयोग के पारस्परिक रूप से लाभकारी क्षेत्रों में साझेदारी में कहीं अधिक गहराई और विविधता लाने के लिए नई गति दी है।


श्री पीयूष गोयल ने आज भूटान के प्रधानमंत्री और भूटान के आर्थिक मामलों के मंत्री के साथ बैठक से अलग थिम्पू में भूटान के महामहिम राजा से मुलाकात की। भारत और भूटान के बीच आर्थिक साझेदारी को एक नई दिशा देने के लिए होने वाली मुलाकात और बैठकों के दौरान सीआईआई के अध्‍यक्ष श्री विक्रम किर्लोस्‍कर के नेतृत्‍व में एक उच्‍चस्‍तरीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल मंत्री के साथ था। इस उच्‍चस्‍तरीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल में सीआईआई के चेयरयमैन श्री कृष्ण गोपालकृष्णन, सीआईआई के डीजी श्री चंद्रजीत बनर्जी, ओयो के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रितेश अग्रवाल एवं अन्‍य लोग शामिल थे।


      तमाम बैठकों के बाद निम्नलिखित ठोस नतीजे सामने आए: भूटान के अनुरोध के आधार पर रेलवे बोर्ड ने मुजनाई (भारत) से न्योएन्पालिंग (भूटान) लाइन की स्थापना के लिए एक सर्वेक्षण शुरू किया है। इससे भारत और भूटान के बीच सीमापार रेल लिंक स्‍थापित होगा।


      भारतीय रेल की एक टीम भूटान से भारत को रेलवे गिट्टी के निर्यात के लिए एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने के लिए स्‍टेट माइनिंग कॉरपोरेशन ऑफ भूटान के साथ चर्चा करने के लिए कल भूटान का दौरा कर रही है।


      सीआईआई ने घोषणा की है कि वह भूटान में उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से भारतीय इनक्‍यूबेशन केंद्रों में 30 भूटानी स्टार्ट-अप को संरक्षण प्रदान करेगा। वह जल्‍द ही भूटान में अपना पहला दक्षिण एशिया कार्यालय भी खोलेगा।


      दोनों पक्षों ने जोगीगोपा, पांडु और अगरतला में नए ट्रांजिट सीमा शुल्क स्टेशनों के लिए पदनाम और अधिसूचना पर भी चर्चा की। इसके अलावा नागरकट्टा के भूमि सीमा शुल्‍क स्‍टेशन को एक स्थायी सीमा शुल्क स्टेशन बनाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।


      मंत्री ने प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में द्विपक्षीय भागीदारी के लिए ठोस नतीजों की भी घोषणा की। इसके तहत भारत सरकार गुजरात के गांधीनगर के उद्यमिता विकास संस्थान में उद्यमिता पर 100 भूटानी प्रशिक्षकों एवं युवाओं के प्रशिक्षण को पूरी तरह से प्रायोजित करेगी।


      पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग में क्षमता निर्माण की आवश्यकता के मद्देनजर 30 भूटानी उद्यमी एवं स्टार्ट-अप भारत सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम के तहत दिल्‍ली के भारतीय पैकेजिंग संस्थान में प्रशिक्षण हासिल करेंगे।


      भूटान में उद्यमिता विकास संस्थान स्थापित करने के लिए भारत एक व्यवहार्यता अध्ययन कराएगा। यह भूटान सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप है और इसमें उनकी सीएसआई नीति 2019 भी प्रतिध्वनित होती है।


      भूटान में आयोजित अपने प्रकार के इस पहले स्टार्ट-अप शिखर सम्मेलन में शनिवार 29 फरवरी को होने वाले कार्यक्रमों में उद्घाटन सत्र के अलावा पांच अन्‍य सत्र शामिल हैं। इन सत्रों में नए भारत, स्टार्टअप इकोसिस्टम- भारतीय अनुभव, सूचना प्रौद्योगिकी एवं अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में उद्यमशीलता को बढ़ावा, भूटान में निवेश के अवसर और आगे की राह जैसे विषय शामिल हैं।


      इन सत्रों में कारोबार जगत की प्रमुख हस्तियां, थिंक टैंक और शिक्षाविद संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श, चर्चा और सहयोग करेंगे। इसका उद्देश्य भविष्‍य में भारत और भूटान के बीच आर्थिक साझेदारी का दायरा विभिन्‍न क्षेत्रों तक विस्‍तृत करना है। श्री पीयूष गोयल शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण देंगे। साथ ही वह भूटान के प्रधानमंत्री के साथ भारत और भूटान के 30 स्टार्ट-अप द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी उद्घाटन करेंगे। इसके बाद भूटान और भारत के उद्योग जगत के शीर्ष नेतृत्‍व के साथ एक इंटरएक्टिव राउंड टेबल मीटिंग होगी जिसकी अध्‍यक्षता श्री गोयल करेंगे।



श्री अर्जुन मुंडा ने भुवनेश्वर में स्थानीय स्वशासन में अनुसूचित जनजाति के जन प्रतिनिधियों के लिए क्षमता सृजन कार्यक्रम तथा 1000 जल स्रोत कार्यक्रमों को लॉन्च किया

केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने आज ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक कार्यक्रम में स्थानीय स्वशासन में अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधियों के क्षमता सृजन के लिए कार्यक्रम लॉन्च किया। उन्होंने 1000 जल स्रोत कार्यक्रम तथा जल स्रोतों के जलविज्ञान तथा रासायनिक गुणों के साथ जीआईएस आधारित जलस्रोत (स्प्रिंग) एटलस पर ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च किया। इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक तथा जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सरूता उपस्थित थीं।


ओडिशा में एफआरए (एफआरए में ओडिशा की यात्रा) पर लघु वृत्तचित्र और ओडिशा का एफआरए एटलस को जारी किया गया। उद्घाटन सत्र के बाद तकनीकी सत्र में जनजातीय विकास परिप्रेक्ष्य, जनजातीय भूमि का अलगाव, वन धन विकास केन्द्र तथा जनजातीय विकास अन्वेषण पर चर्चा की गई।


श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि 1000 जल स्रोत कार्यक्रम का उद्देश्य देश के कठिन और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे जनजातीय सुमदाय के लिए सुरक्षित और पर्याप्त जल तक पहुंच में सुधार करना है। यह प्राकृतिक जल स्रोतों के इर्द-गिर्द एकीकृत समाधान है। इसमें पाइप पेय जल सप्लाई के लिए अवसंरचना का प्रावधान, सिंचाई जल का प्रावधान, सामुदायिक नेतृत्व वाले संपूर्ण स्वच्छता कार्यक्रम तथा घर के पीछे बागानों के लिए जल का प्रावधान और जनजातीय लोगों के लिए सतत आजीविका अवसर का सृजन शामिल हैं।  उन्होंने आशा व्यक्त की कि विचार-विमर्श से आए सुझावों का उपयोग परियोजना विस्तार के लिए किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि जीआईएस आधारित जल स्रोत एटलस पर ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है ताकि ऑनलाइन प्लेटफार्म से सहज रूप में इन आंकड़ों को प्राप्त किया जा सके। स्प्रिंग एटलस पर 170 जल स्रोत अपलोड किए गए हैं।


श्री मुंडा ने कहा कि क्षमता सृजन पहल का उद्देश्य स्थानीय सरकार के स्तर पर जनजातीय प्रतिनिधियों को उनकी निर्णय क्षमता में वृद्धि करके सशक्त बनाना है। जनजातीय विकास से संबंधित अन्य विषयों में इसका फोकस जनजातीय आबादी की रक्षा और उनके अधिकारों को प्रोत्साहन और कल्याण के संवैधानिक तथा कानूनी प्रावधानों पर है। यह कार्यक्रम नियोजन, क्रियान्वयन तथा सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों की निगरानी में जनजातीय प्रतिनिधियों की बढ़ती भागीदारी सुनिश्चित करेगा। विकास प्रक्रिया में उनकी बेहतर भागीदारी से जनजातीय कार्यक्रमों की बेहतर प्राथमिकता सुनिश्चित होगी।


जल स्रोत भूजल के प्राकृतिक स्रोत हैं और भारत सहित पूरे विश्व के पर्वतीय क्षेत्रों में इनका इस्तेमाल किया गया है। लेकिन मध्य और पूर्वी भारत के 75 प्रतिशत जनजातीय आबादी वाले क्षेत्र में जल स्रोतों को मान्यता नहीं दी गई है और उनका उपयोग कम किया गया है। इस कार्यक्रम से जनजातीय क्षेत्रों में जल की प्राकृतिक कमी की समस्या से निपटने में बारहमासी जल स्रोत की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस पहल के अंतर्गत ओडिशा के तीन जिलों- कालाहांडी, कंधमाल तथा गजपति- के ग्रामीण क्षेत्र से 70 जनजातीय युवाओं  को बिना जूते के जलविज्ञानी के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। इन युवाओं को जल स्रोतों की पहचान और मैपिंग के लिए पारंपरिक और वैज्ञानिक ज्ञान तथा अपनी आबादी वाले क्षेत्रों में पुनर्जीवन तथा संरक्षण कार्यक्रम को सम्मिलित करके प्रशिक्षित किया गया है।


जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा स्थानीय प्रशासन में निर्वाचित जनजातीय प्रतिनिधियों के लिए क्षमता सृजन कार्यक्रम लॉन्च किया गया है। इसका उद्देश्य क्षमता सृजन पहल का उद्देश्य स्थानीय सरकार के स्तर पर जनजातीय प्रतिनिधियों को उनकी निर्णय क्षमता में वृद्धि करके सशक्त बनाना है। जनजातीय विकास से संबंधित अन्य विषयों में इसका फोकस जनजातीय आबादी की रक्षा और उनके अधिकारों को प्रोत्साहन और कल्याण के संवैधानिक तथा कानूनी प्रावधानों पर है। यह कार्यक्रम नियोजन, क्रियान्वयन तथा सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों की निगरानी में जनजातीय प्रतिनिधियों की बढ़ती भागीदारी सुनिश्चित करेगा। विकास प्रक्रिया में उनकी बेहतर भागीदारी से जनजातीय कार्यक्रमों की बेहतर प्राथमिकता सुनिश्चित होगी।


स्थानीय स्तर पर विकास कार्यक्रमों में प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी करने वाले जनप्रतिनिधियों के क्षमता सृजन से समुदायों तथा क्षेत्रों के बीच विकास के अंतर को पाटने में काफी मदद मिलेगी। इससे विभिन्न विकास और कल्याणकारी कार्यक्रमों को कारगर तथा बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी और परिणामों में सुधार होगा।


इस कार्यक्रम को लॉन्च करने से पहले मंत्रालय ने पिछले कुछ महीनों में विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श किया। जनजातीय निर्वाचित प्रतिनिधियों के क्षमता सृजन के लिए मॉड्यूल विकास पर पिछले वर्ष 23 दिसम्बर को नई दिल्ली में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें राज्य जनजातीय अनुसंधान और विकास संस्थानों, राज्य ग्रामीण विकास संस्थानों, प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों, स्थानीय स्वशासन संस्थान, केरल तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के राष्ट्रीय जन सहयोग और बाल विकास संस्थान के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।


क्षमता सृजन कार्यक्रम की उचित रूप रेखा बनाने के बारे में जनजातीय जन प्रतिनिधियों, सिविल सोसाइटी संगठनों तथा वन विभाग के अधिकारियों सहित विभिन्न हितधाकरों के बीच संवाद हुआ।


क्षमता सृजन कार्यक्रम के लिए मॉड्यूल इस उद्देश्य के लिए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के अनुरूप विकसित किया गया है। प्रशिक्षण के लिए इस मॉड्यूल का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा। जनजातीय समुदायों के बीच के सहायक क्षमता सृजन प्रक्रिया में शामिल किए जाएंगे ताकि स्थानीय भाषा में बेहतर तरीके से सूचना दी जा सके। क्षमता सृजन के तौर तरीकों में ऑडियो विजुअल उपकरण, रोल प्ले और कार्यशाला को शामिल किया जाएगा। क्षमता सृजन कार्यक्रम, बेहतर कवरेज तथा तेजी से क्रियान्वयन  के लिए सोपान रूप मे लागू किया जाएगा। कार्यक्रम मास्टर प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण से प्रारंभ होगा और उसके बाद सहायकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। कार्यक्रम को जनजातीय निर्वाचित प्रतिनिधियों के क्षमता सृजन के लिए विषयों को प्राथमिकता देकर विषय संबंधी तरीके से लागू किया जाएगा। कार्यक्रम राज्य सरकारों द्वारा एसआईआरडी और पीआर तथा टीआरआई के माध्यम से लागू किया जाएगा।



श्री अमित शाह ने भुवनेश्वर में आयोजित पूर्वी आंचलिक परिषद की 24वीं बैठक की अध्यक्षता की

केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने आज भुवनेश्वर (ओडिशा) में आयोजित पूर्वी आंचलिक परिषद की 24वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में भाग लेने वाले अन्य गणमान्य व्यक्तियों में उपाध्यक्ष और मेजबान के रूप में ओडिशा के मुख्‍यमंत्री श्री नवीन पटनायक, बिहार के मुख्‍यमंत्री श्री नीतीश कुमार,  पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री सुश्री ममता बनर्जीझारखंड के वित्तमंत्री श्री रमेश उरांव और केंद्र तथा राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

ओडिशा के मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और चक्रवाती आपदाओं के दौरान तुरंत सहायता करने के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने कोयले पर रॉयल्टी में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने जीएसटी से आय के भुगतान में देरी और धन के हस्‍तांतरण का मुद्दा उठाया। बिहार के मुख्यमंत्री  ने गंगा नदी में बाढ़ की देखरेख के लिए राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति तैयार करने के लिए कहा।


बैठक को संबोधित करते हुए श्री शाह ने 24वीं बैठक में परिषद के सभी सदस्यों का स्वागत किया और उम्मीद ज़ाहिर की कि केन्द्र/राज्य और अंतर-राज्य संबंधी मुद्दों का सहमति से समाधान निकालने में यह सार्थक बैठक होगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, विचार-विमर्श के बाद, देश के संघीय ढांचे को और मज़बूत करने के लिए सर्वसम्मति से लिए गए फैसलों को लागू किया जाना चाहिए। गृह मंत्री ने क्षेत्रीय परिषद प्रणाली की उपयोगिता के प्रति संतोष व्यक्त किया और सूचित किया है कि 70 प्रतिशत से अधिक मुद्दों का समाधान क्षेत्रीय परिषदों की हाल की बैठकों में हुआ है तथा शेष मुद्दों पर भी सहमति बन जाएगी।


परिषद में अपर महानंदा जल योजना पर 1978 में बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच हस्ताक्षर होने वाले फुलवारी बांध संबंधी विषय, ओडिशा के उत्तरी जिलों में नौपाड़ा-गुनुपुर-थेरुबली रेल लिंक परियोजना के विस्तार, बिहार और झारखंड के बीच पेंशन दायित्व के निर्धारण, भारत सरकार की कोयला कम्पनियों द्वारा राज्य सरकार की ज़मीन के इस्तेमाल, प्रधानमंत्री आवास योजना- केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपकरमों द्वारा भूमि स्थानांतरण, बच्चों और महिलाओं के विरुद्ध यौन उत्पीड़न/दुष्कर्म के मामलों में तत्काल आधार पर जांच संबंधी मुद्दे, भारत-बंग्लादेश सीमा पर मवेशी तस्करी/मवेशियों की गैर-कानूनी आवाजाही, ओडिशा में दूरसंचार तथा बैंक कनेक्टिविटी की कमी, ओडिशा में गांजा/भांग की गैर-कानूनी खेती और व्यापार, कोयला रॉयल्टी की समीक्षा, अपर्याप्त धन और विलम्ब, पेट्रोलियम परियोजनाओं की भूमि संबंधी समस्याएं आदि मुद्दों पर भी चर्चा की गई । आज कुल 48 विषयों पर विचार किया गया जिन में से 40 (83 प्रतिशत से अधिक) का समाधान बैठक में निकाल लिया गया।


गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप पूर्वी क्षेत्र के त्वरित विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आज की बैठक कार्यसूची में शामिल विषयों के समाधान में निर्णायक और उपयोगी होगी। उन्होंने कहा कि कार्यसूची में दिए गए विषयों के अतिरिक्त वह चाहेंगे कि कानून और व्यवस्था तथा प्रशासनिक सुधारों से संबंधित विषयों को शामिल किया जाए और उन पर चर्चा की जाए ताकि परिषद की बैठक देश के विकास को गति देने में सहायक हो।


गृह मंत्री ने केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों को केन्द्रीय मंत्रालयों के साथ लंबित विषयों में निर्णय लेने में तेजी लाने को कहा। उन्होंने बैंकिंग सेवाओं के विस्तार पर बल दिया ताकि दूर-दराज़ के क्षेत्रों में भी लाभ मिले।


उन्होंने संबोधन के समापन में कहा कि लंबित विषयों का समाधान नियमित चर्चा से करने की आवश्यकता है, न कि केवल क्षेत्रीय परिषद की बैठकों में। उन्होंने राज्यों से नियमित आधार पर डाटा साझा करने के काम को सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। बैठक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की कल्पना के अनुरूप सहकारी संघवाद की भावना के साथ संपन्न हुई।



जापान की साझेदारी से हम ओडिशा को इस्पात क्षेत्र में पूर्वोदय का मुख्य केंद्र बनाएंगे : श्री धर्मेंद्र प्रधान

केन्द्रीय इस्पात और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान आज भुवनेश्वर में ‘अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए इस्पात का उपयोग बढ़ाने की प्रक्रियाओं को सक्षम करना’ विषय पर एक कार्यशाला में भाग लिया। इस कार्यशाला का आयोजन इस्पात मंत्रालय ने जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय (एमईटीआई) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की साझेदारी से किया था।


कार्यशाला में श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जापान की साझेदारी से वह ओडिशा को इस्पात क्षेत्र में पूर्वोदय का केंद्र बनाने के लिए तत्पर हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मिशन पूर्वोदय का आह्वान किया है जिससे पूर्वी भारत राष्ट्रीय विकास को गति दे रहा है और भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर कर रहा है।


इस पहल के बारे में बताते हुए श्री प्रधान ने कहा कि हम भारत में इस्पात के उपयोग को बढ़ाने के बारे में विचार-विमर्श करने के लिए कई कार्यशालाओं का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने जापान को अपने साझेदार देश के रूप में चुना है जो हमें भारतीय स्टील तंत्र को गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों मोर्चे पर बड़ा बनाने के लिए मार्गदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि जापान और ओडिशा का काफी पुराना संबंध रहा है। जापान की मदद से निर्मित प्रसिद्ध धौली स्तूप दो सभ्यताओं के बीच की एक कड़ी है। श्री प्रधान ने कहा कि आज कुछ दशकों के बाद हम फिर से नया इतिहास और ओडिशा में जापान के सहयोग से इस्पात क्षेत्र में वृद्धि का नया अध्याय लिखने में जुट गए हैं।


पूर्वी भारत के बारे में बताते हुए श्री प्रधान ने कहा कि पूर्वी भारत का समाज काफी आकांक्षी समाज है जहां लोग आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं और खर्च करने की उनकी क्षमता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत राष्ट्रीय आर्थिक विकास को गति देने और देश को 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के विजन को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


श्री प्रधान ने बताया कि ओडिशा में रेलवे, सड़क, हवाईअड्डे, पाइपलाइन, पुल आदि विकसित करने में 5 अरब डॉलर खर्च किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में अत्यधिक गरीबों को 8 करोड़ नए एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास उत्कृष्ट ढांचागत विकास और आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने के लिए महत्वाकांक्षी योजना है।


श्री प्रधान ने ओडिशा में इस्पात क्षेत्र की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ओडिशा आज देश का सर्वोच्च इस्पात उत्पादक राज्य है। हमलोग ओडिशा में इस्पात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2030 तक ओडिशा का इस्पात उत्पादन 100 एमटीपीए को पार कर जाएगा। उन्होंने कहा कि ओडिशा इस्पात क्षेत्र में मिशन पूर्वोदय का मुख्य केन्द्र बनने जा रहा है।


इस अवसर पर भारत में जापान के राजदूत श्री सतोशी सुजुकी ने कहा कि भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है और यह भारत के साथ अपने अनुभव को साझा करने का सही समय है। उन्होंने बताया कि जापानी कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ तेजी से सहयोग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि  मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि भारत और जापान इस्पात क्षेत्र के सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए भारत-जापान इस्पात शुरू की है। भारत में इस्पात की मांग बढ़ने वाली है। जापान की अर्थव्यवस्था में भारतीय लौह अयस्क के योगदान के बारे में बताते हुए  उन्होंने कहा कि भारत, खासकर ओडिशा से लौह अयस्क के निर्यात ने जापान को एक प्रमुख आर्थिक शक्ति बनने में मदद की।


इस कार्यशाला में ओडिशा के इस्पात और खनन मंत्री, श्री प्रफुल्ल कुमार मल्लिक,  इस्पात मंत्रालय के अपर सचिव सुश्री रसिका चौबे, ओडिशा के प्रधान सचिव (उद्योग) श्री हेमंत कुमार, सेल के अध्यक्ष श्री अनिल चौधरी, टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक श्री टी. वी. नरेंद्रन और सरकार और उद्योग से जुड़े कई अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।



प्रधानमंत्री 29 फरवरी, 2020 को 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को लॉन्च करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 29 फरवरी, 2020 को चित्रकूट में देशभर में 10,000 किसान उत्पादक संगठनों को लॉन्च करेंगे।


छोटे और सीमांत किसानों की संख्या लगभग 86 प्रतिशत हैं, जिनके पास देश में 1.1 हेक्टेयर से कम औसत खेती है। इन छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को कृषि उत्पादन के दौरान भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें प्रौद्योगिकी, बेहतर बीज, उर्वरक, कीटनाशक और समुचित वित्त की समस्याएं शामिल हैं। इन किसानों को अपनी आर्थिक कमजोरी के कारण अपने उत्पादों के विपणन की चुनौती का भी सामना करना पड़ता है।


      एफपीओ से छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों के सामूहीकरण में सहायता होगी, ताकि इन मुद्दों से निपटने में किसानों की सामूहिक शक्ति बढ़ सकें। एफपीओ के सदस्य संगठन के तहत अपनी गतिविधियों का प्रबंधन कर सकेंगे, ताकि प्रौद्योगिकी, निवेश, वित्त और बाजार तक बेहतर पहुंच हो सके और उनकी आजीविका तेजी से बढ़ सके।


      पीएम-किसान के एक साल पूरे


      इस अवसर पर पीएम-किसान योजना के लॉन्च होने का एक वर्ष पूरा हो जाने के मद्देनजर आयोजन भी किया जाएगा।


मोदी सरकार ने किसानों के आय समर्थन के रूप में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को लॉन्च किया था, ताकि किसानों को कृषि, संबंधित गतिविधियों और घरेलू आवश्यकताओं के खर्च वहन करने में सहायता हो सके।


योजना के तहत हर योग्य लाभार्थी को प्रति वर्ष 6000 रुपये की धनराशि दी जाती है। यह धनराशि दो-दो हजार रुपये के रूप में तीन बार चार माह की किस्तों में दी जाती है। यह भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के तहत योग्य लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे ऑनलाइन भेजी जाती है।


योजना 24 फरवरी, 2019 को लॉन्च की गई थी और उसने 24 फरवरी, 2020 को सफलतापूर्वक अपना एक साल पूरा कर लिया है।


अपनी पहली कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय के तहत मोदी 2.0 सरकार ने सभी किसानों को पीएम-किसान योजना का लाभ देने का निर्णय किया था।


पीएम-किसान लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान करने का विशेष अभियान


प्रधानमंत्री 29 फरवरी, 2020 को पीएम-किसान योजना के तहत सभी लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के वितरण का अभियान लॉन्च करेंगे।


पीएम-किसान योजना के तहत लगभग 8.5 करोड़ लाभार्थियों मे से 6.5 करोड़ से अधिक किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड हैं।


इस अभियान से यह सुनिश्चित होगा कि लगभग दो करोड़ पीएम-किसान लाभार्थियों को भी किसान क्रेडिट कार्ड वितरित कर दिए जाए।


सभी पीएम-किसान लाभार्थियों को रियायती संस्थागत ऋण तक पहुंच प्रदान करने के लिए 12 फरवरी से 26 फरवरी तक 15 दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत एक पन्ने के साधारण फॉर्म को भरा जाता है, जिसमें बैंक खाता नंबर, खेत रिकॉर्ड का विवरण जैसी बुनियादी जानकारी शामिल हैं। इसमें किसानों को यह घोषणा करनी है कि मौजूदा समय में वह किसी भी अन्य बैंक खाते से केसीसी का लाभार्थी नहीं है।


जिन पीएम-किसान लाभार्थियों के आवेदन 26 फरवरी तक प्राप्त हो गए है, उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड देने के लिए 29 फरवरी को बैंक शाखाओं में बुलाया जाएगा।



राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह में 21 विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने देश के वैज्ञानिक उद्यम की गुणवत्ता और प्रासंगिकता बढ़ाने पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे विज्ञान को लोगों के विकास और भलाई के लिए काम करना चाहिए। आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने शिक्षा तथा अनुसंधान संस्थानों में लैंगिक विकास और समानता के लिए तीन प्रमुख कार्यक्रमों की घोषणा की।


इस वर्ष के राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का विषय है  “विज्ञान में महिलाएं”


विज्ञान ज्योति कार्यक्रम हाईस्कूल में पढ़ने वाली मेधावी लड़कियों को उच्च शिक्षा में विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग तथा गणित (एसटीईएम) की पढ़ाई जारी रखने में बराबरी का अवसर प्रदान करेगा। संस्थानों को बदलने के लिए लैंगिक विकास (जीएटीआई) से विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग तथा गणित (एसटीईएम) में लैंगिक समानता के मूल्यांकन के लिए विस्तृत चार्टर और रूपरेखा विकसित करेगा। महिलाओं के लिए विज्ञान तथा टेक्नोलॉजी समाधानों का ऑनलाइन पोर्टल महिला विशेष सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों, फेलोशिप तथा केरियर काउंसलिंग से संबंधित ई-संसाधन उपलब्ध कराएगा। इसमें साइंस टेक्नोलॉजी में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों का विवरण होगा।


राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का मुख्य उद्देश्य विज्ञान के महत्व के संदेश को फैलाना है। उन्होंने कहा कि इसके दो पहलू हैं। पहला, शुद्ध ज्ञान की चाह के रूप में स्वयं में विज्ञान तथा जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उपाय के रूप में समाज में विज्ञान। उन्होंने कहा कि दोनों आपस में जुड़े हुए हैं।


राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने विज्ञान संचार और लोकप्रियता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। इन पुरस्कारों में मेधावी महिला वैज्ञानिकों के लिए महिला उत्कृष्टता पुरस्कार शामिल हैं। पुरस्कारों में राष्ट्रीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी पुरस्कार, स्पष्ट अनुसंधान के लिए लेखन कौशल को सशक्त बनाने (एडब्ल्यूएसएआर) का पुरस्कार, केसीआरबी महिला उत्कृष्टता पुरस्कार और सामाजिक लाभ के लिए टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन के माध्यम से उत्कृष्टता प्रदर्शन के लिए महिला पुरस्कार शामिल हैं।


विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने विज्ञान दिवस के विषय  “विज्ञान में महिलाएं” की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान में लैंगिक समानता की संस्कृति बनाने के लिए हमें सांकेतिक प्रयासों से संपूर्णता की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेशनल साइंस फाउंडेशन (अमेरिका) की हाल की रिपोर्ट के अनुसार भारत विज्ञान और इंजीनियरिंग प्रकाशनों में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है।


ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इस्टीट्यूट (टीएचएसटीआई) फरीदाबाद के कार्यकारी निदेशक प्रो. गगनदीप कांग ने विशेष व्याख्यान दिया। प्रो. कांग भारत की प्रथम महिला एफआरएस हैं।


इस अवसर पर सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के. विजय राघवन, डीबीटी की सचिव डॉ. रेणू स्वरूप, सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर मान्दे उपस्थित थे।



रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बालाकोट हवाई हमला एक संदेश था कि सीमा पार आतंकवाद शत्रु के लिए एक सस्‍ता विकल्प नहीं होगा

2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट हवाई हमले केवल सैन्य हमले ही नहीं थे बल्कि शत्रु के लिए एक मजबूत संदेश थे कि सीमा पार से आतंकवादी बुनियादी ढांचे का भारत के खिलाफ सस्‍ती जंग छेड़ने के लिए एक सुरक्षित शरण स्‍थल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। यह बात रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने आज बालाकोट हवाई हमले की पहली वर्षगांठ के अवसर पर ‘सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज’ द्वारा आयोजित ‘युद्ध नहीं, शांति नहीं परिदृश्‍य में वायु शक्ति’ नामक एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।


      देश की सेवा में सशस्‍त्र बलों के बलिदान का स्‍मरण करते हुए और पुलवामा हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्‍होंने कहा कि देश शहीदों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।


      उन्‍होंने कहा कि बालाकोट हवाई हमलों में भारत द्वारा दर्शायी गई जबरदस्‍त प्रतिक्रिया में नियंत्रण रेखा के पार अनेक सिद्धांतों को दोबारा लिखने के लिए मजबूर किया और यह बताया कि शत्रु को भविष्‍य में ऐसा दुस्‍साहस करने के लिए सौ बार सोचना होगा। उन्‍होंने कहा कि इन हमलों में भारत की रक्षा क्षमता का प्रदर्शन हुआ है और आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के अधिकार की पुष्टि हुई है।


      श्री राजनाथ सिंह ने बालाकोट हवाई हमले को सैन्‍य सटीकता और प्रभाव की एक विलक्षण घटना के रूप में वर्णन करते हुए कहा कि आतंकवाद के विरूद्ध हमारा दृष्टिकोण नैदानिक सैन्‍य कार्रवाई और परिपक्‍व तथा जिम्‍मेदार राजनयिक पहुंच का न्‍यायोचित संयोजन था। उन्‍ह‍ोंने राष्‍ट्र को आश्‍वासन दिया कि सरकार भविष्‍य में भी राष्‍ट्र सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे का माकूल जवाब देगी। सरकार ने भविष्‍य में किसी भी खतरे से निपटने के लिए बड़े संरचनात्‍मक बदलाव शुरू किए हैं। उन्‍होंने सभी हितधारकों से इन बदलावों को प्रभावी और कुशल बनाने में योगदान देने का अनुरोध किया।


      श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज दुनिया आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़ी है। सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए सामूहिक राजनयिक और वित्‍तीय दबाव के महत्‍व पर जोर देते हुए उन्‍होंने कहा कि हमने अभी हाल में पाकिस्‍तान पर सामूहिक, राजनयिक और वित्‍तीय दबाव के प्रभाव को देखा है। वीआईपी और नायकों की तरह सम्‍मान पाने वाले हाफिज़ सईद जैसे आतंकियों को जेल में डाला गया। हमने महसूस किया है कि जब तक पाकिस्‍तान को जवाबदेह नहीं माना जाता है, यह कदम पर्याप्‍त नहीं हैं, क्‍योंकि पाकिस्‍तान नकल और छल की पुरानी नीति जारी रखेगा। इस दिशा में काम करने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं।


      श्री राजनाथ सिंह ने संकर युद्ध को एक वास्‍तविकता की संज्ञा देते हुए इस युद्ध द्वारा उत्‍पन्‍न चुनौतियों से निपटने के लिए सैनिकों के प्रशिक्षण को पुनर्गठित करने की जरूरत पर जोर दिया। शंकर युद्ध के विभिन्‍न पहलुओं का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि ऐसे परिदृश्‍य में कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता, उच्‍च गति वाले हथियार, अंतरिक्ष आधारित सेंसर्स उपकरण महत्‍वपूर्ण प्रभाव डालेंगे। उन्‍होंने नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और मौजूदा क्षमताओं का नवाचारी तरीकों से उपयोग करने की जरूरत पर जोर दिया।


      इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ जनरल विपिन रावत ने कहा कि विश्‍व में भू-राजनीति बदल रही है और भारत इस क्षेत्र में अनेक झड़पों का गवाह है। उन्‍होंने हर समय भूमि, वायु और समुद्र में विश्‍वसनीय निष्‍ठा बनाए रखने का आह्वान किया। उन्‍होंने क‍हा कि तीनों सेनाओं का किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए मिलकर साथ-साथ काम करना चाहिए। विश्‍वसनीय निष्‍ठा, कठिन निर्णय लेते समय सैन्‍य नेतृत्‍व और राजनीति वर्ग की इच्‍छा से आती है। कारगिल, उरी और पुलवामा हमलों में यह निष्‍ठा तेजी से देखने को मिली।


      वायुसेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल श्री आर के एस भदोरिया ने कहा कि 2019 में पाकिस्‍तान के भीतर आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों पर हमला करने का साहसिक निर्णय लिया था। उन्‍होंने कहा कि उप-पारंपरिक परिदृश्‍य में वायुसेना का उपयोग एक प्रमुख बदलाव था। उन्‍होंने उत्‍पन्‍न स्थिति से शीघ्रतापूर्वक निपटने के लिए किए गए राजनयिक और राजनीतिक प्रयासों की सराहना की। सफल हवाई हमलों के कार्य में लगे विभिन्‍न संगठनों में तालमेल की प्रशंसा करते हुए उन्‍होंने कहा कि इस तरह के ठोस प्रयास किए गए कि इन हमलों में किसी नागरिक की मौत न हो। उन्‍होंने हाल के दिनों में भारतीय वायु सेना को नवीनतम प्रौद्योगिकी से लैस करने के लिए राजनीतिक नेतृत्‍व की सराहना की। बेहतर क्षमताओं को हासिल करने के संघर्ष में डेढ़ दशक से भी अधिक का समय लग गया। उन्‍होंने स्‍वदेशी क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया।


      इस सेमिनार में ‘युद्ध नहीं, शांति नहीं परिदृश्‍य में’ शत्रु के खिलाफ राष्‍ट्रीय इच्‍छा शक्ति के प्रयोग के कारण आवश्‍यक हुई परिस्थितियों में वायु शक्ति के उपयोग के बारे में


ध्‍यान केंद्रित किया गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव  डॉ जी सतीश रेड्डी, सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज़ के निदेशक एयर मार्शल के के. नोहवार (सेवानिवृत्त), पूर्व वायुसेनाध्यक्ष, विद्वान, सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।  



एसिम्‍प्‍टोमैटिक मलेरिया के लिए निदान

जैव प्रौद्योगिकी विभाग के भुवनेश्वर स्थित संस्‍थान इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (आईएलएस) और बेंगलूरु के जिग्‍सॉ बायो सॉल्यूशंस के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम के कारण मलेरिया के खिलाफ लड़ाई आसान हो सकती है।यह टीम एक ऐसी पद्धति तैयार कर रही है जो इस रोग स्‍पर्शोन्‍मुख (एसिम्‍प्‍टोमैटिक) वाहककी पहचान न होने की समस्या को दूर करने का भरोसा देती है।


इस रोग की जांच के लिए सामूहिक जांच एवं उपचार कार्यक्रमों में और मलेरिया नियंत्रण के उपायों की निगरानी में माइक्रोस्कोपी और प्रोटीन प्रतिरक्षा आधारित रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) का उपयोग किया जाता है। हालांकि इसके तहत करीब 30 से 50 प्रतिशत कम घनत्‍व वाले संक्रमण छूट जाते हैं जिसमें आमतौर पर दो परजीवी/ माइक्रोलीटर होते हैं। इन्‍हें अक्सर स्पर्शोन्मुख वाहक में देखे जाते हैं जो संक्रमण के मूक भंडार के रूप में कार्य करते हैं और वे मच्छरों के माध्यम से रोग को संक्रमित करने में समर्थ होते हैं। स्थानिक क्षेत्रों में स्पर्शोन्मुख वाहक की पहचान मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रमों की एक प्रमुख बाधा मानी जाती है। इसके लिए अधिक संवेदनशीलता के साथ नए नैदानिक ​​तरीकों की आवश्यकता है।


इस नए अध्‍ययन में इंस्टीच्‍यूट ऑफ लाइफ साइंसेज के डॉ. वी. अरुण नागराज और जिग्‍सॉ बायो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के श्रीनिवास राजू के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक टीम शामिल है। इस टीम ने जीनोम खनन की एक नई अवधारणा का इस्तेमाल कियाजो पूरे मलेरिया परजीवी जीनोम में मौजूद मल्टी-रिपीट सीक्वेंस (आईएमआरएस) की पहचान कर उसे विकसित होने से रोकने के लिए लक्षित करती है। इसे मलेरिया निदान के लिए ‘अति संवेदनशील’क्‍यूपीसीआर परीक्षण कहा गया है।


भारत के मलेरिया प्रभवित क्षेत्रों से एकत्र किए गए क्‍लीनिकल नमूनों के सत्यापन से पता चलता है कि यह जांच पारंपरिक तरीकों से लगभग 20 से 100 गुना अधिक संवेदनशील थी। इसके जरिये सबमाइक्रोस्‍कोपिक नमूनों का भी पता लगाया जा सकता है। अत्‍यधिक संवेदनशील अन्‍य तरीकों की तुलना में यह चार से आठ गुना बेहतर दिखी। साथ ही यह प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम के लिए बेहद खास दिखी जो मलेरिया परजीवी की सबसे घातक प्रजाति है। जबकि  प्लास्मोडियम विवैक्स प्रजाति के साथ क्रॉस-रिएक्शन नहीं किया जो अपेक्षाकृत कम घातक मलेरिया की पुनरावृत्ति का सबसे प्रुखख कारण है।


इंडिया साइंस वायर से बातचीत करते हुएडॉ. नागराज ने कहा कि विभिन्न प्रजातियों की एक साथ पहचान के लिए बहुविकल्‍पी जांच प्रक्रिया विकसित करने की गुंजाइश है। उन्‍होंने कहा, ‘हमारे अध्ययन से अति संवेदनशील, पॉइंट-ऑफ-केयर मौलिक्‍यूलर  निदान का विकास हो सकता है जिसे लघु, आइसोथर्मल, माइक्रोफ्लूडिक प्लेटफॉर्म और लैब-ऑन-ए-चिप उपकरणों के जरिये खोजा जा सकता है। आईएमआरएसदृष्टिकोण अन्य संक्रामक रोगों के निदान के लिए एक प्रौद्योगिकीमंच के रूप में भी काम कर सकता है।’


भारत ने 2030 तक मलेरिया का उन्‍मूलन करने और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा विकसित किया हैजो प्रभावित क्षेत्रों में स्पर्शोन्मुख वाहक की पहचान करता है और उसेके संक्रमण को साफ करता है। नई खोज इसमें मदद कर सकती है। डीबीटी के जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद ने इस परियोजना का वित्त पोषित किया। (विज्ञान समाचार)


(प्रमुख शब्‍द : प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम, प्लास्मोडियम विवैक्स, वायरलेंट, उन्‍मूलन, संवेदनशीलता, परजीवी, क्‍यूपीसीआर, जांच, पॉइंट-ऑफ-केयर, मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, मिनिएट्राइज्ड, आइसोथर्मल, माइक्रोफ्लूडिक प्लेटफॉर्म, लैब-ऑन-ए-चिप)



सेंटर फॉर एयर पॉवर स्टडीज और भारतीय वायुसेना की अनुरक्षण कमान ने संयुक्त रूप से नई दिल्ली के वायुसेना स्टेशन तुगलकाबाद में ‘भारत के समक्ष उभरती खतरनाक चुनौतियां’ पर गोष्ठी का आयोजन किया

 सेंटर फॉर एयर पॉवर स्टडीज (सीएपीएस) और भारतीय वायुसेना की अनुरक्षण कमान (एमसी-आईएएफ) ने संयुक्त रूप से नई दिल्ली के वायुसेना स्टेशन तुगलकाबाद में 25 फरवरी, 2020 को ‘चैलेंजेस ऑफ द इवॉल्विंग थ्रेट्स फेसिंग इंडिया’ (भारत के समक्ष उभरती खतरनाक चुनौतियां) पर गोष्ठी का आयोजन किया। इस गोष्ठी में वायुसेना के अनुरक्षण कमान की इकाईयों के अधिकारियों तथा सेंटर फॉर एयर पॉवर स्टडीज के विशिष्ट वरिष्ठ शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। एयर मार्शल शशिकर चौधरी एवीएसएम वीएसएम एमसी-आईएएफ के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ ने आयोजन का उद्घाटन किया।


      गोष्ठी में तीन सत्र हुए। उद्घाटन सत्र की शुरूआत सीएपीएस के महानिदेशक एयर मार्शल के.के. नोहवार पीवीएसएम, वीएम (सेवानिवृत्त) के संबोधन से हुई। इस सत्र में ‘पोलिटीको-मिलिट्री एनवायर्मेंट विथ रेस्पेक्ट ऑफ इंडिया-चाइना रिलेसन्स पोस्ट वुहान एंड महाबलीपुरम’ पर चर्चा की गई। इस विषय पर श्री जयदेव रानाडे ने प्रकाश डाला। सीएपीएस की विशिष्ट फेलो डॉ. शालिनी चावला ने ‘इंडिया-पाकिस्तान रिलेसन्स पोस्ट-बालाकोट एंड एब्रोगेशन ऑफ आर्टिकल-370’ पर व्याख्यान दिया। दूसरे सत्र में ‘न्यू चैलेंजेस विथ रेस्पेक्ट टू ट्रेजेक्ट्री ऑफ चाइनाज न्यूक्लियर वैपन्स प्रोग्राम एंड सेफगार्डिंग इंडियाज क्रिटिकल इन्फोर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर’ पर चर्चा की गई। इस सत्र की अध्यक्षता सीएपीएस की विशिष्ट फेलो डॉ. शालिनी चावला ने की। गोष्ठी के अंतिम सत्र में ‘केपेबिलिटी बिल्डिंग एट बेस रिपेयर डीपोज एंड एक्विपमेंट डीपोज ऑफ द आईएएफ’ पर चर्चा की गई। इस सत्र की अध्यक्षता एयर वाइस मार्शल वी.सी. वानखेडे एओईएस एमसी-आईएएफ ने की।



सूक्ष्मजीवों से जैव ईंधन

इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्‍नोलॉजी (आईसीजीईबी) के शोधकर्तासिनेकोकोकस विशेष नाम पीसीसी 7002 नामक एक समुद्री सूक्ष्मजीव की वृद्धि दर और उसमें शर्करा की मात्रा में सुधार के लिए एक विधि तैयार कर रहे हैं। इससे जैव ईंधन क्षेत्र को बढ़ावा मिल सकता है।


जैव-ईंधन उत्पादन सहित अधिकतर जैव-प्रौद्योगिकीय प्रक्रियाएंकम लागत और शर्करा एवं नाइट्रोजन स्रोत से निर्वाध आपूर्ति की उपलब्धता पर निर्भर हैं। शर्कराआमतौर पर पौधों से आती है। पौधे प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया के माध्यम से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को शर्करा, प्रोटीन और लिपिड जैसे जैविक घटकों में परिवर्तित करने के लिए प्रकाश ऊर्जा का उपयोग करते हैं।


हालांकिकुछ बैक्टीरिया, जैसे साइनोबैक्टीरिया (जिसे नीले-हरे शैवाल के रूप में भी जाना जाता है), भी प्रकाश संश्लेषण कर सकते हैं और वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को ठीक करके शर्कराका उत्पादन कर सकते हैं। साइनोबैक्टीरिया से शर्करा की उपज संभावित रूप से भूमि आधारित फसलों की तुलना में बहुत अधिक हो सकती है। इसके अलावा, पौधे-आधारित शर्करा के विपरीतसाइनोबैक्टीरियल बायोमास प्रोटीन के रूप में एक नाइट्रोजन स्रोत प्रदान करता है।


साइनोबैक्टीरिया ताजा और समुद्री पानी दोनों में पाए जाते हैं। समुद्री साइनोबैक्टीरिया का उपयोग करना बेहतर हो सकता है क्योंकि ताजे पानी में तेजी से कमी हो रही है। हालांकि, समुद्री साइनोबैक्टीरिया आधारित शर्करा उत्पादन की आर्थिक व्यवहार्यता में सुधार के लिए उनकी विकास दर और शर्करा सामग्री में उल्लेखनीय सुधार करने की आवश्यकता है।


इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी की एक टीम ने इसे हासिल किया है। इस केंद्र के जैव-ईंधन समूह के लिए सिस्टम बायोलॉजी के ग्रुप लीडर और डीबीटी-आईसीजीईबी सेंटर फॉर एडवांस्ड बायोएनर्जी रिसर्च के अण्‍वेषक डॉ. शिरीष श्रीवास्तव और आईसीजीईबी के एक पीएचडी छात्र जय कुमार गुप्ताने इस टीम का नेतृत्व किया।


उन्होंने एक समुद्री साइनोबैक्टीरियम सिनेकोकोकस विशेष नाम पीसीसी 7002 को सफलतापूर्वक तैयार किया। पीसीसी 7002 में उच्च विकास दर और शर्करा (ग्लाइकोजेन) की मात्रा दिखी। इसे जब हवा में उगाया गया तो उसका विकास दोगुना हो गया और कोशिकाओं के ग्लाइकोजेन मात्रा में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई।


इस अध्‍ययन टीम का नेतृत्‍व करने वाले डॉ. श्रीवास्‍तव ने इंडिया साइंस वायर से बातचीत करते हुएकहा कि सिनेकोकोकस विशेष नाम पीसीसी 7002 समुद्री साइनोबैक्टीरियम का एक मॉडल है और वहां अन्य सिनेकोकोकस प्रजातियां अथवा संबंधित जीव थेजिस पर इस काम को सही तरीके सेआगे बढ़ाया जा सकता है।


उन्‍होंने कहा, ‘हम इस कार्य से संबंधित कई अनुवर्ती अध्ययन कर रहे हैंजिसमें बड़े पैमाने पर इसकी खेती,मानव एवं पशु मूत्र वाली यूरिया पर कोशिका वृद्धि,साइनोबैक्टीरियल बायोमास से शर्करा एवं प्रोटीन के निष्कर्षण का अनुकूलनऔर प्रसंस्‍कृत बायोमास से बायोइथेनॉल जैसे जैवप्रौद्योगिकी उत्‍पाद की प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट यानी सटीक अवधारणा शामिल हैं। 


जैवप्रौद्योगिकी विभाग ने इस शोध को प्रायोजित किया है। वैज्ञानिकों नेअपने काम पर एक रिपोर्ट‘बायोटेक्‍नोलॉजी फॉर बायोफ़्यूल्‍स’ पत्रिका में प्रकाशित की है। (विज्ञान समचार)


(प्रमुख शब्‍द : यूरिया, शर्करा, प्रोटीन, बायोमास, प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट, बायो-इथेनॉल, समुद्री जल, ताजा जल)



पिगमेंटरी डिसऑर्डर पर शोध को बढ़ावा देने के लिए 3.6 करोड़ रुपये का अनुदान

पिगमेंटरी डिसऑर्डर यानी वर्णक विकारों की समस्या को समझने के लिए किए जा रहे अध्ययन को वेलकम ट्रस्ट/ डीबीटी इंडिया गठबंधन के जरिये जबरदस्‍त शॉट मिलने की उम्मीद है। यह गठबंधन जैव प्रौद्योगिकी के लिए फरीदाबाद स्थित क्षेत्रीय केंद्र के सहायक प्रोफेसर डॉ. राजेन्द्र के. मोतीयानी पर एक इंटरमीडिएट फेलोशिप पुरस्कार प्रदान करता है। इस पुरस्कार में पांच वर्षों की अवधि के लिए 3.60 करोड़ रुपये का अनुदान शामिल है।


शारीरिक वर्णकता एक महत्वपूर्ण रक्षा तंत्र है जिसके द्वारा त्वचा को हानिकारक यूवी विकिरणों से बचाया जाता है। अकुशल वर्णकता त्वचा के कैंसर का कारण बनता हैजो दुनिया भर में कैंसर से जुड़ी मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है। इसके अलावा, वर्णक विकार (हाइपो और हाइपर पिगमेंटरी दोनों) एक सामाजिक कलंक माना जाता है और इसलिए वह लंबी अवधि के लिए मनोवैज्ञानिक आघात पहुंचाता है और रोगियों के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित करता है। वर्तमान चिकित्सीय रणनीतियां वर्णक विकारों को दूर करने में कुशल नहीं हैं।


इस पुरस्कार के तहत शुरू की जाने वाली यह अनुसंधान परियोजना का उद्देश्‍यलक्ष्य करने योग्य उन नोवल मॉलिक्‍यूलर पदार्थों की पहचान करना होगा जो वर्णक प्रक्रिया को संचालित करने के लिए महत्‍वपूर्ण हैं। इसके अलावा, शोधकर्ता वर्णक विकारों के उपचार के लिए वाणिज्यिक तौर पर उपलब्ध दवाओं का नए सिरे से उपयोग करने की कोशिश भी करेंगे। आगे चलकर इस परियोजना से समाज को दोतरफा लाभ- यूवी-प्रेरित त्वचा के कैंसर से सुरक्षा और वर्णक विकारों के लिए संभावित उपचार का विकल्प- होने की उम्मीद है।


वर्णकता जीवविज्ञान क्षेत्र में अब तक मुख्‍य तौर पर मेलेनिन संश्लेषण को विनियमित करने वाले एंजाइमों को समझने और उनके बायोजेनेसिसएवं परिपक्वता में शामिल मेलेनोसोम प्रोटीन पर ध्‍यान केंद्रित किया गया है। हालांकि, मेलेनोसोम बायोजेनेसिस और मेलेनिन संश्लेषण जटिल प्रक्रिया है और संभवत: अन्य कोशिकीय अंगइस प्रक्रिया को संचालित करते हैं।


डॉ. मोतियानी और उनकी टीम द्वारा अलग-अलग वर्णक मीलेनोसाइट पर इससे पहले किए गए अध्ययन से पता चला था कि एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (ईआर) और माइटोकॉन्ड्रियावर्णकता के महत्वपूर्ण संचालक हैं। इस नई परियोजना का उद्देश्य वर्णकता में एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम और माइटोकॉन्ड्रिया सिग्‍नलिंग पाथवे की भूमिका को चित्रित करना और प्रमुख एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम और माइटोकॉड्रियल प्रोटीन की पहचान करना है जो वर्णकता को नियंत्रित करते हैं। बाद में वे इन सिग्नलिंग कैस्केड को एफडीए द्वारा मंजूर दवाओं से लक्ष्‍य करेंगे ताकि यह पता चल सके कि किसी ज्ञात दवा का इस्‍तेमाल वर्णक विकारों को कम करने के लिए किया जा सकता है। (विज्ञान समाचार)


(प्रमुख शब्‍द : माइटोकॉन्ड्रिया, यूवी विकिरण, त्वचा कैंसर, वर्णक विकार, कलंक, मनोवैज्ञानिक आघात, चिकित्सीय रणनीति)



राष्‍ट्रपति ने कहा कि आइए हम अपने वैज्ञानिक उद्यम की गुणवत्‍ता और प्रासंगिकता बढ़ाने का संकल्‍प लें

राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने अपने वैज्ञानिक उद्यम की गुणवत्ता और प्रासंगिकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्‍होंने कहा कि हमारे विज्ञान को देश के लोगों के विकास और भलाई में योगदान देकर जनता के लिए काम करना चाहिए। श्री कोविंद विज्ञान और प्रौ‍द्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा आज नई दिल्‍ली में आयोजित राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।  


राष्‍ट्रप‍ति ने कहा कि हमें अपने विश्‍वविद्यालय और प्रयोगशाला  में सभी उपकरणों, ज्ञान, मानव शक्ति और बुनियादी ढांचे के साथ विज्ञान और वास्‍तव में समाज के सभी हितधारकों तक पहुंचने का लक्ष्‍य निर्धारित करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि यह जानकर खुशी हुई कि कॉरपोरेट सामाजिक जिम्‍मेदारी की तर्ज पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग भी वैज्ञानिक सामाजिक जिम्‍मेदारी की अवधारणा को विकसित कर रहा है और इसे नीति में शामिल कर रहा है। इस नीति में वैज्ञानिक बुनियादी ढांचा साझा करने कॉलेज के संकाय को परामर्श देना, अनुसंधान संस्‍कृति को बढ़ावा देना और शीर्ष प्रयोगशालाओं में युवा छात्रों की यात्राओं का आयोजन करना शामिल हैं।


राष्‍ट्रपति ने कहा कि राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस का मूल उद्देश्‍य विज्ञान के महत्‍व के संदेश का प्रचार करना है। इसके दो पहलू हैं – अपने आप में विज्ञान, शुद्ध ज्ञान की खोज के रूप में और समाज में विज्ञान, जीवन की गुणवत्‍ता बढ़ाने के लिए एक उपकरण के रूप में। वास्‍तव में दोनों ही पहलू आपस में जुड़े हुए हैं, क्‍योंकि इन दोनों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एक ही है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्‍यम से ही हम पर्यावरण, स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल, उचित आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा, भोजन एवं जल सुरक्षा तथा संचार आदि की चुनौतियों का प्रभावी रूप से समाधान कर सकते हैं। आज हमारे सामने अनेक प्रकार की जटिल समस्‍याएं हैं। विभिन्‍न संसाधनों की मांग और आपूर्ति के बढ़ते हुए असंतुलन से भविष्‍य में टकराव की संभावना है। हम सभी को इन चुनौतियों के स्‍थायी समाधान की अपनी तलाश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर निर्भर रहना होगा। 



उपराष्ट्रपति ने वास्तुकारों से कहा कि अपनी योजनाओं में संरक्षण और निरंतरता का ध्यान रखें

उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने आज सभी वास्तुकारों और शहरी योजनाकारों से आग्रह किया कि वे अपनी योजनाओं के लिए संरक्षण और निरंतरता पर विशेष ध्यान दे। उन्होंने कहा कि निर्माण वातावरण में सुधार लाने के लिए परम्परा तथा प्रौद्योगिकी का समायोजन करें तथा दीर्घकालीन विकास की दिशा में काम करें।


तमिलनाडु के मामल्लपुरम में वास्तुशिल्प और मूर्तिकला कॉलेज के छात्रों से बातचीत करते हुए श्री नायडू ने उनसे आग्रह किया कि वे देश की मूल्यवान संस्कृति और विरासत को प्रोत्साहन देने और उसकी सुरक्षा करने का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि छात्रों को पारम्परिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।


      मामल्लपुरम के विश्व धरोहर स्थल का उल्लेख करते हुए श्री नायडू ने कहा कि यह स्थान भारत की महान परम्परा का परिचायक है तथा मामल्लपुरम की पल्लव मूर्तिकारी और तटीय मंदिर, रथ मंदिर, गुफा मंदिर तथा अर्जुन का प्रायश्चित या गंगा अवतरण शैल वास्तुकला का शानदार नमूना होने के साथ-साथ दुर्लभ गरिमा को भी प्रदर्शित करते हैं।


      उपराष्ट्रपति ने कहा कि वास्तुशिल्प और मूर्तिकला कॉलेज इससे बेहतर स्थान पर नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि यहां के वास्तुशिल्प से महान विविधता के साथ-साथ इन स्मारकों का कर्मिक विकास भी नजर आता है।


      पर्यावरण अनुकूल हरित भवनों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर बल देते हुए श्री नायडू ने कहा कि इन इमारतों में पानी का कम उपयोग होता है और ऊर्जा का आदर्श इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने आग्रह किया कि नई इमारतों का डिजाइन तैयार करते समय डिजिटल प्रौद्योगिकी का पूरा फायदा उठाया जाए, ताकि ‘स्मार्ट बिल्डिंग’ का निर्माण हो सके।


      श्री नायडू ने वास्तुशिल्प के छात्रों से आग्रह किया कि वे तेज शहरीकरण के समाधान के लिए नवाचारों का उपयोग करें तथा शहरी क्षेत्रों के सामान ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुविधाएं प्रदान करने के तरीके खोजें। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अधिक से अधिक साहित्य और कला रूपों का अध्ययन करें तथा अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त करें। उन्होंने छात्रों से यह भी कहा कि वे मूर्तिकला सहित सभी भारतीय कला रूपों के प्रति अपनी समक्ष में इजाफा करें।


      उपराष्ट्रपति ने वास्तुशिल्प कॉलेज जैसे संस्थानों से आग्रह किया कि वे शोध और नवाचार को प्रोत्साहन दे, ताकि हमारे शहर सुरक्षित और सुविधाजनक बन सकें तथा हमारी इमारतें सस्ती और पर्यावरण अनुकूल निर्मित हो सकें। उपराष्ट्रपति ने छात्रों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए तमिलनाडु सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार छात्रों को इस दिशा में बहुत प्रोत्साहन दे रही है।


      इसके पूर्व उपराष्ट्रपति ने परिसर में सुधाई, प्रस्तर, धातु और काष्ठ मूर्तिकला स्टूडियो, वास्तुशिल्प स्टूडियो तथा पारम्परिक चित्रकारी स्टूडियो का दौरा किया। उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति का भी अवलोकन किया।


      श्री नायडू ने कहा कि मूर्तिकला भारतीय संस्कृति को प्रस्तुत करने का बेहतरीन कला रूप है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि युवाओं में निहित कौशल को पहचान कर प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इसके लिए उपराष्ट्रपति ने मशवरा दिया कि शिक्षा प्रणाली में शिक्षण और कौशल निर्माण का समायोजन किया जाना चाहिए।


      उपराष्ट्रपति ने नक्काशी के लिए छेनी और हथोड़ी वाली तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए मामल्लपुरम के मूर्तिकारों की सराहना की। उन्होंने पल्लव युग की जटिल कला की प्रतिकृति तैयार करने के लिए मूर्तिकारों की क्षमता और उनके कौशल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, ‘मुझे वास्तुशिल्प और मूर्तिकला कॉलेज के छात्रों द्वारा किए गए काम को देखकर अति प्रसन्नता हो रही है। कला और वास्तुशिल्प के इस उत्कृष्ट केन्द्र का दौरा करके मैं ऊर्जावान हो गया हूं।’


      अपने आगमन के दौरान उपराष्ट्रपति ने संस्थान के परिसर में संत कवि और दार्शानिक थिरुवल्लुवर की प्रतिमा का अनावरण भी किया।


      छात्रों के साथ उपराष्ट्रपति की बातचीत के दौरान तमिल आधिकारिक भाषा, तमिल संस्कृति और वास्तुशास्त्र मंत्री श्री के.के. पांडियाराजन, तमिलनाडु सरकार के अवर मुख्य सचिव श्री अशोक डोंगरे और महाबलीपुरम के गर्वमेंट कॉलेज ऑफ आर्कीटेक्चर एंड स्कल्पचर के प्राचार्य डॉ. राजेन्द्रन और अन्य अध्यापक उपस्थित थे।



Friday, February 28, 2020

आपस में मिल-जुलकर रहें 

1947 के बंटवारे का दर्द वो ही समझ सकते हैं, जिन्होंने उस दर्द को स्वयं सहा है | अगर हम समझ पाते तो आज हम सब भारतीय होते न कि गुजराती, मराठी, पंजाबी, बिहारी, दक्षिणी-पश्चिमी, उत्तरी... | आजादी के बाद भी हमने आजाद भारत में तमाम दंगे किये हैं | कभी राजनीति के शिकार होकर तो कभी धर्म में अंधे होकर | राम-रहीम की लड़ाई में मानवता कब दफन हो गई पता भी नहीं चला |

क्या भारत की नई पीढ़ी जानती है कि 1947 के दंगे कितने भीभत्स, भयानक थे | कत्ल, मारकाट, बलात्कार जैसे घिनौने कुकर्म किये गये वो भी सौ - दो सौ की संख्या में नहीं हजारों हजार की संख्या में, अपहरण, लूट, विश्वासघात, धर्मांतरण की ऐसी आँधी आई थी उस दौर में, जिन लेखकों ने उस बंटवारे की घटना का जिक्र किया है वे रो-रोकर ही लिख पाये | 

बंटवारे की हैवानियत का सबसे बड़ा शिकार पंजाब हुआ था | उस दंगे में इंसान ही इंसान के खून का प्यासा हो गया था | दहशत भरे उस काल में करीब 10 लाख से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था | क्या हम बीते खूनी इतिहास से कुछ सीख लेंगे | आपको बतादें कि बंटवारे के जिम्मेदार हमारे देश के ही कुछ स्वार्थी नेता थे | और आज भी कुछ स्वार्थी नेता अपनी स्वार्थ भरी रोटियां सेकने के लिए दंगों को भड़काने का कार्य करते हैं |  साथियों भारत में अलग-अलग भाषायें, रीति-रिवाज, धर्म, पहनावा है, लेकिन हम सब भारतीय हैं | हम किसी एक प्रांत तक सीमित न रहें | हम जैसे भी हैं, हैं तो भारतवासी  

हमारा संबिधान, हमारे धर्म हमें एक रहने की शिक्षा देते हैं | मानव मात्र ही नहीं सम्पूर्ण जीवजन्तुओं से प्रेम करने की शिक्षा देते हैं हमारे महापुरुष | साथियों! किसी के बहकावे में न आयें, हमेशा अपनी मातृभूमि - जन्मभूमि की सेवा में तत्पर रहें | आपस में मिल-जुलकर रहें | क्योंकि आज हमें जरूरत है इंसानियत की, आदमी आदमी की सहायता करे...  एक-दूसरे की खुशियों में शामिल हों, एक-दूसरे के दुख दर्द बांटें | हम नफरत कब तक करते रहेंगे ,कब तक एक-दूसरे का अपमान करते रहेंगे | यह सारी प्रथ्वी प्यार स्नेह की भूखी है | माफ कीजिये दोस्तों... धर्म से बढ़कर इंसानियत है | इंसानियत हमारे साथ पैदा होती है और हमारे जाने के बाद भी जिंदा रहती है | धर्म बाद में पैदा होता है और हमारे साथ ही मिट जाता है | हमें अपनी आत्मा विषैली नहीं, अमृतमयी बनानी है | खून-खराबे से दूर मानवी सज्जनता में जीना है | यही हमारे धर्म हमें शिक्षा देते हैं | तो आइये मित्रों आपस में मिलजुलकर रहें |

नेताओं के बहकावे में कतई नहीं आयें | क्या आपने कभी किसी नेता या उसके परिवारी जन को दंगों की भेंट चढते देखा है | और तो और उस धर्म गुरू और उसके परिवारी जन को दंगों में मरते-कटते देखा है जो कहते हैं हमारा धर्म संकट में है, नहीं न तो भले मानुषों आपस में लड़ो मत सवाल करो सरकार से भूख पर, गरीबी पर, बेरोजगारी पर, शिक्षा पर न कि धर्म पर... 

तुम भूखें नंगों ने कभी सोचा है कि जिस धर्म गुरू, नेता, पार्टी का झंड़ा उठाये फिरते हो उसकी सम्पत्ति कितनी है | सच्चाई सुनोगे तो शायद बेहोश हो जाओगे | अरे भुल्लकड़ भारतीय जनता अपने इतिहास से कुछ सीखो और धर्म-वर्म को भूलकर अपने परिवार, अपने राष्ट्र की सोचो | ये हिंदू - मुस्लिम, सिख - ईसाई वाला खेल बहुत खेल लिया, अब बंद करो | जब राष्ट्र का जन-धन जलकर खाक हो जाता है तब इस देश की पुलिस - अन्य सुरक्षा बल हरकत में आते हैं और जब मजदूर, आदिवासी, किसान अपने हक की थोड़ी सी आवाज उठायें तो बड़ी बेदर्दी से उनकी आवाज दबा दी जाती है | पता है क्यों? क्योंकि यह सब स्क्रिप्ट द्वारा किया जाता है | सारी पटकथा नेताओं द्वारा लिखी जाती है | पुलिस - सेना तो बस नेताओं के हाथों की कठपुतली बनकर रह जाते हैं | उनके इसारे पर ही अपना खेल दिखाते रहते हैं | 

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने दिल्ली में कानून और व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया

केंद्रीय गृह मंत्री, श्री अमित शाह ने दिल्ली के उत्‍तर-पूर्वी जिले में हाल में हुए दंगों के मद्देनजर कानून और व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने के लिए एक समीक्षा बैठक की। बैठक में अन्‍य लोगों के अलावा केन्‍द्रीय गृह सचिव, दिल्ली के पुलिस आयुक्‍त और विशेष पुलिस आयुक्‍त, कानून और व्यवस्था शामिल हुए।


श्री शाह ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और और न ही साम्प्रदायिक तनाव फैलाने में दिलचस्पी लेने वाले उपद्रवी तत्वों और समूहों के नापाक इरादों का शिकार बनें। दिल्ली के 203 पुलिस थानों (भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 4.2%) में से केवल 12 पुलिस थाने इन दंगों से प्रभावित हुए हैं, जबकि राष्ट्रीय राजधानी में अन्‍य स्‍थानों पर सामान्य स्थिति और सांप्रदायिक सद्भाव बना हुआ है। दिल्ली पुलिस को समाज के सभी वर्गों को सुरक्षा प्रदान करने का आदेश है और वह इसके लिए बाध्य है।


समीक्षा बैठक की प्रमुख बातें:



  • उत्‍तर-पूर्वी जिले के किसी भी प्रभावित पुलिस स्टेशन में पिछले 36 घंटों में कोई बड़ी घटना नहीं हुई है।

  • जमीनी स्थिति में सुधार को देखते हुए धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा में कल कुल 10 घंटों की ढील दी जाएगी।

  • संघर्षों, जानमाल को नुकसान आदि से जुड़ी घटनाओं के संबंध में अब तक 48 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और उपयुक्‍त समय पर और एफआईआर दर्ज की जाएंगी।

  • पुलिस ने अब तक पूछताछ के लिए 514 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है। जांच के क्रम में और गिरफ्तारियां की जाएंगी।

  • दिल्ली पुलिस ने गंभीर अपराधों की जांच के लिए अलग से दो एसआईटी का गठन किया है।

  • उत्‍तर-पूर्वी जिले के प्रभावित इलाकों में 24 फरवरी से अब तक केन्‍द्रीय अर्द्ध सैनिक बलों के करीब 7,000 जवान तैनात किए गए है। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस ने भी पुलिस आयुक्‍त की सम्‍पूर्ण देखरेख में तीन विशेष पुलिस आयुक्‍त, छह संयुक्त पुलिस आयुक्‍त, एक अतिरिक्त पुलिस आयुक्‍त, 22 पुलिस उपायुक्‍त, 20 सहायक पुलिस आयुक्‍त, 60 इंस्पेक्टर, 1,200 अन्य रैंक और 200 महिला पुलिस को तैनात किया है ताकि वे प्रभावी प्रभावी ढंग से मार्गदर्शन कर सकें और स्थिति पर काबू पाने और उस पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस की प्रतिक्रिया का निरीक्षण कर सकें।

  • 24 फरवरी से इन दुखद घटनाओं में 35 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।

  • नागरिकों से अनुरोध है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्‍यान न दें। दिल्ली पुलिस ने चौबीस घंटे सहायता के लिए हेल्‍पलाइन- 22829334 और 22829335 स्थापित की है। इन नंबरों का प्रचार किया जा रहा है ताकि उपद्रवियों और किसी भी उभरती हुई स्थिति के बारे में पुलिस को जानकारी दी जा सके।

  • कानून और व्यवस्था को बहाल करने के लिए अपने कर्तव्‍य का पालन करते हुए दो सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान कुर्बान कर दी। इसके अलावा, इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में लगभग 70 पुलिसकर्मी और वरिष्ठ अधिकारी घायल हुए हैं। घायलों को चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए गए हैं।

  • समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विश्वास-निर्माण के उपाय के रूप में, दिल्ली पुलिस ने स्थिति को सामान्य बनाने और समुदायों के बीच आपस में सौहार्द बढ़ाने के लिए दिल्ली भर में शांति समिति की बैठकें शुरू कर दी हैं। शांति समिति की यह बैठकें स्थिति सामान्य होने तक जारी रहेंगी। पिछले दो दिनों में दिल्ली के विभिन्न जिलों में शांति समिति की अब तक लगभग 330 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इसके अलावा, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशंस (आरडब्‍ल्‍यूए) और मार्केट वेलफेयर एसोसिएशंस (एमडब्‍ल्‍यूए) के साथ भी कई इलाकों में मीटिंग बुलाई गई है। शांति समिति / आरडब्ल्यूए / एमडब्ल्यूए की इस तरह की बैठक में नागरिक समाज समूह, विभिन्न राजनीतिक दलों कांग्रेस, एएपी, बीजेपी आदि के प्रतिनिधियों सहित समाज के विभिन्न वर्गों ने हिस्‍सा लिया।

  • पूर्वी दिल्ली नगर निगम दंगा प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों की सफाई और क्षतिग्रस्त सार्वजनिक संपत्तियों की मरम्मत के लिए पहले ही कदम उठा चुका है।  अन्य नागरिक एजेंसियां भी ​​नागरिक सुविधाओं को जल्द से जल्द बहाल करने में लगी हुई हैं। राजमार्ग और उससे जुड़ी सड़कों पर यातायात की आवाजाही सामान्य हो रही है।



प्रधानमंत्री ने राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर वैज्ञानिकों को बधाई दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर वैज्ञानिकों को बधाई दी है।


प्रधानमंत्री ने अपने बधाई संदेश में कहा, ‘‘राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस हमारे वैज्ञानिकों की प्रतिभा और दृढ़ता का अभिवादन करने का अवसर है। अविष्‍कार करने के उनके जोश और पथप्रदर्शक अनुसंधान ने भारत और दुनिया की सहायता की है। मेरी कामना है कि भारतीय वैज्ञानिक लगातार कामयाब होते रहें और हमारे युवा मस्तिष्‍क विज्ञान के प्रति अधिक जिज्ञासा रखें।  


भारत में अनुसंधान और नई खोजों के लिए बेहतर माहौल बनाने के लिए हमारी तरफ से, सरकार अनेक प्रयास कर रही है। इस वर्ष के शुरू में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के दौरान मैंने विज्ञान से जुड़े पहलुओं की चर्चा की थी। उन्‍हें मैं फिर साझा कर रहा हूं।’’



श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सोसायटी की 91वीं वार्षिक आम बैठक की अध्यक्षता की

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि सहकारी खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार जल्द ही दस हजार नए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का पंजीकरण करेगी। आज यहां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) सोसाइटी की 91वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक एफपीओ को बुवाई, कटाई से लेकर वितरण और विपणन तक खेती से संबंधित सभी गतिविधियों के लिए 15 लाख रुपये की राशि प्रदान करने के लिए बजटीय प्रावधान किया गया है।


श्री तोमर जो आईसीएआर सोसाइटी के अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के तहत मिशन मोड के अंतर्गत 53 करोड़ मवेशियों और बकरियों का टीकाकरण करने के लिए एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रव्यापी योजना शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मत्स्य पालन, निर्यात और दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लिए भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


कृषि मंत्री ने सरकारी योजनाओं के व्यापक प्रसार का भी आह्वान किया ताकि किसानों के बीच लाभ सबसे निचले स्तर पर पहुंच जाए। उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत ऐसी आशंकाएं थीं कि बीमा कंपनियों ने किसानों से अधिक लाभ प्राप्त किया, इसके अलावा निरीक्षण के दौरान निचले स्तर पर भ्रष्टाचार की खबरें भी थीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की चिंताओं को दूर करने के लिए फसल बीमा योजना को अब स्वैच्छिक रूप से बदल दिया गया है और उसका प्रीमियम भी समान रहेगा,1.5 से 2 प्रतिशत के बीच। श्री तोमर ने कहा कि पीएमएफबीवाई फसल कवर का लाभ उठाने वाले 58 प्रतिशत वो किसान थे जिन्होंने फसल ऋण लिया था। उन्होंने कहा कि हालांकि तथ्य यह है कि बीमा कंपनियों द्वारा एकत्र किए गए कुल 13,000 करोड़ रुपये के प्रीमियम के मुकाबले किसानों को कुल 58,000 करोड़ रुपये का बीमा लाभ दिया गया है।


श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई शीर्ष प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कृषि एक क्षेत्र है। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना, खेती को एक लाभदायक उद्यम बनाना और किसानों तथा ग्रामीण आय को बढ़ाना चुनौती है। श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है।


इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आईसीएआर, सीएसआईआर और डीआरडीओ के तहत विभिन्न अनुसंधान और विकास संस्थानों, विश्वविद्यालयों और शिक्षाविदों, सार्वजनिक उपक्रमों और उद्योग के बीच तालमेल बनाने का आह्वान किया ताकि उनमें से प्रत्येक द्वारा किए जा रहे भारी निवेश से बड़ा लाभ मिल सके। श्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत को पांच वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है, और साथ ही जोड़ा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में कृषि उत्पादन और उत्पादकता बड़े कारक होंगे। उन्होंने कहा कि कृषि में अधिक अनुसंधान और विकास(आरएंडडी), कृषि ऋण की समय पर उपलब्धता, मशीनीकृत खेती और स्वचालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण होगा।


श्री गोयल ने कृषि वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि जब हमारी कृषि प्रकृति की अनिश्चितताओं से मुक्त हो जाए तो फिर वे एक मंच की दिशा में काम करें। उन्होंने कहा कि इस साल के बजट में किसान रेल की घोषणा की गई है और फ्रोजन कंटेनरों वाली ये ट्रेन कृषि उत्पादों के परिवहन और विपणन में एक बड़ा कदम साबित होगी।


सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और योजना राज्यमंत्री (स्वंतत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने आरएंडडी के दोहराव से बचने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ऐसी फसलें विकसित करने का आह्वान किया जो कम पानी में विकसित हो सकें।


सभा को संबोधित करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री श्री पुरुषोत्तम रूपाला ने लक्षित कृषि सब्सिडी और ग्रामीण योजनाओं के लिए डिजिटलीकरण को बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने आईसीएआर आरएंडडी एक्सटेंशन कार्यक्रम के साथ पीपीपी मॉडल को बढ़ाने पर भी बल दिया। श्री रूपाला ने कहा कि वास्तविक आरएंडडी में अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है क्योंकि आईसीएआर बजट का कम से कम 70 प्रतिशत हिस्सा वेतन और भत्ते देने में जाता है।


किसानों की आय बढ़ाने के लिए अधिक खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का आह्वान करते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री श्री प्रताप चंद्र सारंगी ने कहा कि कृषि प्रयोगशालाओं को छात्रों और किसानों सहित सभी संबंधित लोगों की भागीदारी के साथ जन संपत्ति बनाया जाना चाहिए।


भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की भूमिका को रेखांकित करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री श्री कैलाश चौधरी ने किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ठोस प्रयास उठाने का आह्वान किया।


कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और आईसीएआर महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने इस संगठन की गतिविधियों के बारे में संक्षेप में बताया। पिछले एक वर्ष में नई फसलों की 229 किस्में जारी की गई हैं जिनमें 189 जलवायु के प्रति अनुकूल फसलें शामिल हैं।


इस अवसर पर श्री तोमर और अन्य गणमान्य लोगों ने आईसीएआर प्रकाशन और आईसीएआर द्वारा विकसित विभिन्न किट और मोबाइल एप भी जारी किए।



भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र ने समुद्र आधारित उपयोगकर्ताओं के लिए तीन नए उत्पाद जारी किए

हैदराबाद स्थित भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) ने अपने विविध उपयोगकर्ताओं की सुविधा के लिए तीन नए उत्पाद जारी किए हैं। आईएनसीओआईएस समुद्री क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं के लिए कई निःशुल्क सेवाएं प्रदान करता है। ये संस्थान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है। भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र अपने विविध उपयोगकर्ता समुदाय से विशिष्ट सेवाओं के लिए मिले अनुरोधों को वरीयता देता है। इस समुदाय में मछुआरों से लेकर अपतटीय तेल अन्वेषण उद्योग तक शामिल हैं।


इन नए उत्पादों में से एक है 'लघु पोत एडवाइज़री और पूर्वानुमान सेवा प्रणाली' (स्मॉल वेसल एडवाइज़री एंड फोरकास्ट सर्विसेज़ सिस्टम - एसवीएएस)। इसे कई छोटे समुद्री जहाजों, विशेष रूप से मछली पकड़ने वाले जहाजों के परिचालन में सुधार के लिए लाया गया है जो भारत के तटीय जल में विचरण करते हैं। इस दौरान 'स्वेल सर्ज फोरकास्ट सिस्टम' भी लॉन्च किया गया जो भारत की विशाल तटरेखा के पास बसी आबादी के लिए पूर्वानुमान प्रदान करेगा, जो उन लहरों के उफान के चलते कई तरह के नुकसान का सामना करती है। ये लहरें सुदुर दक्षिणी हिंद महासागर से उत्पन्न होती हैं।इन तीन उत्पादों में आखिरी है ‘एलगल ब्लूम इनफॉर्मेशन सर्विस’ (एबीआईएस) जो ऐसी हानिकारक काई यानी शैवालों के खिलने के समय को लेकर जानकारी प्रदान करता है जो तटीय मत्स्य पालन के लिए हानिकारक है और समय-समय पर तटीय आबादी के बीच सांस संबंधी समस्याओं को जन्म देते हैं।


ये तीनों उत्पाद तटीय आबादी और सेवा / उत्पाद उपयोगकर्ताओं के लिए नुकसान को महत्वपूर्ण ढंग से कम करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। प्रत्येक उत्पाद का विवरण निम्नलिखित हैं:


लघु पोत एडवाइज़री और पूर्वानुमान सेवा प्रणाली (एसवीएएस): लघु पोत एडवाइज़री और पूर्वानुमान सेवा प्रणाली दरअसल भारतीय तटीय जल में काम करने वाले छोटे जहाजों के लिए एक नवीन प्रभाव-आधारित सलाह और पूर्वानुमान सेवा प्रणाली है। ये प्रणाली उपयोगकर्ताओं को दस दिन पहले ही उन संभावित क्षेत्रों के बारे में चेतावनी देती है जहां जहाज पलट सकता है। ये एडवाइज़री 7 मीटर तक की चौड़ाई वाली बीम के छोटे जहाजों के लिए वैध होती है। यह सीमा भारत के सभी 9 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपयोग किए जाने वाले मछली पकड़ने के जहाजों की बीम चौड़ाई की पूरी श्रंखला को कवर करती है। ये चेतावनी प्रणाली 'बोट सेफ्टी इंडेक्स’ (बीएसआई) पर आधारित है जो लहर मॉडल के पूर्वानुमानों से प्राप्त होती है जैसे कि बड़ी ऊंचाई वाली लहर, लहर की ढलान, दिशात्मक प्रसार और समुद्र में हवा का तेजी से विकास जो नाव-विशिष्ट है।


स्वेल सर्ज फोरकास्ट सिस्टम: स्वेल सर्ज फोरकास्ट सिस्टम एक नवीन प्रणाली है जो कल्लकाडल यानी महातरंग उमड़ने (स्वेल सर्ज) की भविष्यवाणी के लिए तैयार की गई है जो भारतीय तट और विशेष रूप से पश्चिमी तट के पास होती है। कल्लकाडल / महातरंग उमड़ना दरअसल एकदम से बाढ़ आने की घटना होती है जो स्थानीय हवाओं या तटीय वातावरण में किसी उल्लेखनीय अग्रिम बदलाव के बिना या फिर तटीय वातावरण में किसी भी अन्य स्पष्ट संकेत के बिना होती हैं। इसलिए स्थानीय आबादी इन बाढ़ की घटनाओं से तब तक पूरी तरह अनजान रहती है जब तक कि वे वास्तव में नहीं हो जाती हैं। इस तरह की घटनाएं पूरे साल रुक-रुक कर होती हैं। कल्लकाडल एक स्थानीय बोलचाल की भाषा है जिसका इस्तेमाल केरल के मछुआरों ने भयंकर बाढ़ के प्रकरणों को संदर्भित करने के लिए किया था और 2012 में यूनेस्को ने औपचारिक रूप से इस शब्द को वैज्ञानिक उपयोग के लिए स्वीकार किया था। कल्लकाडल की घटनाओं के दौरान समुद्र भूमि क्षेत्र में प्रवेश कर लेता है और विशाल क्षेत्रों को जलमग्न कर देता है। इन घटनाओं ने विशेष रूप से हिंद महासागर में 2004 में आई सुनामी के बाद ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि ज्यादातर लोग कल्लकाडल को सुनामी मानने की गलती करते हैं। सुनामी और कल्लकाडल / महातरंग उमड़ना दरअसल दो अलग-अलग प्रकार की लहरें होती हैं जिनके कारण और काम करने के तंत्र पूरी तरह से अलग होते हैं। कल्लकाडल 30 ° S के दक्षिण में दक्षिणी महासागर में मौसम की स्थितियों के कारण होता है। भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र के वैज्ञानिकों के एक अध्ययन से पता चला है कि दक्षिणी हिंद महासागर में विशिष्ट मौसम संबंधी परिस्थितियां लंबी अवधि की महातरंगों (स्वेल) के निर्माण में सहयोग करती हैं। एक बार उत्पन्न होने के बाद ये महातरंगें उत्तर की ओर यात्रा करती हैं और 3-5 दिनों के समय में भारतीय तटों तक पहुंचती हैं, जिससे तटीय क्षेत्रों में बाढ़ आती है। यह प्रणाली अब कल्लकाडल की भविष्यवाणी करेगी और संबंधित अधिकारियों को कम से कम 2-3 दिन पहले चेतावनी दी जाएगी, जो स्थानीय अधिकारियों को आपात योजनाएं बनाने और नुकसान को कम करने में मदद करेंगी।


एलगल ब्लूम इनफॉर्मेशन सर्विस (एबीआईएस): काई या शैवालों के खिलने की बढ़ती आवृत्ति मत्स्य, समुद्री जीवन और पानी की गुणवत्ता पर इसके दुष्प्रभाव के कारण एक प्रमुख चिंता का विषय है। भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र ने "भारतीय समुद्र में शैवाल का पता लगाने और निगरानी" के लिए एक सेवा विकसित की है। इसके लक्षित उपयोगकर्ता मछुआरे, समुद्री मत्स्य संसाधन प्रबंधक, शोधकर्ता, पारिस्थितिकी विज्ञानी और पर्यावरणविद् हैं। यह सेवा भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र की समुद्री मछली पकड़ने की सलाह यानि संभावित फिशिंग ज़ोन की एडवाइज़री में इजाफा करती है। आईएनसीओआईएस-एबीआईएस उत्तरी हिंद महासागर के ऊपर पादक प्लवकों (फाइटोप्लांक्टन) के फैलाव और इस स्थानिक-लौकिक घटना को लेकर करीब करीब उसी समय में सीधे जानकारी प्रदान करेगा। तदनुसार उपग्रहों से प्राप्त होने वाले प्रासंगिक आंकड़ों को रोज़ाना एबीआईएस के माध्यम से प्रसारित किया जाएगा। इन आंकड़ों में समुद्र की सतह का तापमान, क्लोरोफिल-ए, एलगल ब्लूम इंडेक्स - क्लोरोफिल, रोलिंग क्लोरोफिल में विसंगति, रोलिंग समुद्री सतह के तापमान में विसंगति, फाइटोप्लांक्टन वर्ग / प्रजाति, फाइटोप्लांक्टन आकार वर्ग और ब्लूम व ग़ैर-ब्लूम क्षेत्रों को अलग अलग बताने वाली एक संयुक्त तस्वीर शामिल है। इसके अलावा चार क्षेत्रों की पहचान ब्लूम हॉटस्पॉट्स के रूप में की गई है। ये क्षेत्र हैं - 1) उत्तर पूर्वी अरब सागर, 2) केरल का तटीय जल, 3) मन्नार की खाड़ी, और4) गोपालपुर का तटीय जल।



यू0पी0जर्नलिस्ट एसोसिएशन की ब्लॉक बाजार शुकुल की कार्य कारणी गठित।




तहसील अध्यक्ष उपजा प्रदीप सिंह की अध्यक्षता में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 27 फरवरी  2020 दिन गुरुवार को बाजार शुकुल ब्लाक में सम्मानित पत्रकार साथियों की एक बैठक की गयी।जिसमें सर्वसम्मति से ब्लाक अध्यक्ष सरजू प्रसाद तिवारी, उपाध्यक्ष विक्रम भदौरिया ,महा मंत्री रामफेर यादव ,तथा राजेश कुमार पाल को कोषाध्यक्ष सदस्य महफ़ूज अहमद, सुरजीत यादव को मनोनीत किया गया। कार्यकारिणी के गठन पर उपजा के प्रदेश अध्यक्ष रतन दिक्षित ने दूरभाष पर सभी को बधाई दी है।इस अवसर पर उपजा के प्रदेश कार्य कारिणी सदस्य पवन कुमार तिवारी तहसील उपाध्यक्ष विजय कुमार सिंह, तहसील महा मंत्री कुमैल रिजबी,व कोषाध्यक्ष समर बहादुर सिंह मौजूद रहे। उपस्थित सभी पत्रकार साथियों ने नव निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई दी है। 


 

 



 

ठेका सफाई कर्मचारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं :- सलविंदर विराट

दैनिक अयोध्या टाइम्स संवाददाता, रामपुर-उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के बैनर तले नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। जिसमें ठेका सफाई कर्मचारियों के 2 माह के वेतन ना मिलने पर नाराजगी जताई। शीघ्र ही वेतन देने की मांग की। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के वरिष्ठ नेता सलविंदर विराट ने इस मौके पर कहा एक फर्जी कंपनी ने नगर पालिका परिषद रामपुर में सफाई कर्मियों की फर्जी भर्ती कर हर व्यक्ति से पांच ₹500 की फर्जी रसीदें काटती है।और यह लोग दो माह से कड़ी मेहनत के साथ सफाई का कार्य कर रहे हैं। लेकिन इन्हें वेतन नहीं मिल रहा है। जिसका जिम्मेदार पालिका प्रशासन है।वरिष्ठ नेता सलविंदर विराट ने कहा कि नगर पालिका परिषद जल्द से जल्द ऐसी कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। और 2 माह से लंबित वेतन देने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में सलविंदर विराट, राजीव शर्मा, महफूज अहमद,अर्जुन वाल्मीकि, नीरज गर्ग, आदि लोग उपस्थित रहे।

Thursday, February 27, 2020

स्वीडन के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग का दौरा किया

 स्वीडन की संसद रिक्सदग में संविधान समिति के दस सदस्यीय सांसद प्रतिनिधिमंडल ने आज निर्वाचन आयोग का दौरा किया। रिक्सदग में संविधान समिति की अध्‍यक्ष और सांसद सुश्री करिन एनस्ट्रोम के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल के साथ दो संसदीय अधिकारी और नई दिल्ली में स्वीडन दूतावास के दो राजनयिक भी थे।  प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा और चुनाव आयुक्तों श्री अशोक लवासा और श्री सुशील चंद्रा से मुलाकात की।


मुख्य चुनाव आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा ने स्वीडन के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। अपने संबोधन में  उन्होंने कहा कि आयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी, शांतिपूर्ण, समावेशी, सुलभ, नैतिक और सहभागी चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत में हुए पिछले राष्ट्रीय चुनावों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के आधुनिक साधनों का उपयोग करते हुए  पिछले लोकसभा चनावों और हाल ही में संपन्‍न राज्‍य विधान सभा चुनावों में चुनावी  प्रक्रिया को बाधामुक्‍त और मतदाताओं के अनुकूल बनाने के लिए कई नवीन उपाय किए गए। उन्होंने कहा कि दिव्‍यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मतदान को सुलभ करने पर विशेष ध्यान दिया गया था। श्री अरोड़ा ने मेहमान सांसदों और अधिकारियों को चुनाव आयोग के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी दी। इसमें नई दिल्ली में भारत ए-वेब (एसोसिएशन ऑफ वर्ल्ड इलेक्शन बॉडीज) सेंटर की स्थापना शामिल है जहां 115 सदस्यीय संघ के साथ बेहतर कार्यप्रणाली साझा करने और उसकी क्षमता निर्माण के उद्देश्‍य से प्रलेखन, अनुसंधान और प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्‍होंने कहा कि चुनाव आयोग भविष्‍य में स्‍वीडन चुनाव प्राधिकरण के साथ काम करने को उत्‍सुक है।


चुनाव आयुक्त श्री अशोक लवासा  ने कहा कि आयोग ने लोकतंत्र की प्रगति को फैलाने के लिए कई कदम उठाए हैं। चुनाव आयुक्त श्री सुशील चंद्रा  ने प्रतिनिधिमंडल को चुनाव में धनशक्ति के उपयोग को रोकने के लिए आयोग द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी।


रिक्सदग में संविधान समिति की अध्यक्ष और सांसद सुश्री करिन एनस्ट्रोम ने स्वीडन के प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी के साथ स्वागत करने के लिए आयोग का धन्यवाद किया। उन्होंने स्वीडन की चुनावी प्रणाली के बारे में बताया, जहां एक साथ नगरपालिका, काउंटी और राष्ट्रीय चुनाव कराए जाते हैं। सुश्री एनस्ट्रॉम ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल भारतीय चुनावों के परिमाण  और इसे संपन्‍न कराने के चुनाव आयोग के तरीकों से प्रभावित है।


चुनाव आयोग के महासचिव श्री उमेश सिन्हा ने विश्‍व में सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रिया के  प्रबंधन की संरचना और कामकाज के बारे में एक प्रस्तुति दी। स्वीडन के प्रतिनिधिमंडल के लिए संसदीय चुनाव-2019 पर एक लघु फिल्म भी दिखाई गई।



पूर्वोत्तर दीर्घकालिक विकास लक्ष्य सम्मेलन 2020 – दूसरा दिन

पूर्वोत्तर दीर्घकालिक विकास लक्ष्य (एसडीजी) सम्मेलन - 2020 गुवाहाटी में चल रहा है। सम्मेलन के दूसरे दिन चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिसमें सभी 8 पूर्वोत्तर राज्यों की सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ केन्द्र सरकार के अधिकारी, शिक्षाविद, नागरिक समाज संगठनों, विचारकों और वित्तीय संस्थानों की सक्रिय भागीदारी देखी गई।


पूर्वोत्तर क्षेत्र में एसडीजी : स्थानीयकरण और उपलब्धि के मार्ग पर आयोजित पहले सत्र की अध्यक्षता असम सरकार के पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय में सचिव डॉ. इंद्रजीत सिंह ने की। मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव और अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी सत्र में दल के सदस्य थे। देश में एसडीजी के स्थानीयकरण की मौजूदा वास्तविकता की पृष्ठभूमि में, पूर्वोत्तर राज्य के प्रयासों और उपलब्धियों को सामने रखा गया। सत्र एसडीजी और संबंधित लक्ष्यों को पूर्वोत्तर क्षेत्र के संदर्भ में प्राप्त करने के संबंध में भविष्य की कार्य योजना के साझा परिप्रेक्ष्य के साथ सम्पन्न हुआ।


ड्राइवर्स ऑफ इकोनॉमिक प्रॉस्पेरिटी एंड सस्टेनेबल लाइवलीहुड विषय पर दूसरा सत्र असम सरकार में अपर सचिव, वित्त श्री राजीव बोरा की अध्यक्षता में हुआ। इसमें केन्द्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ-साथ शिक्षाविद, वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हुए।


इस सत्र में एमएसएमई, कृषि-प्रसंस्करण और हस्तशिल्प क्षेत्रों की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया ताकि एक्ट ईस्ट पॉलिसी में व्यक्त भारत की निर्यात महत्वाकांक्षाओं के साथ रखा जा सके।


जलवायु अनुकूल कृषि विषय पर तीसरे सत्र की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने की। इस सत्र में उच्च-गौण-इनपुट-कृषि और दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता के पर्यावरणीय प्रभाव की चुनौतियों को सामने लाया गया। जलवायु अनुकूल कृषि में प्रौद्योगिकी आधारित हस्तक्षेपों का विश्लेषण इस क्षेत्र में इनकी व्यापक अनुकूलनशीलता या प्रतिरूपात्मकता का मूल्यांकन करने के लिए किया गया था। व्यवहार्य संभावनाओं का पता लगाने के लिए ज्ञान के विकास, क्षमता निर्माण और संस्थागत भागीदारी की संभावनाओं का मूल्यांकन किया गया।


पोषण सुरक्षा और स्वास्थ्य तथा सभी के कल्याण विषय पर पहले दिन के अंतिम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने की। इस सत्र में क्षेत्र में स्वास्थ्य की स्थिति और विभिन्न कमजोर समूहों, जैसे महिलाओं और बच्चों, दिव्यांग और एचआईवी / एड्स के पीड़ितों के साथ रहने वाले लोगों के सामने आने वाले मुद्दों की विस्तार से जानकारी ली गई। डॉ. वी. के. पॉल ने राज्यों से एक मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करने और निजी क्षेत्र को माध्यमिक और तृतीय देखभाल में शामिल करने की रणनीतियों की पहचान करने का आग्रह किया।


पूर्वोत्तर दीर्घकालिक विकास लक्ष्य (एसडीजी) सम्मेलन - 2020 के तीसरे दिन 'शिक्षा, कौशल, विकास और उद्यमिता', 'संचार सम्पर्क और बुनियादी ढांचा विकास, 'पूर्वोत्तर में असमानता और बहिष्कार का समाधान' तथा अंतिम सत्र ‘वे फॉरवर्ड एंड वेलेडिक्टरी’ विषयों पर तकनीकी सत्र होंगे।   


पूर्वोत्तर दीर्घकालिक विकास लक्ष्य (एसडीजी) सम्मेलन - 2020 की शुरुआत 24 फरवरी, 2020 को गुवाहाटी स्थित असम प्रशासनिक स्टॉफ कॉलेज में हुई। तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन नीति आयोग ने पूर्वोत्तर परिषद, असम सरकार और टाटा ट्रस्ट के सहयोग से किया है। सम्मेलन को यूएनडीपी और आरआईएस का समर्थन प्राप्त है।


नीति आयोग को राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर एसडीजी को अपनाने और उसकी निगरानी करने  का अधिकार प्राप्त है। 2030 तक एसडीजी हासिल करने के लिए इस दशक की कार्रवाई में पूर्वोत्तर क्षेत्र की प्रगति महत्वपूर्ण है और यह सम्मेलन नीति आयोग के उप-राष्ट्रीय स्तर पर साझेदारी को बढ़ावा देने के लगातार किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। एसडीजी स्थानीयकरण के संदर्भ में, क्षेत्र के राज्यों ने अपनी विकास योजना और दृष्टि दस्तावेजों में एजेंडा 2030 रूप-रेखा को जोड़ने में काफी प्रगति की है।



श्री गंगवार ने काकीनाड़ा, आंध्र प्रदेश में 100 बिस्तरों वाले ईएसआई अस्पताल की आधारशिला रखी

श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संतोष कुमार गंगवार ने आज (26 फरवरी, 2020) काकीनाड़ा, आंध्र प्रदेश में 100 बिस्तरों वाले ईएसआई अस्पताल की आधारशिला रखी। आंध्र प्रदेश के श्रम और रोजगार, प्रशिक्षण और फैक्ट्री मंत्री श्री घुमानूर जयराम इस समारोह में मुख्य अतिथि थे। समारोह की अध्यक्षता काकीनाड़ा से सांसद श्रीमती वंगा गीता ने की।


इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के उप-मुख्य मंत्री और राजस्व, स्टैम्प और पंजीकरण मंत्री श्री पिल्ली सुभाष चंद्र बोस, सामाजिक कल्याण मंत्री श्री पीनिपी विश्वरूप, कृषि और सहकारी विपणन खाद्य प्रसंस्करण मंत्री कुरुसाला कन्नाबाबू, काकीनाड़ा नगर निगम की महापौर श्रीमती सुंकारा पावणि, विधान पार्षद श्री चिक्काला रामचंद्र राव, काकीनाड़ा के विधायक श्री द्वरमपुद्दी चंद्रशेखर रेड्डी और ईएसआईसी के चिकित्सा आयुक्त डॉ. आर. के. कटारिया मौजूद थे।


समारोह के दौरान श्री गंगवार ने भारत के कामगारों की बेहतर देख-रेख और सेवाएं प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा की गई विभिन्न पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईएसआई योजना के तहत योगदान की दरें कम की गई हैं और अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना लागू की गई है।


श्री घुमानूर जयराम ने केन्द्र सरकार को धन्यवाद दिया और आगामी अस्पताल को चलाने में राज्य सरकार का पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। इस दौरान उपस्थित अन्य प्रमुख व्यक्तियों ने केन्द्र सरकार के प्रयासों को स्वीकार किया और राज्य सरकार के सहयोग का आश्वासन दिया। इस परियोजना के दो वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है। ईएसआईसी के इस अस्पताल के बन जाने के बाद इसे चलाने के लिए राज्य सरकार को सौंप दिया जाएगा।


काकीनाड़ा, आंध्र प्रदेश में ईएसआई अस्पताल


काकीनाड़ा में ईसआई का 100 बिस्तरों वाले अस्पताल का निर्माण सात एकड़ क्षेत्र में किया जाएगा, जिसके आस-पास पूरी तरह हरियाली होगी और इसके निर्माण पर 101.54 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। अस्पताल ग्राउंड + दो स्तरों पर बनाया जाएगा, जिसमें रिहाइशी परिसर शामिल होगा। अस्पताल में सभी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं जैसे, ओपीडी, वार्ड, प्रयोगशालाएं और आपात सुविधा उपलब्ध होगी। यह अस्पताल काकीनाड़ा और यनम की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। यहां इस समय 65 हजार आईपी और 2 लाख से अधिक लाभान्वित हैं।


आंध्र प्रदेश में ईएसआई योजना


आंध्र प्रदेश में 09-10-1955 को आरंभ में 4 केन्द्रों यानी विजयवाड़ा, गुंटूर, येल्लूरू और विशाखापत्तनम के साथ केन्द्रवार ईएसआई योजना लागू की गई थी। इस योजना का धीरे-धीरे 136 केन्द्रों तक विस्तार किया गया। इस समय यह योजना आंध्र प्रदेश के 663 मंडलों में लागू है, जहां 42,880 कर्मचारी, 12,90,051 आईपी और 43,39,208 लाभान्वित हैं। आंध्र प्रदेश में ईएसआई योजना का एक क्षेत्रीय कार्यालय, दो उप क्षेत्रीय कार्यालयों और 22 शाखा कार्यालयों में प्रबंध किया गया था। लाभान्वितों को चिकित्सा सेवाएं 4 ईएसआईएस अस्पतालों, 3 डायग्नॉस्टिक केन्द्रों, 78 ईएसआईएस डिस्पेंसरियों, 79 पैनल क्लीनकों और 34 केन्द्रों में मोबाइल औषधालयों के जरिये प्रदान की जा रही है।


द्वितीय स्तर और सुपर स्पेशलिटी इलाज करने के लिए सभी जिलों और महत्वपूर्ण केन्द्रों में 38 निजी अस्पतालों के साथ अनुबंध किया गया है।


भारत में ईएसआई योजना


कर्मचारी राज्य बीमा निगम एक अग्रणी सामाजिक सुरक्षा संगठन है, जो किफायती चिकित्सा देखभाल जैसे व्यापक सामाजिक सुरक्षा लाभ और कर्मचारी के चोट लगने, बीमार होने और मृत्यु जैसी जरूरतों के समय नकदी लाभ प्रदान करता है। ईएसआई कानून उन परिसरों/संस्थानों में लागू है, जहां 10 या अधिक कर्मचारी काम करते हैं। जिन कर्मचारियों को एक महीने में 21 हजार रूपये तक वेतन मिलता है, ईएसआई कानून के अंतर्गत वह स्वास्थ्य बीमा कवर और अन्य लाभों को प्राप्त करने के हकदार हैं। यह कानून देश भर की 10.33 लाख फैक्ट्रियों और प्रतिष्ठानों पर लागू होता है, जिससे कर्मचारियों की 3.43 करोड़ पारिवारिक इकाईयां लाभ ले रही हैं। इस समय ईएसआई योजना से लाभ लेने वाली कुल आबादी 13.32 करोड़ है। 1952 में अपने अस्तित्व में आने के बाद से ईएसआई निगम अब तक 154 अस्पताल, 1500/148 डिस्पेंसरियां/आईएसएम इकाईयां, 815 शाखा/भुगतान कार्यालय और 63 क्षेत्रीय और उप क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित कर चुका है।



अप्रैल, 2020 में राज्‍य सभा से सेवानिवृत्‍त होने वाले 55 सांसदों की रिक्‍त सीटों को भरने के लिए द्विवार्षिक चुनाव

17 राज्‍यों से निर्वाचित राज्‍य सभा के 55 सदस्‍यों या सांसदों का कार्यकाल अप्रैल 2020 में सेवानिवृत्‍त होने पर समाप्‍त हो जाएगा जिनका विवरण नीचे दिया गया है:


  




































































































क्र. सं.



राज्‍य



सीटों की संख्‍या



सेवानिवृत्ति की तिथि




  1.  



महाराष्‍ट्र



7



02.04.2020


 




  1.  



ओडिशा



4




  1.  



तमिलनाडु



6




  1.  



पश्चिम बंगाल



5




  1.  



आंध्र प्रदेश



4



09.04.2020


 




  1.  



तेलंगाना



2




  1.  



असम



3




  1.  



बिहार



5




  1.  



छत्तीसगढ़



2




  1.  



गुजरात



4




  1.  



हरियाणा



2




  1.  



हिमाचल प्रदेश



1




  1.  



झारखंड



2




  1.  



मध्‍य प्रदेश



3




  1.  



मणिपुर



1




  1.  



राजस्‍थान



3




  1.  



मेघालय



1



12.04.2020



 


उपर्युक्‍त रिक्तियों का विवरण अंग्रेजी में ‘अनुलग्‍नक-ए’ (हाइपरलिंक) में दिया गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने निर्णय लिया है कि राज्‍य सभा के लिए उपर्युक्‍त द्विवार्षिक चुनाव निम्‍नलिखित कार्यक्रम के अनुसार होंगे:



















































क्रसं.



कार्यक्रम



तिथियां



 



अधिसूचना जारी करना



06 मार्च, 2020 (शुक्रवार)



 



नामांकन दाखिल करने  की अंतिम तिथि



13 मार्च, 2020 (शुक्रवार)



 



नामांकनों की जांच



16 मार्च, 2020 (सोमवार)



 



उम्‍मीदवारी वापस लेने की अंतिम तिथि



18  मार्च, 2020 (बुधवार)



 



मतदान की तिथि



26 मार्च, 2020  (बृहस्‍पतिवार)



 



मतदान का समय



प्रात: 09:00 बजे से सायं 04:00 बजे तक



 



मतगणना



26 मार्च, 2020 (बृहस्‍पतिवार) को सायं 05:00 बजे से



 



जिस तिथि से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी हो जाएगी



30 मार्च, 2020 (सोमवार)



निर्वाचन आयोग ने यह निर्देश दिया है कि मतपत्र पर वरीयता अंकित करने के लिए निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) द्वारा उपलब्‍ध कराए गए पूर्व-निर्धारित विनिर्देश वाले केवल एकीकृत वायलेट कलर स्केच पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा। किसी भी परिस्थिति में उपर्युक्‍त चुनावों में किसी भी अन्‍य पेन का इस्‍तेमाल नहीं किया जाएगा।


स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। निर्वाचन प्रक्रिया पर करीबी नजर रखने के लिए पर्यवेक्षकों द्वारा पर्याप्‍त उपाय किए जाएंगे।


अमेरिका के राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रंप की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का प्रेस वक्तव्य

मेरे मित्र और अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump,


अमेरिकी delegation के सम्मानित सदस्य गण,


Ladies and gentlemen,


नमस्कार।


राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके डेलीगेशन का भारत में एक बार फिर हार्दिक स्वागत है। मुझे विशेष ख़ुशी है की इस यात्रा पर वो अपने परिवार के साथ आए हैं। पिछले आठ महीनों में राष्ट्रपति Trump और मेरे बीच ये पाँचवी मुलाक़ात है।


कल मोटेरा में राष्ट्रपति Trump का unprecedented और historical welcome हमेशा याद रखा जाएगा। कल ये फिर से स्पष्ट हुआ कि अमेरिका और भारत के संबद्ध सिर्फ दो सरकारों के बीच नहीं हैं, बल्कि people-driven हैं, people-centric हैं। यह संबंध, 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण पार्टनरशिप्स में है। और इसलिए आज राष्ट्रपति Trump और मैंने हमारे संबंधों को Comprehensive Global Strategic Partnership के स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया है। संबंधों को इस मुकाम तक लाने में राष्ट्रपति Trump का अमूल्य योगदान रहा है।


Friends,


आज हमारी चर्चा में हमने इस partnership के हर अहम पहलू पर सकारात्मक विचार किया - चाहे वो defence and security हो, एनर्जी में strategic partnership हो, टेक्नॉलजी cooperation हो, global connectivity हो, ट्रेड relations हों या फिर people to people ties । भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता रक्षा और सुरक्षा सहयोग हमारी strategic partnership का एक बहुत अहम हिस्सा है। अत्याधुनिक रक्षा उपकरण व platforms पर सहयोग से भारत की डिफेन्स क्षमता में बढ़ोतरी हुई है। हमारे defence manufacturers एक दूसरे की supply chains का हिस्सा बन रहे हैं। भारतीय forces आज सबसे अधिक ट्रेनिंग exercises US की forces के साथ कर रही हैं। पिछले कुछ सालों में, हमारी सेनाओं के बीच interoperability में unprecedented वृद्धि हुई है।


Friends ,


इसी तरह हम अपने homelands की सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय अपराध से लड़ने के लिए भी सहयोग बढ़ा रहे हैं। आज homeland security पर हुए निर्णय से इस सहयोग को और बल मिलेगा। आतंक के समर्थकों को जिम्मेदार ठहराने के लिए आज हमने अपने प्रयासों को और बढ़ाने का निश्चय किया है। President Trump ने ड्रग्स और opioid crisis से लड़ाई को प्राथमिकता दी है। आज हमारे बीच Drug trafficking, narco–terrorism और organized crime जैसी गम्भीर समस्याओं के बारे में एक नए mechanism पर भी सहमति हुई है।


Friends ,


कुछ ही समय पहले स्थापित हमारी Strategic Energy Partnership सुदृढ़ होती जा रही है। और इस क्षेत्र में आपसी निवेश बढ़ा है। तेल और गैस के लिए अमेरिका भारत का एक बहुत महत्वपूर्ण स्त्रोत बन गया है। पिछले चार वर्षों में हमारा कुल energy व्यापार करीब 20 बिलियन डॉलर रहा है। Renewables हो या न्यूक्लियर energy, हमारे cooperation को नई ऊर्जा मिल रही है।


Friends,


इसी तरह, Industry 4.0 और 21st Century की अन्य उभरती टेक्नालजीज़ पर भी इंडिया-US partnership, innovation और enterprise के नए मुक़ाम स्थापित कर रही है। भारतीय professionals के टैलेंट ने अमेरिकी companies की टेक्नॉलजी leadership को मजबूत किया है।


Friends,


भारत और अमरीका आर्थिक क्षेत्र में openness औऱ Fair and Balanced trade के लिए प्रतिबद्ध हैं। पिछले तीन वर्षों में हमारे द्विपक्षीय व्यापार में double-digit growth हुई है, और वह ज्यादा संतुलित भी हुआ है। अगर energy, civil aircrafts, defence, और higher Education लें तो पिछले चार-पांच सालों में सिर्फ इन चार sectors ने ही भारत-अमेरिका के आर्थिक संबंधों में लगभग 70 बिलियन डॉलर्स का योगदान किया है। इसमें से काफी कुछ राष्ट्रपति Trump की नीतियों और फैसलों के कारण संभव हुआ है। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में ये आंकड़ा काफी बढ़ जाएगा। जहां तक bilateral trade का सवाल है, हमारे Commerce Ministers के बीच सकारात्मक वार्ताएँ हुई हैं । राष्ट्रपति ट्रंप और मैं सहमत हैं कि हमारे Commerce Ministers के बीच जो understanding बनी है उसे हमारी teams legal रूप दें। हम एक बड़ी trade deal के लिए negotiation शुरू करने पर भी सहमत हुए है। हमें आशा है कि आपसी हित में इसके अच्छे परिणाम निकलेंगे।


Friends,


वैश्विक स्तर पर भारत और अमरीका का सहयोग हमारे समान लोकतांत्रिक मूल्यों और उद्देश्यों पर आधारित है। खासकर Indo-Pacific और global commons में rule based international order के लिए यह सहयोग विशेष महत्व रखता है। हम दोनों देश विश्व में connectivity infrastructure के विकास में sustainable and transparent financing के महत्व पर सहमत हैं। हमारा यह आपसी तालमेल एक दूसरे के ही नहीं, बल्कि विश्व के हित में है।


Friends ,


भारत और अमरीका की इस स्पेशल मित्रता की सबसे महत्वपूर्ण नींव हमारे people to people relations हैं। चाहे वो professionals हों या students, US में Indian Diaspora का इस में सबसे बड़ा योगदान रहा है। भारत के ये ambassadors ना सिर्फ़ अपने टैलेंट और परिश्रम से US की अर्थव्यवस्था में contribute कर रहे हैं। बल्कि अपने democratic वैल्यूज़ और समृद्ध culture से अमेरिकन society को भी enrich कर रहे हैं। मैने राष्ट्रपति ट्रंप से अनुरोध किया है कि हमारे professionals के social-security contribution पर totalisation agreement को दोनों पक्ष चर्चा आगे बढ़ाएं। ये आपसी हित में होगा।


Friends,


इन सभी आयामों में हमारे रिश्तों को और मज़बूत बनाने में राष्ट्रपति ट्रम्प की यात्रा ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। एक बार फिर, मैं President Trump को भारत आने के लिए, और भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए हार्दिक धन्यवाद देता हूँ।



डॉ.हर्षवर्धन ने नोवेल कोरोना वायरस से बचाव के उपायों और तैयारियों की समीक्षा की

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सोमवार को मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ देश में नोवेल कोरोना वायरस से निपटने के उपायों और तैयारियों की समीक्षा की।



डॉ हर्षवर्धन को इस बात से अवगत कराया गया कि वर्तमान में, देश के सभी 21 हवाई अड्डों, 12 बड़े और 65 छोटे बंदरगाहों तथा सीमाओं पर यात्रियों की जांच की जा रही है। अब तक सभी 4,214 उड़ानों और 4,48,449 विमान यात्रियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इसके अलावा  उन्‍हें विदेश मंत्रालय के हवाले से यह भी जानकारी दी गई कि वुहान से और भारतीय नागरिकों को लाने के लिए वायुसेना का विशेष विमान 26 फरवरी को भेजने की जाने की योजना है। यह वुहान से लोगों को लेकर 27 फरवरी को वापस आएगा। कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिए अब तक 2,707 नमूनों का परीक्षण किया गया, जिनमें से केवल 3 (केरल) लोगों के नतीजे ही पॉजीटिव रहे। उन्‍हें भी इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और अब वे घर पर हैं।


वुहान से लाए गए सभी भारतीय नागरिकों की जांच की गई और उनके नतीजे ने‍गेटिव रहे। इन सभी लोगों के लिए अलग व्‍यवस्‍था की गई थी पर अब इनको घर वापस भेज दिया गया है। 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 23,259 व्यक्तियों को एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) नेटवर्क के माध्यम से सामुदायिक निगरानी में रखा गया था।


डॉ हर्षवर्धन को जानकारी दी गई कि 22 फरवरी, 2020 को सिंगापुर की यात्रा के संबंध में संशोधित यात्रा परामर्श जारी किया गया है। पंजाब में करतारपुर सीमा पर श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए इस बारे में गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और पंजाब सरकार के स्वास्थ्य सचिव के साथ विचार-विमर्श के बाद पंजाब सीमा पर विशेष स्क्रीनिंग व्‍यवस्‍था को मजबूत किया गया है और श्रद्धालुओं के लिए मास्क पहनने की सुविधा शुरू की जा रही है।


स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री को यह भी बताया गया कि चीन के अलावा अन्य देशों में भी कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों को ध्यान में रखते हुए और 10 देशों से आने वाले यात्रियों के लिए भी स्क्रीनिंग शुरू की जा रही है और इस संबंध में विशेष स्वास्थ्य सचिव ने आज 21 हवाई अड्डों के स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों और संबंधित राज्‍यों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ एक वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के माध्‍यम से बात की। उन्‍हें यह भी सूचित किया गया कि वर्तमान में, चीन, हांगकांग, थाईलैंड, सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया से आने वाली उड़ानों के यात्रियों की स्क्रीनिंग के अलावा, वियतनाम, नेपाल, इंडोनेशिया और मलेशिया से आने वाली उड़ानों के यात्रियों के लिए भी 23 फरवरी, 2020 से स्‍क्रीनिंग की व्‍यवस्‍था की गई है। । स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के सचिव ने बताया कि दुनिया भर में नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण पर ताजा जानकारी पाने के लिए विदेशों में भारतीय दूतावासों के साथ लगातार करीबी संपर्क बनाए रखा गया है।


डॉ. हर्षवर्धन ने नोवेल कोरोना वायरस के प्रबंधन के लिए किए गए बेहतरीन प्रयासों के लिए राज्यों की सराहना की। उन्‍होंने इसके साथ ही यह भी कहा कि स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के सभी अपर सचिवों और वरिष्‍ठ अधिकारियों को राज्य निगरानी मशीनरी की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रतिनियुक्त किया जा सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र, राज्यों तथा इसके साथ विदेशों में भारतीय दूतावासों के साथ समन्वय में किए जा रहे विभिन्न एहतियाती उपायों को भी सराहा।




इस्पात मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक

इस्पात मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक आज नई दिल्ली में हुई। इस्पात और पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने ‘स्टील क्लस्टर डेवलपमेंट’ विषय पर बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में इस्पात राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते और सासंद श्री विजय बघेल, चंद्रप्रकाश चौधरी, जनार्दन सिंह सिगरीवाल, बिद्युत बरन महतो, सप्तगिरी संकर उलाका, अखिलेश प्रताप सिंह, सतीश चन्द्र दूबे और नरेन्द्र सिंह स्वैन ने भी हिस्सा लिया।

सदस्यों का स्वागत करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि इस्पात भारत के औद्योगिकी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे बुनियादी ढांचा, विनिर्माण और मोटर वाहन के लिए एक प्रमुख निविष्टि है। भारतीय इस्पात की क्षमता धीरे-धीरे बढ़कर 142 एमटीपीए हो गई है और देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक बन गया है। वर्ष 2024-25 तक इस्पात का कुल उपभोग करीब 160 एमटीपीए तक पहुंचने की उम्मीद है और सरकार इस्पात के घरेलू उत्पादन और उपभोग को बढ़ावा दे रही है। इस्पात के कुल उत्पादन में करीब 55 प्रतिशत योगदान गौण इस्पात उत्पादकों का है और यह मूल्य श्रृंखला में रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। श्री प्रधान ने कहा कि वैश्विक दृष्टि से इस्पात उद्योग क्लस्टर मॉडल में फल-फूल रहा है, क्योंकि ये इकाईयां प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार वैश्विक बैंच मार्क की तर्ज पर नए इस्पात समूहों के सृजन को बढ़ावा देने की इच्छुक है और वर्तमान समूहों को व्यवस्थित करके सही संस्थागत तंत्र स्थापित करना चाहती है। श्री प्रधान ने कहा कि इस्पात मंत्रालय ने भारत में इस्पात समूहों के विकास के लिए एक मसौदा नीति तैयार की है और यह इस्पात इकाईयों के सामने मौजूद वर्तमान चुनौतियों के समाधान में मदद करने और उनके विकास की संभावनाओं को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है। इस नीति में विभिन्न हितधारकों, विशेषकर राज्य सरकारों, उद्योग और जनता की भूमिका और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखा जाएगा।


बैठक में माननीय सांसदों ने इस्पात क्षेत्र विशेषकर समूह नीति के संबंध में अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए।



मंत्रिमंडल ने इंडिया पोर्ट्स ग्‍लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) को डीपीई दिशानिर्देशों में छूट देने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंडिया पोर्ट्स ग्‍लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) के लिए आरक्षण एवं सतर्कता नीतियों को छोड़कर डीपीई दिशानिर्देशों में छूट देने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी है।      


      आईपीजीएल की स्‍थापना ईरान में चाबहार के शाहिद बेहेस्‍ती बंदरगाह के विकास एवं प्रबंधन के लिए जहाजरानी मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) और दीनदयाल पोर्ट ट्रस्ट (डीपीटी) [पूर्व में कांडला पोर्ट ट्रस्ट (केपीटी)] के संयुक्त रूप से प्रवर्तित एक विशेष उद्देशीय कंपनी के रूप में कंपनी अधिनियम 2013 के तहत की गई थी।  


      व्‍यापक संयुक्त कार्य योजना (जेसीपीओए) से संयुक्त राज्य अमेरिका हटने के बाद विदेश मंत्रालय ने 29 अक्टूबर 2018 को जहाजरानी मंत्रालय को सलाह दी थी कि जेएनपीटी और डीपीटी को अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित प्रभाव से बाहर किया जाए।


      इसके आधार पर और अधिकार प्राप्त समिति के अनुमोदन के साथ जेएनपीटी एवं डीपीटी के सभी शेयरों की खरीदारी सागरमाला डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (एसडीसीएल) द्वारा 17 दिसंबर, 2018 को की गई थी। एसडीसीएल एक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (सीपीएसई) है और इसलिए एसडीसीएल की सहायक कंपनी के तौर पर आईपीजीएल भी सीपीएसई बन गई है। परिणामस्‍वरूप, डीपीई के दिशानिर्देश तकनीकी तौर पर आईपीजीएल पर लागू होते हैं।


      चूंकि चाबहार पोर्ट सामरिक उद्देश्यों के साथ देश की पहली विदेशी बंदरगाह परियोजना है। इसलिए आईपीजीएल को बोर्ड द्वारा प्रबंधित कंपनी के रूप में कार्य करने की अनुमति देने की तत्काल आवश्यकता है। जहाजरानी मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के निर्देशों का पालन करते हुए उस पर 5 वर्ष की अवधि के लिए डीपीई के दिशानिर्देश लागू नहीं होंगे। तदनुसार, जहाजरानी मंत्रालय ने परियोजना के सुचारू निष्पादन के लिए डीपीई दिशानिर्देशों की प्रयोज्यता से आईपीजीएल को छूट का अनुरोध किया है।



डीबीटी स्थापना दिवस समारोह 

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय का जैव प्रौद्योगिकी विभाग 26 फरवरी, 2020 को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी (एनआईआई) में अपना 34वां स्थापना दिवस मनाएगा।


विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन इस अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे और पुरस्कार प्रदान करेंगे। अपने अस्तित्व में आने के बाद विभाग ने देश भर में विभिन्न स्तरों पर विभिन्न अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संगठनों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं आदि में कार्यरत वैज्ञानिकों के योगदान को प्रोत्साहित करने और उसे पहचान प्रदान करने के लिए विभिन्न पुरस्कारों की शुरूआत की। डीबीटी द्वारा शुरू किए गए विभिन्न पुरस्कारों को अब समग्र रूप से डीबीटी ब्राइट (बायोटेक्नोलॉजी, रिसर्च इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी एक्सीलेंस पुरस्कार) के नाम से जाना जाता है। विभाग ने भारतीय विज्ञान को उल्लेखनीय योगदान देने वाले देश के कुछ ऐसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के सम्मान में कुछ पुरस्कारों को नया नाम दिया है, जो दुनिया भर में वैज्ञानिक समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं।


डीबीटी ब्राइट पुरस्कार में डीबीटी द्वारा दिए जाने वाले निम्नलिखित पुरस्कार शामिल हैं:-



  1. हर गोविंद खुराना – नवोन्मेष युवा जैव प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक पुरस्कार

  2. एस रामचंद्रन – करियर बनाने के लिए राष्ट्रीय जैव विज्ञान पुरस्कार

  3. जानकी अम्मल राष्ट्रीय महिला जैव वैज्ञानिक पुरस्कार

  4. टाटा नवोन्मेष फैलोशिप पुरस्कार

  5. जैव प्रौद्योगिकी सामाजिक विकास पुरस्कार


डीबीटी स्थापना दिवस व्याख्यान जाने-माने वैज्ञानिक, एल वी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट, हैदराबाद के अवकाश प्राप्त निदेशक पद्मश्री डॉ. डी. बालासुब्रमण्यम देंगे।


भारत में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र पिछले तीन दशकों में विकसित हुआ है और इसने विभिन्न क्षेत्रों विशेषकर स्वास्थ्य, कृषि आदि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सरकार और निजी क्षेत्र से काफी समर्थन मिलने के कारण जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र काफी तेजी से विकसित हुआ है और इसकी वार्षिक वृद्धि दर करीब 20 प्रतिशत है। भारत की गणना दुनिया के 12 शीर्ष जैव प्रौद्योगिकी स्थलों में होती है।