सती अहिल्या

काम है सब अवगुणों की निशानी

इंद्र की वासना की कहानी पुरानी।।

 

देव पद को जो कर गए कलंकित।

निष्पापी को भी करवा गए दंडित।।

 

अपने ही दोषी जब जब  ठहराए।

नारी तब शिला बन मौन रह जाए।।

 

ऋषि गौतम की पारलौकिक तपोदृष्टि।

भेद न जाने किस काम की योग दृष्टि।

 

शील- अशील का जो मर्म न पहचाने।

निपराधि अवला को भी जो दोषी माने।।

 

युगों युगों अहिल्या का दृढ़ विश्वास।

मन में लिए सती राम दर्श की आस।।

 

 

Comments

Popular posts from this blog

सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की जन्म कुण्डली जानिये : पं0 सुधांशू तिवारी

राघोपुर में बिजली चोरी करते पकड़े गए 11 लोग जेई ने दर्ज कराई प्राथमिकी

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमन्त्री केशव प्रसाद मौर्य की जीवन कुण्डली : पं. सुधांशु तिवारी के साथ