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Tuesday, May 19, 2020

भारत के गांव पहले से ही आत्मनिर्भर रहे हैं लेकिन आधुनिकता ने कुछ कमजोर किया है

कोरोना काल के बाद आत्मनिर्भरता का संकल्प माननीय प्रधानमंत्री जी ने दिए मुझे लगता है की आत्मनिर्भरता के लिए सबसे महत्वपूर्ण ग्रामीण व्यवस्था के सशक्तिकरण को महत्व देने की जरूरत है भारत के गांव पहले बहुत ही आत्मनिर्भर थे आज भी बहुत हद तक आत्मनिर्भर है लेकिन आधुनिकता ने जरूर गांवो को आज कुछ कमजोर किया है लेकिन अब वक्त आ गया है फिर से सुदृढ़ करने का गांव को दोस्तों अगर भारत को जानना है तो गांव को जानना पड़ेगा हमें, दोस्तों प्रत्येक गांव अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के मामले में स्वावलंबी होगा तभी गांव में सच्चा ग्राम स्वराज्य कायम हो सकेगा अब ग्लोबलाइजेशन के साइड इफेक्ट के रूप में पनपे कोरोना वायरस के बाद गांव को विकसित एवं सुदृढ़ करने पर हमें पूरा ध्यान देने की जरूरत है दोस्तों आत्मनिर्भर बनने के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका गांव की है इसलिए भारत का इलाज करने के लिए लाइलाज होते गांव के इलाज को प्राथमिकता देनी होगी हमें आज दोस्तों उद्योग जगत और सेवा क्षेत्र के व्यापक विस्तार के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी प्रकृति मूलतः कृषि आधारित है खेती-बाड़ी और उससे संबंधित कामों पर देश की दो तिहाई जनसंख्या निर्भर करती है इसके बावजूद भारत के किसान -किसानी और गांव उपेक्षित है इस वैश्विक महामारी में दोस्तों आज सभी बड़े -बड़े उद्योग लॉकडाउन के कारण बंद है लेकिन कृषि कार्य निरंतर चल रहा है खेतों में किसान दिन-रात लगकर अनाज का उत्पादन कर रहे हैं ताकि इस वैश्विक महामारी में कोई भूखे ना मरे सोचो  आप अगर किसानों की मेहनत के बदौलत हमारा खाद्यान्न भंडारण क्षमता इतना ज्यादा नहीं होता तो कोरोना से कम बल्कि भूख से ज्यादा मौतें होती लेकिन धन्य हो अन्नदाता जिसने हम सभी के पेट भरने के लिए दिन-रात खेतों में मेहनत कर रहे हैं लेकिन सरकार इन के लिए सुरक्षा कानून नहीं बना रही है दोस्तो देखा  जाए तो भारत के गांव समुदाय एक प्रकार की छोटे-छोटे गणराज्य हैं जो अपने लिए आवश्यक सभी वस्तुओं की व्यवस्था खुद कर लेते हैं तथा किसी प्रकार के बाहरी संपर्क से मुक्त रहते हैं इनके अधिकारों और प्रबंधन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और बड़े-बड़े महानगरों से लेकर दूसरे देशों तक को अनाज उपलब्ध करते हैं दोस्तों आज भी अपने आप में पूर्ण है ग्रामीण व्यवस्था लेकिन ग्लोबलाइजेशन व आधुनिकता ने थोड़ा कमजोर जरूर किया है लेकिन अब हम अपने गांव को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पहल करेंगे दोस्तों आजादी के बाद या उससे पहले निर्मित हो रहे शहरों को खाने -पीने की व्यवस्था गांवो ने हीं मुहैया कराई आज भी करा रही है इसलिए गांव शहर के अन्नदाता है लेकिन इस वैश्विक महामारी में बहुत से छोटे किसान के बच्चे भी दूसरे शहरों में फंसे हुए हैं क्योंकि खेती-बाड़ी घाटे की सौदा है इसीलिए अन्नदाता के बच्चे शहरो के तरफ निकल जाते हैं अपने परिवार की आजीविका चलाने के लिए लेकिन अब सब काम धंधे बंद है तो किसान -मजदूर के बच्चे हजारों किलोमीटर पैदल चलते हुए अपनी जान को जोखिम में डाल रहे हैं आए दिन सड़क दुर्घटनाओं में अपने मंजिल तक पहुंचने से पहले ही इनकी सांसे ठहर जा रही है क्या इनकी सुरक्षा की जवाबदेही सरकार की नहीं है? देखो दोस्तों अब उन चीजों की संख्या ज्यादा बढ़ गई है जो शहरों से गांवो  की तरफ जाती है यही कारण है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मनिर्भरता कमजोर हुई है थोपी हुई आवश्यक वस्तुओं का प्रोडक्शन गांव कर नहीं सकते इसी वजह से अब गांव शहरो पर आश्रित है लेकिन अब फिर से इस वैश्विक महामारी में गांव को आत्मनिर्भर बनाना है इसके लिए हम सबको मिलकर सरोकार की भावना से पहल करने की जरूरत है दोस्तों महात्मा गांधी जी ने ग्रामोउद्योग के प्रगति के लिए ही मशीनों के बजाय हाथ- पैर के श्रम पर आधारित उद्योगों को बढ़ाने पर जोर दिए जैसे कि चरखा व करखा ग्रामीण व कुटीर उद्योग, सहकारी खेती ग्राम पंचायतें व सहकारी संस्थाएं राजनीति व आर्थिक सत्ता का विकेंद्रीकरण, अस्पृश्यता निवारण ,मध निषेध बुनियादी शिक्षा आदि पर जोर दिए | दोस्तों अब हमें गांवो को तकनीक से जोड़कर गावं की आत्मनिर्भरता बढ़ाने की जरूरत है दोस्तों कोरोना संकट ने हमें सबसे बड़ा संदेश दिया आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा हमें इसलिए गांव अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर बने जिला अपने स्तर पर राज्य अपने स्तर पर और इसी तरह पूरा देश आत्मनिर्भर बनेगा यह बहुत आवश्यकता है आज के वक्त में दोस्तों आत्मनिर्भर बने और इस वैश्विक महामारी में जितना हो सके अपने आस -पड़ोस के वंचित तबकों का दिल खोलकर मदद कीजिए l

कवि विक्रम क्रांतिकारी(विक्रम चौरसिया-अंतर्राष्ट्रीय चिंतक)

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