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Saturday, December 26, 2020

महिला पत्रकार के साथ हुई धोखा धड़ी पर पत्रकारों द्वारा प्रकाशित खबरों का हुआ असर


लखनऊ: राजधानी लखनऊ में महिला पत्रकार के साथ धोखाधड़ी कर उसे गारंटर बता कर उसकी ही आईडी पर गाड़ी फाइनेंस की गई थी जिसपर महिला द्वारा थाने पर तहरीर भी दी गयी जिसपर थाने द्वारा महिला को 3 दिन तक उसकी कम्प्लेन दर्ज कर आरोपियों से गाड़ी लाकर थाने में खड़ी कराने व आरोपियों पर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया जिसपर 22.12.2020 तक महिला की तहरीर पर जब कोई कार्यवाही नही की गई तो महिला ने इसका कारण जानना चाहा जिसपर थाने में मौजूद उपनिरीक्षक अखिलेश द्वारा महिला से गाली गलौज की व महिला पत्रकार को लज्जित किया और महिला पत्रकार को धक्का मारा और धमकाते हुवे कहा थाने से भाग जा अन्यथा तुझे किसी अन्य मुक़दमे में जेल भेज दूंगा जिसपर महिला पत्रकार ने पत्रकारों व आला अधिकारियों से अपनी फरियाद की और पूरे मामले से अवगत कराया जिसपर पत्रकारों द्वारा सत्य खबर प्रकाशित कर व माननीय सांसद कौशल किशोर व माननीय रुखसाना नक़वी भाजपा मीडया प्रभारी द्वारा मामले को संज्ञान लेते हुए आला अधिकारियों को सूचित करते हुवे मामले पर जांच कर कार्यवाही के लिए बोला जिसपर आला अधिकारी व एसीपी महोदय द्वारा सम्बंधित थाना मड़ियांव को 23/12/2020 को  आदेशित कर आरोपियों के विरुद्ध  मुक़दमा पंजीकृत कर सख्त कार्यवाही करने का आदेश दिया जिसपर थाने द्वारा आरोपियों पर 420,406,504,506 धाराओं पर मुकदमा तो पंजिकृत कर लिया गया पर अब देखना ये है कि थाने द्वारा आरोपियों पर आगे की कार्यवाही की जाती है या सिर्फ मुक़दमा पंजिकृत कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है

वहीं  सवाल ये भी उठता है कि उपनिरीक्षक अखिलेश द्वारा महिला पत्रकार से जो अभद्रता गाली गलौज व धक्क मुक़्क़ी की गयी हैं क्या उसपर शासन व प्रशासन के आला अधिकारी कुछ संज्ञान लेंगे बताते चले कि मामला 17.12.2020 का गाड़ी के सम्बंध में हुआ था जिसपर महिला पत्रकार ने तहरीर भी दी थी जिसपर थाने द्वारा आरोपियों को बुलाकर थाने पर उनसे लिखित पत्र भी लिया गया जिसपर आरोपी  ने अपने गवाहों की मौजूदगी व हस्ताक्षर के साथ लिखित में  थाने को दिया कि वह 18. 12. 2020 को  गाड़ी थाने पर जमा करेंगे जिसपर आरोपियों को थाने द्वारा 1 दिन का समय दिया गया था जो कि साक्ष्य के आधार पर लिखित में मौजूद है  जब मामले पर पत्रकारों द्वारा  जानकारी मांगी जा रही थी तो उपनिरीक्षक द्वारा लोगो को मामले से गुमराह कर महिला के पति पत्नी के विवाद को बताकर जमीनी विवाद बताया गया जिससे इस  मामले का कोई लेना देना ही नही था जब की महिला पत्रकार के  पति पत्नी का विवाद  माननीय न्यायालय के विचाराधीन है जिसपर सम्बंधित थाने से महिला पत्रकार के पति पर N.B.W  का  लगभग 2 वर्ष से वारंट भी जारी है तो साहब मामला ये उठता है कि उक्त मामले में क्या उपनिरीक्षक द्वारा आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा था साहब जब महिला पत्रकार के पति पत्नी के मामले में माननीय न्यायालय में विचाराधीन है तो थाना क्षेत्र क्या खुद न्यायालय बनकर फैसले करेगा कि कौन गलत कौन सही

लेकिन उपनिरीक्षक द्वारा लोगो को 17/ 12/2020 के गाड़ी के प्रकरण से  गुमराह करने की पूरी कोशिश तो को गयी लेकिन साहब शायद यह भूल गए थे कि महिला ने थाने में लिखित तहरीर दी है जिसकी दूसरी कॉपी व थाने द्वारा  आरोपियों से लिखाए गए पत्र की कॉपी महिला पत्रकार के पास भी है जिसपर तहरीर की  दिनांक 17/12/2020 व आरोपियों द्वारा लिखे गए पत्र 18/12/2020 भी लिखी है 

गुमराह करने के बावजूद क़लम के सिपाहियों ने अपने क़लम की ताक़त से पीड़ित महिला पत्रकार को न्याय दिलाया और आरोपियों पर गम्भीर धारा में मुक़दमा भी दर्ज हुआ पर अब देखना ये है कि शासन व प्रशासन के आला अधिकारियों द्वारा उपनिरीक्षक द्वारा किए गए महिला पत्रकार से अभद्रता ध्क्का मुक़्क़ी गाली गलौज पर उपनिरीक्षक अखिलेश पर क्या कार्यवाही की जाएगी

और आरोपियों पर दर्ज मुक़दमे 420.406.504.506 में आगे की कार्यवाही कब होगी।

वही पीड़ित महिला पत्रकार ने बताया कि आरोपियों द्वारा महिला को लगातार फोन किया  जा रहा है लेकिन महिला पत्रकार आरोपियों का  फोन नही  उठा रही है

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