अमरत्व का फल

महात्मा बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक और महान समाज सुधारक थे। इनका वास्तविक नाम सिद्धार्थ था। इनको गौतम के नाम से भी पुकारा जाता था। आगे चलकर ये बुद्ध के नाम से अपने अनुयायियों व दुनिया में प्रसिद्ध हुए।इनके जीवन से जुड़ी एक लोकप्रिय लघुकथा है एक दिन एक किसान बुद्ध के पास आया और बोला, ‘महाराज, मैं एक साधारण किसान हूं। बीज बोकर, हल चला कर अनाज उत्पन्न करता हूं और तब उसे ग्रहण करता हूं । किंतु इससे मेरे मन को तसल्ली नहीं मिलती। मैं कुछ ऐसा करना चाहता हूं जिससे मेरे खेत में अमरत्व के फल उत्पन्न हों। आप मुझे मार्गदर्शन दीजिए जिससे मेरे खेत में अमरत्व के फल उत्पन्न होने लगें।’बात सुनकर बुद्ध मुस्कराकर बोले, ‘भले व्यक्ति, तुम्हें अमरत्व का फल तो अवश्य मिल सकता है किंतु इसके लिए तुम्हें खेत में बीज न बोकर अपने मन में बीज बोने होंगे?’ यह सुनकर किसान हैरानी से बोला, ‘प्रभु, आप यह क्या कह रहे हैं? भला मन के बीज बोकर भी फल प्राप्त हो सकते हैं।’बुद्ध बोले, ‘बिल्कुल हो सकते हैं और इन बीजों से तुम्हें जो फल प्राप्त होंगे वे वाकई साधारण न होकर अद्भुत होंगे जो तुम्हारे जीवन को भी सफल बनाएंगे और तुम्हें नेकी की राह दिखाएंगे।’ किसान ने कहा , ‘प्रभु, तब तो मुझे अवश्य बताइए कि मैं मन में बीज कैसे बोऊं?’ बुद्ध बोले, ‘तुम मन में विश्वास के बीज बोओ, विवेक का हल चलाओ, ज्ञान के जल से उसे सींचो और उसमें नम्रता का उर्वरक डालो। इससे तुम्हें अमरत्व का फल प्राप्त होगा। उसे खाकर तुम्हारे सारे दु:ख दूर हो जाएंगे और तुम्हें असीम शांति का अनुभव होगा।’ बुद्ध से अमरत्व के फल की प्राप्ति की बात सुनकर किसान की आंखें खुल गईं। वह समझ गया कि अमरत्व का फल सद्विचारों के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है।

                        वास्तव में यदि हमें अमरत्व का फल चाहिए तो हमें मन में  सद्विचार,विवेक,ज्ञान आदि को जगह देनी होगी तभी हम इस संसार में कुछ भी हासिल कर सकते हैं।

 

 

            रुपेश कुमार श्रीवास्तव 'रजत'

 

 

Comments

Popular posts from this blog

सकारात्मक अभिवृत्ति

तुम मेरी पहली और आखरी आशा

बस और टेंपो की जोरदार टक्कर में 16 की मौत, कई लोग घायल