Posts

Showing posts from September, 2019

बुंदेलखंड के 2 लाख बुनकरों का जीवन संकट में, नहीं कोई निदान

Image
वे जो दूसरे की मर्यादा ढकते हैं  जन्म से मृत्यु तक कपड़ा चाहिए। मनुष्य की प्रथम व अंतिम आवश्यकता को पूरा करने वाले बुंदेलखंड के 2 लाख बुनकरों का जीवन संकट में है। जिस हथियार से गांधी जी ने अंग्रेजों से लोहा लिया तथा देश को एक सूत्र में बांधा देश की स्वदेशी तरीके से अर्थव्यवस्था को मजबूत किया, जिस हथियार से जाति, धर्म का भेद मिटाया। आज उस स्वावलंबी हथियार हथकरघा चरखा के चलाने वाले का जीवन संकट में है उसके चलाने वाले बुनकर आज अपनी मूलभूत जरूरते, जैसे रोटी, मकान, स्वास्थ्य, और शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं गांधी, विनोवा के अंतिम जन आजादी के 7 दशक के बाद भी अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रहे हैं यदि हमें हैंडलूम को बचाना है। तो गांव गांव में रहने वाले बुनकरों को सुरक्षित रखना होगा। निपुण बुनकरों से बुनकारी सीखने के लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा कृषि के बाद हथकरघा ही सबसे बड़ा क्षेत्र है जो सब को रोजगार दे सकता है पढ़ा, अनपढ़ बच्चे, वृद्ध, महिला, पुरुष एवं परिवार के सभी सदस्य एक ही घर में एक ही हथकरघा में कृषि के साथ काम कर सकते हैं और करते भी रहे हैं। इस उद्योग में अपार संभावना है आजादी के पहले

क्या है! एक्यूपंक्चर पद्धति, एक्यूपंक्चर बिंदुओं, एक्यूपंक्चर ट्रीटमेंट, एक्यूपंक्चर के फायदे, और एक्यूपंक्चर साइड इफेक्ट

एक्यूपंक्चर के फायदे और साइड इफेक्ट एक्यूपंक्चर । शरीर की विभिन्न बीमारियों को दूर करने के लिए कुछ लोग दवाओं की बजाय प्राकृतिक चिकित्सा का सहारा लेकर ठीक होना चाहते हैं। एक्यूपंक्चर बीमारियों को ठीक करने का एक ऐसा ही माध्यम है जिसमे शरीर के विभिन्न बिंदुओं में सुई चुभाकर दर्द से राहत दिलाई जाती है। इस आर्टिकल में हम आपको एक्यूपंक्चर पद्धति, एक्यूपंक्चर बिंदुओं, एक्यूपंक्चर ट्रीटमेंट, एक्यूपंक्चर के फायदे, और एक्यूपंक्चर साइड इफेक्ट के बारे में पूरी जानकारी देंगे। एक्यूपंक्चर क्या है? - एक्यूपंक्चर एक चिकित्सीय क्रिया  है जिसमें शरीर के कुछ विशेष प्वाइंट में सूई चुभाकर उन्हें उत्तेजित किया जाता है। सूई आमतौर पर त्वचा में डाली जाती है जो दर्द को कम करने एवं स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न बीमारियों के इलाज में उपयोग किया जाता है। माना जाता है कि एक्यूपंक्चर व्यक्ति के शरीर में ऊर्जा को संतुलित रखने का कार्य करता है और सिर दर्द, ब्लड प्रेशर, सर्दी जुकाम, खांसी और अन्य बीमारियों से व्यक्ति को दूर रखने में सहायक होता है। हजारों वर्ष पहले एक्यूपंक्चर का उपयोग सबसे पहले चीन में शुरू हुआ था लेकिन धी

नैनो फाइबर से बना फ्लोटिंग ब्रिक्स व हेयर कलर पढ़ें कैसे

Image
अब बिहारी का एक और नया आविष्कार अब पानी में तैरेगी ईंट बिहार । क्या आपने कभी सोचा कि  केले के थंब(तना) और उसके पत्ते से नेचुरल हेयर कलर बनाया जा सकता है. ऐसी  ईंट जो कभी पानी में डूबेगी नहीं. अगर नहीं तो मिलिए नवगछिया, ध्रुवगंज, भागलपुर के गोपाल से जिन्होंने ऐसा कमाल कर दिखाया है. महज 19 साल के गोपाल को 14 साल की उम्र में यंगेस्ट साइंटिस्ट ऑफ इंडिया के खिताब से नवाजा जा चुका है. इनका सपना भारत को अपने आविष्कारों से नोबल प्राइज दिलाना है. उन्हें अपने द्वारा बनाये गये गोपनिम एलॉय के लिए नासा(नेशनल एरोनाॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) की ओर से दो बार चिट्ठी भी भेजी गयी. नासा ने 23 मई को भी गोपाल के साथ काम करने के लिए चिट्ठी भेजी लेकिन उन्होंने यह कह कर मना कर दिया कि उन्हें सिर्फ अपने देश के लिए काम करना है. गोपाल बताते हैं कि उन्होंने कुल दस आ‌विष्कार किये हैं, जिसमें चार पेटेंट के लिए भेजे गये हैं. इनमें पेपर बेस्ड इलेक्ट्रिसिटी(पेटेंट), बनाना बायो सेल(पेटेंट), गोपनियम एलॉय, जी-स्टार पाउडर, हाइड्रोइलेक्ट्रिक बायो सेल, सोलर माइल, गोपा-अलासका, सूडो प्लास्टिक, लीची वाइन  आदि हैं.  प्रध

भारतीय दण्ड संहिता की महत्वपूर्ण धाराओं के नाम, अपराध और मिलने वाली सजा

भारतीय दण्ड संहिता की महत्वपूर्ण धाराओं के नाम, अपराध और मिलने वाली सजा- भारतीय समाज को कानूनी रूप से व्यवस्थित रखने के लिए सन 1860 में लार्ड मेकाले की अध्यक्षता में भारतीय दंड संहिता बनाई गई थी। इस संहिता में भारतीय संविधान की विभिन्न आपराधिक धाराओं और उनकी सजा का उल्लेख किया गया है। भारतीय दण्ड संहिता भारत के अन्दर ;जम्मू एवं कश्मीर को छोडकरद्ध भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये कुछ अपराधों की परिभाषा व दण्ड का प्रावधान करती है। किन्तु यह संहिता भारत की सेना पर लागू नहीं होती। जम्मू एवं कश्मीर में इसके स्थान पर रणबीर दण्ड संहिता लागू होती है।इस में कुल मिला कर 511 धाराएं हैं। यहाँ कानून की विभिन्न धाराएं और उनकी सजा का वर्णन किया है- अपराध की विभिन्न धाराओं के नाम और उनकी सजा की सूची- धाराओं के नामअपराध सजा 13 जुआ खेलना/सट्टा लगाना 1 वर्ष की सजा और 1000 रूपये जुर्माना। 34सामान आशयदृ99 से 106 व्यक्तिगत प्रतिरक्षा के लिए बल प्रयोग का अधिकारदृ110 दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति दुष्प्रेरक के आशय से भिन्न आशय से कार्य करता है -तीन वर्ष120 षडयंत्र रचना दृ141विधिविद्ध जमाव

देश के कानून के अंतर्गत आने वाले 5 महत्वपूर्ण तथ्य

ये वो महत्वपूर्ण तथ्य है, जो हमारे देश के कानून के अंतर्गत आते तो है पर हम इनसे अंजान है। हमारी कोशिश होगी कि हम आगे भी ऐसी बहोत सी रोचक बाते आपके समक्ष रखे, जो आपके जीवन में उपयोगी हो। 1. शाम के वक्त महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं हो सकती- कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर, सेक्शन 46 के तहत शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 के पहले भारतीय पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती, फिर चाहे गुनाह कितना भी संगीन क्यों ना हो। अगर पुलिस ऐसा करते हुए पाई जाती है तो गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत ;मामलाद्ध दर्ज की जा सकती है। इससे उस पुलिस अधिकारी की नौकरी खतरे में आ सकती है। 2. सिलेंडर फटने से जान-माल के नुकसान पर 40 लाख रूपये तक का बीमा कवर क्लेम कर सकते है- पब्लिक लायबिलिटी पालिसी के तहत अगर किसी कारण आपके घर में सिलेंडर फट जाता है और आपको जान-माल का नुकसान झेलना पड़ता है तो आप तुरंत गैस कंपनी से बीमा कवर क्लेम कर सकते है। आपको बता दे कि गैस कंपनी से 40 लाख रूपये तक का बीमा क्लेम कराया जा सकता है। अगर कंपनी आपका क्लेम देने से मना करती है या टालती है तो इसकी शिकायत की जा सकती है। दोषी पाये

अदालत का अधिकार 

यदि अभियोग पक्ष बार-बार अवसर मिलने पर भी अपने गवाहों को भी पेश नहीं कर पाता है तो मजिस्ट्रेट क्रिमिनल प्रोसीजर के तहत अभियोग को समाप्त कर सकता है । सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अगर दो वर्षों और साथ में तीन और महीनों के बाद भी यदि पुलिस चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाती तो यह माना जा सकता है कि गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं है, सरकार ऐसे केसों को वापस ले सकती है । क्रिमिनल प्रोसीजर 1973 की धारा 468 की उपधारा 2 के मुताबिक वे कैदी जिनके खिलाफ पुलिस चार्जशीट दाखिल नहीं करती उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता और उन्हें तुरंत छोड़ दिया जाना चाहिए,  क्योंकि उन्हें जेल में रखना गैरकानूनी होगा और साथ ही अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए उनके मूलभूत अधिकारों का खंडन भी होगा । क्रिमिनल प्रोसीजर 1973 की धारा 167 (5) में कहा गया है कि यदि किसी मुकदमे के बारे में मजिस्ट्रेट सोचता है कि यह सम्मन मुकदमा है और जिस तारीख से अभियुक्त गिरफ्तार हुआ है उससे 6 महीने के अंदर तहकीकात समाप्त नही होती, मजिस्ट्रेट अपराध के बारे में और तहकीकात को रुकवा सकता है , लेकिन अगर जो अधिकारी तहकीकात कर रहा है वह मज

ट्रैक्टर खा गया गांव की  बेलगाड़ी

Image
सोचो, ट्रैक्टर खा गया गांव की  बेलगाड़ी को उसके पहिया बनाने वाले कारीगरों के हाथों को बुंदेलखंड के 13 जिलों के 11000 गांव में 9 लाख 50 हजार बैलगाड़ी थी। हर गांव में 95 बैलगाड़ी थी इसको बनाने वाले कारीगर या तो बूढ़े हो गए अथवा काम न मिलने के कारण पलायन कर गए गांव से | यह गाड़ी बैलों से खींची जाती है।इसका नाम बैलगाड़ी हुआ यह विश्व का सबसे पुराना यातायात का साधन है, सामान ढोने का साधन है, पहिया मात्र बैलगाड़ी नहीं है जीवन है, जीवन जीने की युक्ति है। इन पहियों से जीवन की नई शुरुआत होती है पहिया हमें संदेश देता है निरंतर चलते रहो यह लकड़ी के पहिया आपको मंजिल तक पहुंचाते हैं यह गांव गरीब की रेलगाड़ी है जो बिना पेट्रोल के बिना इंजन की चलती है बगैर बिजली के यहां तक कि बिना ड्राइवर के, यह पहिया घर से बीज खेत को देते हैं। खेत से खलियान को देते हैं, खलिहान से घर को देते हैं, घर से बाजार को देते हैं, बाजार से फिर घर लाते हैं आपकी इच्छा पूरी कर के।बुंदेलखंड में लकड़ी के पहिया लकड़ी की गाड़ी स्थानीय बढ़ाई कारीगरों द्वारा बनाई जाती थी यह कारीगर 12 महीने बबूल की लकड़ी से बैल गाड़ी के पहिए बनाते थे जब ट्रैक्टर नहीं

आतंक की खैर नहीं

  आतंक की अब खैर नही दहाड़ रहा हिन्दुस्तान  आतंक के परवरिशकर्ताओं को निर्णायक सबक देगा हिन्दुस्तान   भरी महफिल में उतर रहा शुरूर फिर भी न तेरा कम हुआ गुरूर चुन चुन कर तेरा बखान हुआ देख लो पाक दुनियां में  हिन्दुस्तान का कितना सम्मान हुआ।   एक तरफ आतंकिस्तान दूसरे तरफ विकासीस्तान तू साजिश करता गया और तेरा दिवाला निकल गया। मदद करने वाला हिन्द देखो तुमसे कितना आगे निकल गया।   अब तो खाने के भी  दाने नही तेरे पास त्राहि त्राहि कर रहा  तेरे देश की अवाम।   बूरे कर्म का बूरा नतीजा तो होना ही था पाला पोशा दहशतगर्द को तुझे तबाह तो होना ही था।                                   आशुतोष

पान के किसानों का प्राकृतिक आपदा, प्रशासनिक व जनप्रतिनिधियों द्वारा उपेक्षा

Image
बांदा के इस गांव में पान की आढत लगती थी इस गांव का पान देश के कई महानगरों के साथ नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान सहित कई देशों में बेचा जाता था। इस गांव में सरकार भी पान पैदा कर बेचती थी। महाभारत काल से पुराना है।यह गांव केवल पान के किसानों का था जो प्राकृतिक आपदा, प्रशासनिक व तत्कालीन जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण पूरी तरह पान व्यवसाय समाप्त हो गया है। पान के किसान बकरी, भैंस चरा, सड़क पर पूजा सामग्री बेचकर अपना जीवन काट रहे हैं किसी समय 5000 की आबादी से अधिक के गांव में वर्तमान में 600 व्यक्ति बचे हैं। बाकी पान के किसान महानगरों में अपने बच्चो वा बड़ों के उधर पोषण के लिए पलायन कर गए। यह गांव बराई मानपुर जो ब्लाक महुआ तहसील नरैनी  जिला बांदा के अंतर्गत आता है और इस गांव में केवल चैरसिया जिन्हें पूर्व में बरई कहा जाता था। उनका एक मात्र गांव इतिहास कालीन यह है। यहां के चैरसिया उत्तर प्रदेश मे मध्य प्रदेश मे वा भारत के कई राज्यों में बस गए हैं स्वरोजगार के कारण यह गांव इतिहास में राजा नल की पत्नी दमयंती के मौसा चेदि राज्य के राजा थे उनकी राजधानी सूक्तिमती नगरी थी।राजा नल राम के पूर्वज ऋत

गोबर के कंडे का इतिहास

Image
धरोहर, गोबर कंडे का होली से क्या रिश्ता है, गोबर की राख में सोना, चांदी, बिजली, धुआं से  देवता पुरखे के प्रसन्न क्यों होते हैं। गोबर शब्द का प्रयोग गाय, बैल, भैंस के मल को कहते हैं। घास भूसा खली जो कुछ चैपाया जानवर खाते हैं उनके पाचन से निकले रासायनिक प्रक्रिया को गोबर कहते हैं, ठोस या पतला होता है, रंग पीला काला होता है इसमें घास के टुकड़े अन्न के कुछ  कर्ण होते हैं सूख जाने के बाद भी है कंडे के रूप में जाना जाता है। गाय का गोबर कंडे के लिए ज्यादा अच्छा होता है, गोबर में खनिजों की मात्रा अधिक होती है इसमें फास्फोरस, नाइट्रोजन, चूना, पोटाश, मैग्नीज, लोहा, सिल्कन, एलमुनियम, गंधक कुछ आंशिक मात्रा में विद्यमान रहते हैं। आयोडीन की मात्रा भी होती है इसीलिए गोबर को खेत में डाला जाता है जिन कारणों से मिट्टी को उपजाऊ बनाने में खेत के लिए मदद मिलती है गोवर में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो मिट्टी को जोड़ते हैं अंदर हवा देते हैं जैसे कंपोस्ट खाद केंचुआ खाद, जैविक खाद, गोबर की खाद से धूप अगरबती तैयार होती है। गोबर के कंडों को ईंधन के रूप में प्रयोग करते हैं जिससे खाना बनता है गोबर का महत्व इस बात से लग

जिसके पास लाइसेंस उसके नाम वाहन 

केंद्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम लागू क्या किया देश में गजब की हलचल मच गई। इसमें यातायात सुरक्षा के साथ-साथ यातायात स्वच्छता और स्वस्थता दिखाई पड़ी। कानून के मुताबिक नियम, कायदों को तोड़ने पर सक्त कार्रवाई और भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान है।  यह पहले भी कम सीमा में थे, किंतु ना जाने क्यों अमलीजामा पहनाने में ना-नूकर की जा रही थी। इसके लिए सरकारों को दोष दे या हुक्मरानों को या अफसरों को किवां अपने आप को? खैर! दोषारोपण के चक्कर में अब अपना आज ना गंवाए। जो बीत गया सो बीत गया अब आगे की सुध ले। लापरवाही से नियमों को तोड़कर हमने आज तक जितनी जाने गवाई है वह वापस तो नहीं आ सकती लेकिन सीख में आगे सुरक्षा, सतर्कता, सजगता, नियमब्धता, कर्तव्यता और दृढ़ता से नियमों का पालन करते हुए बे मौतों से बचा जा सकता है।  दुर्भाग्य जनक स्थिति ये है कि जितने लोग बीमारियों से जान नहीं गवाते उससे कहीं अधिक वाहनों की दुर्घटना से असमयक काल के गाल में समा जाते हैं। हादसों में सड़कों का भी बड़ा योगदान है, जिसके के लिए व्यवस्थाएं दोषी नहीं अपितु जुर्मी है। बावजूद सबक लेने के बेखौफ आज भी बैगर या फर्जी लाइसेंस, पंजी

पर्यावरण संरक्षण में बाधक प्लास्टिक पर प्रतिबंध सराहनीय कदम

प्रकृति एवं मानव ईश्वर की अनमोल एवं अनुपम कृति हैं। प्रकृति अनादि काल से मानव की सहचरी रही है। लेकिन मानव ने अपने भौतिक सुखों एवं इच्छाओं की पूर्ति के लिये इसके साथ निरंतर खिलवाड़ किया और वर्तमान समय में यह अपनी सारी सीमाओं की हद को पार कर चुका हैं। स्वार्थी एवं उपभोक्तावादी मानव ने प्रकृति यानि पर्यावरण को पॉलीथीन के अंधाधुंध प्रयोग से जिस तरह प्रदूषित किया और करता जा रहा हैं उससे सम्पूर्ण वातावरण पूरी तरह आहत हो चुका हैं। आज के भौतिक युग में पॉलीथीन के दूरगामी दुष्परिणाम एवं विषैलेपन से बेखबर हमारा समाज इसके उपयोग में इस कदर आगे बढ़ गया हैं मानो इसके बिना उनकी जिंदगी अधूरी हैं। वर्तमान समय को यदि पॉलीथीन अथवा प्लास्टिक युग के नाम से जाना जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि सम्पूर्ण विश्व में यह पॉली अपना एक महत्त्वपूर्ण स्थान बना चुका हैं और दुनिया के सभी देश इससे निर्मित वस्तुओं का किसी न किसी रूप में प्रयोग कर रहे हैं। सोचनीय विषय यह है कि सभी इसके दुष्प्रभावों से अनभिज्ञ हैं या जानते हुए भी अनभिज्ञ बने जा रहे हैं। पॉलीथीन एक प्रकार का जहर है जो पूरे पर्यावरण को नष्ट कर दे

‘एक राष्ट्र एक संविधान’ और ‘एक राष्ट्र एक राशन कार्ड’ के समान ही ‘एक राष्ट्र एक मानक’ भी होना चाहिएः राम विलास पासवान

केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री राम विलास पासवान ने आज 14 मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की मानक निर्माण प्रक्रिया और उसको लागू करने के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। इस बारे में विस्तृत चर्चा हुई कि मानक कैसे निर्धारित किए जाते हैं और उनका कार्यान्वयन कैसे किया जाता है। श्री पासवान ने कहा कि 'एक राष्ट्र एक संविधान' और 'एक राष्ट्र एक राशन कार्ड' के समान ही 'एक राष्ट्र एक मानक' भी होना चाहिए। बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए श्री पासवान ने कहा कि इस बैठक में सभी हितधारकों, नियामकों और अधिकारियों के साथ 'मानक निर्माण की प्रक्रिया' की समीक्षा की गई  और निर्धारित मानकों के कार्यान्वयन/निष्पादन में सुधार लाने के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया। श्री पासवान ने सभी हितधारकों से 17 सितम्बर 2019 तक इस संबंध में अपने सुझाव देने का आग्रह किया। श्री पासवान ने यह भी कहा कि मानकों को तय करने और उनके लागू करने का उद्देश्य 'इंस्पेक्टर राज' को वापस लाना नहीं है बल्कि देश के सभी उपभोक्ताओ

*हिन्दी है जन - जन की भाषा*

- राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित" कवि,साहित्यकार 14 सितम्बर ,हिन्दी दिवस   महात्मा गांधी ने कहा था "ह्रदय की कोई भाषा नहीं है। ह्रदय ह्रदय से बातचीत करता है। और हिंदी ह्रदय की भाषा है। "हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय को 14 सितम्बर 1949 को लिया गया था। हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित एवम प्रचारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा द्वारा अनुरोध किया गया जिसे स्वीकार किया गया। वर्ष 1953 से सम्पूर्ण भारत मे 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष इसीलिए हिन्दी दिवस मनाया जाता है।1918 में महात्मा गांधी ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिंदी भाषा को राष्ट्र भाषा बनाने की कहा था। इसे गाँधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था।   भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय 343(1) में इस प्रकार लिखा है कि " संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संघ कर राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अन्तराष्ट्रीय रूप होगा।" ये निर्णय 14 सितंबर को हुआ था इसी कारण इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में हम सभी मनाते हैं।   हिन्दी दिवस के दिन शिक्षालयों में छात्र

|।चौपाई।।

  गुरु की मार सहैं जो काया । उसने निर्मल रूप को पाया ।। सहता  नहीं  जो  घट थापा । कैसे कुटिलता गांवावत आपा ।। सुन्दर वस्त्र होय जब गन्दा । मसलैं रजक पीटे स्वछन्दा ।। निर्मल होय जब वस्त्र शरीरा । मानव धारण करत अधीरा ।। कटैं  वस्त्र जो  दर्जी  हाथे । मानव उसे चढ़ावत माथे ।। ईंट   सहैं   मार  रजगीरू । सुन्दर बुर्ज बनावत भीरू ।। बढ़ई   मार  सहैं जो  काठा । मार अखाड़ा सह बनैं पाठा ।। सुंदर  स्वर्ण  सुनार   तपावत । पीट-पीट बहु भांति बनावत ।। सहते मार न स्वर्ण सुनारू । बनता कैसे कुण्डल हारू ।। लौह  गर्म कर  हनैं  लुहारा । विविध भांति बनैं औजारा ।।    ऋषिकान्त राव शिखरे अम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश।