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Saturday, May 9, 2020

नैतिक स्तर उठाए बिना उज्जवल भविष्य तथा सुसंस्कृत समाज की कल्पना बेकार :- शिक्षाग्रही रवि भूषण ठाकुर

मोतिहारी। प्रगति का मूल आधार नैतिकता है | कभी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नैतिक गुण, धर्म और अध्यात्म को स्थान देकर पूरे विश्व का मार्गदर्शन किया था |परंतु अब हमारा नैतिक स्तर दिन पर दिन गिर गिरता जा रहा है |जो भारतीय संस्कृति का मूल है |

    आज हम अर्थ प्रधान युग मे जी रहे है |धन की प्रतिष्ठा ही जीवन की सर्वस्व बन गई है | आज के समय में यह बहुतायत मे देखा जाता है कि अगर आपके पास धन ज्यादा है तो आपके दूर के रिश्तेदार भी काफी नजदीकी का बताते है और अगर वही आपके पास धन नहीं है तो लोग आपको दूर का भी रिश्तेदार बताने से कतराते है क्यूँकी उनके अंदर नैतिक गुणों का संचरन है ही नहीं | इसी वजह से लोग अनैतिक तरीके से पैसे कमाना शुरू कर रहे है |जिसका बहुत ही बुरा प्रभाव हमारे समाज पर पर रहा है |

इसके कारण :-

1.नैतिक ह्रास का मुख्य कारण विधालयों तथा घरों मे नैतिक शिक्षा का , धार्मिक शिक्षा का आध्यात्मिकता का अभाव भी है | क्यूँकी विधालयों में केवल और केवल किताबी ज्ञान दिया जा रहा है|और घरों पर भी उन्हीं पर फोकस किया जा रहा है | और यह शिक्षा जिंदगी में बहुत ही कम लागू होती है, जिससे बच्चों के जीवन के हर क्षेत्र में निकम्मी साबित हो रही है |सही शिक्षा तथा समुचित निर्देशन न मिल पाने के कारण आज के कितने नवयुवक जिंदगी के रास्ते भटक जा रहे है |

2. नैतिकता के ह्रास का एक और मुख्य कारण है खुद को पश्चिमी सभ्यता के तरफ मोड़ना यानी कि अश्लील सिनेमा,साहित्य, बेहूदी वीडियो फ़िल्में |जिसका बुरा प्रभाव छात्रों तथा युवाओं के कोमल मस्तिष्क पर पड़े बिना नहीं रह सकता |

क्या किया जाए :-

सबसे पहले विधालय द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि उनके स्कूल के सिलेबस मे नैतिक पठन - पाठन के लिए एक

पुस्तक हो | तथा उनको स्कूल में पढ़ाया जाए क्यूँकी " विधालय महापुरुषों के निर्माण का कारखाना होता है और अध्यापक उन्हें बनाने वाले कारीगर |" 

                                         इसलिए स्कूल यह भी सुनिश्चित करे के उनके स्कूल में प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों द्वारा नए नए रोचक तरीकों से गुणवत्तापूर्ण किताबी शिक्षा के साथ साथ सामाजिक शिक्षा और रोजगारउन्मुख शिक्षा (जैसे आर्ट, पेंटिंग, ड्रॉइंग, हस्तशिल्प इत्यादि) भी दी जाए | क्यूँकी एक अच्छे विधालय, अच्छे शिक्षक का कर्तव्य होता है कि वे बेह्तरीन फ्यूचर लीडर का निर्माण करे |

                  इसके साथ ही साथ स्कूल यह सुनिश्चित करे कि विधालय केवल आमदनी का स्रोत ही नहीं है बल्कि भविष्य निर्माता भी है |बच्चों में गुड टच बैड टच को अनुभव अन्तर समझने की कला विकसित करे ताकि वे भी इसके विरुद्ध आवाज उठा सके | 

           माता-पिता  और शिक्षक  बच्चों को अपशब्द,अश्लील फ़िल्में, साहित्य, वीडियो से होने वाले शारीरिक, मानसिक घाटे से अवगत कराये क्यूँकी अगर उनको यह पता चल गया तो वे खुद तो इस बीमारी से बचेंगे ही औरों को भी बचाएंगे.. और अगर उनके अंदर नैतिक गुणों का संचरण हो गया तो किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को अपने समाज का अपने देश से चाहे वह शिक्षा से जुड़ा हो या फिर समाज से जुड़ा हो, उखाड़ फेंकने मे सफल होंगे |

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