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Friday, January 8, 2021

किसान ने केले की खेती कर बढ़ाया जिले का मान, 10 लोगों को भी अलग से दिया रोजगार, कायम किया एक मिसाल

 अमेठी विजय कुमार सिंह


अमेठी : सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए निरंतर नई-नई योजनाएं संचालित कर रही है जिसका लाभ किसान भाई उठाकर अपनी आय में बढ़ोतरी कर रहे हैं। सरकार द्वारा परंपरागत खेती सहित औद्यानिक व बागवानी को लेकर अनेक योजनाएं संचालित की गई हैं।
इसी क्रम में जनपद अमेठी के संग्रामपुर विकासखंड के पूरे मुहीब शाह डेवड़सा निवासी श्री शैलेन्द्र प्रताप सिंह खेती पर विशेष ध्यान देते हैं।वे खेती तो करते ही हैं साथ ही 10 लोगों को अपने साथ जोड़ कर रोजगार भी दिया है। उन्होंने बताया कि साल 2017 - 2018 में केले की खेती की शुरुआत की और 2000 हजार केले के पौधे खरीद कर लगाया। 7 से 8 बार जुताई की गई व 24 से 25 बार सिचाई की गई थी जिसमे लगभग 1 लाख 20 हजार का कुल खर्च आया था। इसकी खेती की शुरुआत 15 जुलाई से 15 अगस्त के मध्य की जाती है, अप्रैल से लेकर मई माह तक फूल आते हैं और सितंबर अक्टूबर महीने तक फल तैयार हो जाते हैं जिन्हें व्यापारी स्वयम आकर खरीद लेते हैं जिसमे खर्च निकालने के बाद ठीक ठाक मुनाफा हो हुआ।
उन्होंने बताया कि इसके बाद इस खेती में दिलचस्पी बढ़ती गई और अगले साल 2018 -2019 में 3800 पौध लगाए। इसके अगले साल 2019 - 2020 में इसकी खेती बढ़ाकर 9300 केले के पौध लगाए और लागत लगभग 6 लाख की आयी। उन्होंने आगे बताया कि इसके लिये 15 हॉर्सपावर के 4 ट्रैक्टर भी लेना पड़ा जिससे खुद ही जुताई गुड़ाई करते हैं। बीच बीच मे कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी किया जाता है जिसे फलों को नुकसान न हो सके। इस काम मे उनके बड़े बेटे यशकेन्द्र सिंह भी हाथ बटाते हैं।
उन्होंने बताया कि केले की खेती में मेहनत तो जरूर खूब करना पड़ता है और फायदा भी लागत के अनुसार अच्छा खासा हो जाता है। 1 बीघे में 700 से 800 पेड़ 6 फिट की दूरी पर लगाया जाता है जिसमे एक खास बात पर ज्यादा ध्यान देना होता है और वो ये कि सारे पेड़ एक सीध में लाइन से लगाने होते हैं जिससे जुताई में कोई दिक्कत नहीं आये। इस खेती में उद्यान विभाग अमेठी का भी खूब सहयोग मिलता है जो समय समय पर आकर खेती करने के तरीके बताते हैं और उत्साह वर्धन भी करते हैं। इसी खेती के साथ इस बार परवल की खेती भी करना शुरू कर दिए हैं।
किसान शैलेन्द्र सिंह के बेटे यशकेन्द्र सिंह ने बताया कि उद्यान विभाग से उन्हें नियत अनुदान भी प्राप्त हुआ, जिससे उनकी आय में बढ़ोत्तरी भी हुई है जिस वजह से वे आज आत्मनिर्भर हैं। किसान शैलेन्द्र सिंह ने जनपद के किसान भाईयों से अपील करते हुए कहा है कि वे परम्परागत खेती के साथ-साथ औद्यानिक खेती करें तथा उद्यान विभाग से जुड़कर सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी व लाभ प्राप्त करें।

आपको बता दें किसान शैलेन्द्र सिंह कंसापुर के पूर्व प्रधान नागेन्द्र सिंह उर्फ भोले सिंह के बड़े भाई हैं जो क्षेत्र में अपनी पारिवारिक प्रतिष्ठा के लिये भी बखूबी जाने जाते हैं। ट्रैक्टर से खुद ही जुताई क्यों करते हैं, ये पूंछे जाने पर हंसते हुए कहा कि अपना काम करने में कोई शर्म व संकोच नहीं होता है। हमे काम करते हुए देख कर दूसरे लोग भी खुद कुछ करना शुरू कर दिए हैं जिसे देखकर बेहद खुशी होती है।

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