Sunday, January 12, 2020

ठाकुर विशम्भर सिंह इण्टर कालेज गुरूकुल से निकली बेल शिक्षा का उजाला फैला रही है पिछडे़ इलाके गुजैनी जमीदार परिवार ने 1992 में डाली थी गांव में नींव


कानपुर। कुछ ही शख्शियतें ऐसी होती हैं, जो तमाम संसाधन मौजूद होने के बावजूद भी  समाज के लिए कुछ ऐसा करने की ललक लिए कदमतार कंरने से जरा भी नहीं चूकते हैं। जिससे वे रहे न रहें उनका नाम समाज में इतिहास बन चुका होता है। ऐसा ही एक नाम गुजैनी के एक समय के जमीदार ठाकुर विशम्भर सिंह आज भले ही हमारे बीच न हों किन्तु उनके नाम का ठाकुर विशम्भर सिंह इण्टर कालेज आज भी गुजैनी व आस पास के इलाकों में शिक्षा का एक बड़ा केन्द्र बना हुआ है। जिससे निकलकर प्रतिवर्ष सैकड़ों छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए आगे की प्रगति का रास्ता तय करते हैं।
 ठाकुर विशम्भर सिंह की प्रेरणा से ही उनके पुत्र ठाकुर देवेन्द्र सिंह जो इस इण्टर कालेज के प्रबन्धक भी हैं तथा पुत्रवधू श्रीमती सत्या सिंह ने 1992 में शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े गुजैनी में ही अपनी पैतृक की सम्पत्ति में तुलसी मेमोरियल स्कूल के नाम से एक गुरूकुल खोला। अपने बाद जमीदार ठाकुर विशम्भर सिंह की 1994 में मौत के बाद उनकी प्रेरणा की वजह से इस स्कूल का नाम उन्हीं के नाम पर रख दिया गया। दिवंगत ठाकुर साहब हमेशा अपने बेटे-बहू से कहा करते थे कि पैसों के अभाव में किसी बच्चे की शिक्षा नहीं रूकनी चाहिए। 
 इसी मूलमंत्र के सहारे यह विद्यालय आज भी गुजैनी रविदासपुरम अम्बेडकरपुरम   सरायमीता, पतरसा आदि तमाम इलाके का सबसे सस्ता इण्टरकालेज बना हुआ हैै। उसके बावजूद जिन परिवारों के पास इतनी कम फीस भी मुहैया नहीं हो पाती है। उनके बच्चों की शिाक्षा रोकी नहीं जाती। जिसका परिणाम यह है कि स्कूल में सैकड़ों की तादात में बच्चे हैं। मात्र इण्टर मंे ही विज्ञान वर्ग में 100 व कला वर्ग में 130 बच्चें हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नर्सरी से 12वीं तक चलने वाली कक्षाओं में कितने बच्चे होंगे। अश्चर्य की बात यह है कि माध्यमिक बार्ड हाई स्कूल इण्टर की परीक्षाओं में यहां का परिणाम एक समय से शतप्रतिशत ही रहता है। खास तौर पर वह बच्चे जिन्होंने 6वीं से इण्टर तक का कार्यकाल यहीं पूरा किया है वे बड़े ही मेधावी निकलकर अच्छे-अच्छे संस्थानों में कार्यरत हैं। 
 यहां की प्रधानाचार्य श्रीमती सत्या सिंह बताती हैं कि उनका उद्देश्य कम फीस पर बच्चों को बेहतर शिक्षा देना है जो मूलमंत्र उनके ससुर दे गये थे। उन्हीं के पद चिन्हों पर यह स्कूल चल रहा है। जिससे कभी बीज के रूप में डाला गया। यह विद्यालय आज पेड़ बन चुका है। इसी की शतप्रतिशत सफलता को देखकर अपने ससुर के नाम पर प्राइमरी तक का इंग्लिश मीडियम टी.वी.एस. एजूकेशन सेन्टर भी खोला गया है। जो सफलता की सीढ़िंयां चढ़ने लगा है। उन्होंने बताया कि बच्चोें की बेहतर शिक्षा के लिए इण्टरमीडिएट वाले स्कूल में ही 22 शिक्षाकों का स्टाफ है। हालाकि उन्हें इस बात का मलाल अवश्य है कि उनके शिक्षकों की इतनी अधिक मेहनत के बाद भी उच्च वर्ग के बच्चे यहां नहीं आ पाते हैं। फिर भी हम गरीब निहत्थे बच्चों को उनके मुकाबले में खड़ा करने की कम कोशिश नहीं कर रहे हैं।


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