Wednesday, November 9, 2022

रोटी के प्रकार

 #रोटी के प्रकार......(पढ़ना जरूर)

कुछ बुजुर्ग दोस्त एक पार्क में बैठे हुऐ थे, वहाँ बातों -बातों में रोटी की बात निकल गई।
तभी एक दोस्त बोला - जानते हो कि रोटी कितने प्रकार की होती है?
किसी ने मोटी, पतली तो किसी ने कुछ और हीं प्रकार की रोटी के बारे में बतलाया।
तब एक दोस्त ने कहा कि नहीं दोस्त...भावना और कर्म के आधार से रोटी चार प्रकार की होती है।"
पहली "सबसे स्वादिष्ट" रोटी "#माँ की "ममता" और "वात्सल्य" से भरी हुई। जिससे पेट तो भर जाता है, पर मन कभी नहीं भरता।
एक दोस्त ने कहा, सोलह आने सच, पर शादी के बाद माँ की रोटी कम ही मिलती है।"
उन्होंने आगे कहा "हाँ, वही तो बात है।
दूसरी रोटी #पत्नी की होती है जिसमें अपनापन और "समर्पण" भाव होता है जिससे "पेट" और "मन" दोनों भर जाते हैं।",
क्या बात कही है यार ?" ऐसा तो हमने कभी सोचा ही नहीं।
फिर तीसरी रोटी किस की होती है?" एक दोस्त ने सवाल किया।
"तीसरी रोटी #बहू की होती है जिसमें सिर्फ "कर्तव्य" का भाव होता है जो कुछ कुछ स्वाद भी देती है और पेट भी भर देती है और वृद्धाश्रम की परेशानियों से भी बचाती है",
थोड़ी देर के लिए वहाँ चुप्पी छा गई।
"लेकिन ये चौथी रोटी कौन सी होती है ?" मौन तोड़ते हुए एक दोस्त ने पूछा-
"चौथी रोटी #नौकरानी की होती है। जिससे ना तो इन्सान का "पेट" भरता है न ही "मन" तृप्त होता है और "स्वाद" की तो कोई गारँटी ही नहीं है", तो फिर हमें क्या करना चाहिये।
माँ की हमेशा इज्ज़त करो, पत्नी को सबसे अच्छा दोस्त बना कर जीवन जिओ, बहू को अपनी बेटी समझो और छोटी मोटी ग़लतियाँ नज़रन्दाज़ कर दो । बहू खुश रहेगी तो बेटा भी आपका ध्यान रखेगा।
यदि हालात चौथी रोटी तक ले ही आयें तो ईश्वर का शुक्रिया करो कि उसने हमें ज़िन्दा रखा हुआ है, अब स्वाद पर ध्यान मत दो केवल जीने के लिये बहुत कम खाओ ताकि आराम से बुढ़ापा कट जाये, और सोचो कि वाकई, हम कितने खुशकिस्मत हैं।

Tuesday, November 8, 2022

सनातन धर्म का दर्शन कराती अति सुंदर घड़ी

 हमारे #सनातन धर्म का दर्शन कराती अति सुंदर घड़ी।।



12:00 बजने के स्थान पर आदित्य लिखा हुआ है जिसका अर्थ यह है कि सूर्य 12 प्रकार के होते हैं।
1:00 बजने के स्थान पर ब्रह्म लिखा हुआ है इसका अर्थ यह है कि ब्रह्म एक ही प्रकार का होता है ।एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति।
2:00 बजने की स्थान पर अश्विन और लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि अश्विनी कुमार दो हैं।
3:00 बजने के स्थान पर त्रिगुणः लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि गुण तीन प्रकार के हैं ---- सतोगुण रजोगुण तमोगुण।
4:00 बजने के स्थान पर चतुर्वेद लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं -- ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद।
5:00 बजने के स्थान पर पंचप्राणा लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य है कि प्राण पांच प्रकार के होते हैं ।
6:00 बजने के स्थान पर षड्र्स लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि रस 6 प्रकार के होते हैं ।
7:00 बजे के स्थान पर सप्तर्षि लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सप्त ऋषि 7 हुए हैं ।
8:00 बजने के स्थान पर अष्ट सिद्धियां लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सिद्धियां आठ प्रकार की होती है ।
9:00 बजने के स्थान पर नव द्रव्यणि अभियान लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि 9 प्रकार की निधियां होती हैं।
10:00 बजने के स्थान पर दश दिशः लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि दिशाएं 10 होती है।
11:00 बजने के स्थान पर रुद्रा लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि रुद्र 11 प्रकार के हुए हैं।

Friday, November 4, 2022

चुटिया (शिखा बंधन) क्या है ?

गायत्री शिखा बंधन क्या है?


शिखाबन्धन (वन्दन) आचमन के पश्चात् शिखा को जल से गीला करके उसमें ऐसी गाँठ लगानी चाहिये, जो सिरा नीचे से खुल जाए। इसे आधी गाँठ कहते हैं। गाँठ लगाते समय गायत्री मन्त्र का उच्चारण करते जाना चाहिये ।
गायत्री शिखा बंधन क्या है?
शिखाबन्धन (वन्दन) आचमन के पश्चात् शिखा को जल से गीला करके उसमें ऐसी गाँठ लगानी चाहिये, जो सिरा नीचे से खुल जाए। इसे आधी गाँठ कहते हैं। गाँठ लगाते समय गायत्री मन्त्र का उच्चारण करते जाना चाहिये ।
शक्ति परमाणु हर घड़ी बाहर निकल-निकलकर आकाश में दौड़ते रहते हैं। इस प्रवाह से शक्ति का अनावश्यक व्यय होता है और अपना कोष घटता है।
इसका प्रतिरोध करने के लिये शिखा में गाँठ लगा देते हैं। सदा गाँठ लगाये रहने से अपनी मानसिक शक्तियों का बहुत-सा अपव्यय बच जाता है।
सन्ध्या करते समय
विशेष रूप से गाँठ लगाने का प्रयोजन यह है कि रात्रि को सोते समय यह गाँठ प्रायः शिथिल हो जाती है या खुल जाती है।
फिर स्नान करते समय केश-शुद्धि के लिये शिखा को खोलना पड़ता है।
सन्ध्या करते समय अनेक सूक्ष्म तत्त्व आकर्षित होकर अपने अन्दर स्थिर होते हैं, वे सब मस्तिष्क केन्द्र से निकलकर बाहर न उड़ जाए इसलिये शिखा में गाँठ लगा दी जाती है।इसमें गाँठ लगा देने से भीतर भरी हुई वायु बाहर नहीं निकल पाती। गाँठ लगी हुई शिखा से भी यही प्रयोजन पूरा होता है।
वह बाहर के विचार और शक्ति समूह को ग्रहण करती है । भीतर के तत्त्वों का अनावश्यक व्यय नहीं होने देती ।
आचमन से पूर्व शिखा बन्धन इसलिये नहीं होता, क्योंकि उस समय त्रिविध शक्ति का आकर्षण जहाँ जल द्वारा होता है, वह मस्तिष्क के मध्य केन्द्र द्वारा भी होता है।
इस प्रकार शिखा खुली रहने से दुहरा लाभ होता है । तत्पश्चात् उसे बाँध दिया जाता है।

Thursday, October 27, 2022

ग्यारह कलाओं से भरपूर, उसके बाद भी रोटी के लिए मजबूर

 एग्यारह कलाओं से भरपूर, जिसे देखकर आप रह जाएंगे दंग, वह कलाकार है एक रोटी के लिए मजबूर, क्या बिहार सरकार के कला संस्कृति विभाग का यही है दस्तूर?


रवि कुमार भार्गव

राज्य को-आर्डिनेटर अयोध्या टाइम्स बिहार 

---मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन को उनकी सहायता के लिए आगे आने की जरूरत है।

--इनका एक ही सपना है की वो डब्लू डब्लू ई में अपने देश के लिए लड़ें। किंतु उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वह कोई एकेडमी ज्वाइन कर सके।

--माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी का ऐसे कलाकारों पर नजर पड़ जाए तो रवि रंजन जैसे कलाकारों को एक रोटी के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।



सिरहाकोठी:-आज मैं आपके सामने एक ऐसे कलाकार को ढूंढ कर लाया हूं जिनके पास एग्यारह कला देखने को मिलेगा आपको। उनकी एक एक कला को देखकर आप दंग रह जाएंगे। दांतो तले उंगली दबा ने पर आप मजबूर हो जाएंगे।

आइए हम उन कलाकार से परिचय करवाते हैं उनका नाम है रवि रंजन कुमार उनके पिता का नाम है सत्येंद्र कुमार घर है उनका कोरीगांवा डाकखाना है उनका महवल उनका थाना है बरूराज प्रखंड पड़ता है मोतीपुर और जिला पड़ता है मुजफ्फरपुर। ऐसा ही नहीं यह कलाकार महोदय b.a. पार्ट वन के विद्यार्थी भी हैं और इनका उम्र मात्र 19 वर्ष हो रहा है।

इस 19 बरस की उम्र के अंदर एग्यारह कलाओं को अपने अंदर उतार लेना, बड़े ही गौरव की बात है। इनकी कलाओं में सबसे अहम पहली कला देखने को मिला अपने दांतो के सहारे चार चक्का कार को चला देना, दूसरी कला देखने को मिला चालू दो बाइक मोटरसाइकिल को आगे की ओर नहीं बनने देना, तीसरी कला देखने को मिला मोटरसाइकिल को उठाकर लोगों के बीच घूम घूम कर दिखाना, चौथी कला देखने को मिला अपने कंधे पर दो व्यक्तियों को बैठाकर उपस्थित जनों के बीच घुमा देना, पांचवी क्लास अपने कंधे पर लाठी के सहारे दोनों तरफ 3-साइकिल एक तरफ 3 साइकिल दूसरी तरफ लाद कर छ: साइकिल की वजन को लेकर कुछ दूर तक चल कर दिखाना, छठी कला को देखकर आप दंग रह जाएंगे। इनका छठी कला जो है मेस्सी फर्गुसन ट्रेक्टर को स्वराज ट्रैक्टर को अपने दांतो के सहारे चला कर दिखाना, यही नहीं इनके सातवी कला अकेले स्वराज ट्रैक्टर या मेस्सी फर्गुसन ट्रेक्टर को धक्का देकर चलाते रहना, इनका आठवीं कला में देखने को आपको मिलेगा लगभग 1 कुंटल से ऊपर की वजन को हल के रूप में नीचे ऊपर करके दिखाना और उसकी कला को प्रदर्शन करना, इनका नवी कला बड़े ही देखने लायक दृश्य है जो अपने कंधे पर लाठी का भार बनाकर दो व्यक्ति एक तरफ दो व्यक्ति दूसरी तरफ कूल चार व्यक्तियों का वजन लेकर चलना। इनकी 10 वीं कला देखकर आप अपनी आंखों पर विश्वास नहीं करेंगे किंतु विश्वास करना होगा वह है दो मोटरसाइकिल स्टार्ट स्थिति में अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ने को ललाइत है, किंतु रवि रंजन ऐसे ढंग से दोनों मोटरसाइकिल को पकड़े हुए हैं, कि टस से मस नहीं होने दे रहे हैं। एग्यारहवी कला को देख कर आप बिल्कुल दंग रह जाएंगे, पिकअप गाड़ी को अपने दांतो से खींच कर चलाकर दिखा देना, उसे रवि रंजन कुमार ने कर दिखाया है।


एग्यारह कलाओं से भरपूर कलाकार रवि रंजन जिस की कला को आप देखकर दंग रह जाएंगे वह कलाकार एक रोटी के लिए है मजबूर। इनके पिता एक साधारण किसान हैं वह जो भी कमाते हैं वह सारे पैसे बच्चों के लालन-पालन में खर्च हो जाता है बहुत ही निहायत गरीब परिवार से रवि रंजन कुमार आते हैं। जो रवि पहलवान के नाम से इलाकों में जाने जाते हैं। इनका एक ही सपना है की वो डब्लू डब्लू ई में अपने देश के लिए लड़ें। किंतु उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वह कोई एकेडमी ज्वाइन कर सके। इस स्थिति में हमारे बिहार सरकार के कला संस्कृति विभाग चाहे तो इन कलाओं को देखकर युवक रवि रंजन कुमार के लाइफ को संवार सकता है। बिहार सरकार की अगर ध्यान हो जाए हमारे माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी का ऐसे कलाकारों पर नजर पड़ जाए तो रवि रंजन जैसे कलाकारों को एक रोटी के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।

रवि रंजन जैसे कलाकार जो एग्यारह कलाओं को अपने अंदर समेटे बैठा है, उसे सरकार के सहायता की अति जरूरत है। इस हालत में मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन को उनकी सहायता के लिए आगे आने की जरूरत है उनकी कला को उनकी जज्बा को समझने की जरूरत है और उन्हें उस मंजिल तक पहुंचा कर उनके जीवन को संवारने की जरूरत है।