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Tuesday, June 2, 2020

श्रमिकों ने कहा अन्य मजदूरी से मनरेगा की मजदूरी कम है

भोजपुर(संवाददाता) -- जिले के बिहिया थाना क्षेत्र के घाघा पंचायत के बहुत से श्रमिक बाहर काम करने गए थे लेकिन कोरोना महामारी के भयावह स्थिति बनने से श्रमिक अपने घर लौटने को मजबूर हो गए जहाँ भुखमरी की स्थिति बन गई। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने मनरेगा में काम दिया। लेकिन श्रमिकों का कहना है कि जो मजदूरी मनरेगा के तहत मिलेगा वह अन्य मजदूरी से कम है जिससे परिवार चलाना मुश्किल होगा तथा भुखमरी जैसे हालात बन सकता है। वहीं महिला श्रमिकों का कहना है कि
"हमारे गांव में जिन मजदूरों को मनरेगा का सहारा था, लेकिन मजदूरी कम मिलने से घर परिवार तथा बच्चों की पढाई की खर्चा उठाना मुश्किल है। पंचायत मुखिया कामता यादव ने कहा कि जब खुद श्रमिकों के घर जाकर देखा तो बहुत दुःख हुआ, तब जाकर उनको राशन-पानी मुहैय्या कराया गया, मगर स्थिति बहुत ही भयावह है। मनरेगा में काम करनेवाले कुछ श्रमिकों ने कहा कि अभी तक सरकारी दुकान से राशन भी नहीं मिला फिर भी मुखिया ने बिना राशन कार्ड धारी को भी राशन दिया है। कोरोना लॉकडाउन में गांव के हजारों मजदूर जहाँ भुखमरी से बचने के लिए अपने गाँव लौटे हैं, वहीं गांवों में रहकर मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों के सामने भी भुखमरी जैसे हालात हैं।


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