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Monday, February 1, 2021

बजट 2021 में अहम है कबाड़ नीति, पर्यावरण के लिए तीन चीजों पर फोकस: सीएसई

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की पर्यावरणविद अनुमिता राय चौधरी का कहना है कि अगर पर्यावरण के लिहाज से देखें तो यह वेस्‍ट (व्‍यर्थ), वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण पर फोकस करता हुआ बजट है.

नई दिल्‍ली. आम बजट 2021 (Budget 2021) में पर्यावरण को लेकर फोकस किया गया है. वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किए गए बजट में स्‍क्रैपिंग पॉलिसी (Scrapping Policy) लाने की बात कही गई है. भारत में पुराने वाहनों से लगातार बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए पर्यावरणविद लंबे समय से प्रदूषण (Pollution) फैलाने वाले पुराने वाहनों के स्‍क्रैपेज को लेकर मांग कर रहे थे. सीएसई ने खुद स्‍क्रैपेज पॉलिसी पर एक रिपोर्ट निकाली थी जिसपर पिछले पांच साल से चर्चा भी हो रही थी. अब अगर बजट 2021-22 में व्‍हीकल स्‍क्रैपेज पॉलिसी (Vehicle Scrappage Policy) लाने की बात कही गई है तो यह अच्‍छी बात है. यह कहना है सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की एक्‍जीक्‍यूटिव डायरेक्‍टर अनुमिता राय चौधरी का.

न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में अनुमिता राय चौधरी ने कहा कि बजट काफी ठीक है लेकिन असली मसला उसके उपयोग को लेकर है. यह पैसा किन जगहों पर खर्च किया जाना है. पिछले साल बजट 2020 में सरकार ने हवा को शुद्ध करने के लिए 4400 करोड़ रुपये दिए थे. इसके लिए 42 प्रमुख प्रदूषित शहरों पर यह पैसा खर्च होना था. हालांकि वह पैसा कैसे-कहां खर्च हुआ और उसका क्‍या परिणाम रहा यह तो स्‍टेटस रिपोर्ट आने के बाद ही कहा जाएगा लेकिन इस मद में इस साल भी इसमें 2267 करोड़ रुपये बढ़ाया गया है तो यह राहत की बात है.

कोरोना महामारी और इस दौरान प्रदूषण एक बड़ी समस्‍या रहा है. इस दौरान बस ट्रांसपोर्ट सेवा पर भी बड़ा खराब प्रभाव पड़ा था और हम लोगों की मांग भी थी जिस पर इस बजट में ध्‍यान दिया गया है बसों के लिए करीब 1800
न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में अनुमिता राय चौधरी ने कहा कि बजट काफी ठीक है लेकिन असली मसला उसके उपयोग को लेकर है. यह पैसा किन जगहों पर खर्च किया जाना है. पिछले साल बजट 2020 में सरकार ने हवा को शुद्ध करने के लिए 4400 करोड़ रुपये दिए थे. इसके लिए 42 प्रमुख प्रदूषित शहरों पर यह पैसा खर्च होना था. हालांकि वह पैसा कैसे-कहां खर्च हुआ और उसका क्‍या परिणाम रहा यह तो स्‍टेटस रिपोर्ट आने के बाद ही कहा जाएगा लेकिन इस मद में इस साल भी इसमें 2267 करोड़ रुपये बढ़ाया गया है तो यह राहत की बात है.

कोरोना महामारी और इस दौरान प्रदूषण एक बड़ी समस्‍या रहा है. इस दौरान बस ट्रांसपोर्ट सेवा पर भी बड़ा खराब प्रभाव पड़ा था और हम लोगों की मांग भी थी जिस पर इस बजट में ध्‍यान दिया गया है बसों के लिए करीब 1800
न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में अनुमिता राय चौधरी ने कहा कि बजट काफी ठीक है लेकिन असली मसला उसके उपयोग को लेकर है. यह पैसा किन जगहों पर खर्च किया जाना है. पिछले साल बजट 2020 में सरकार ने हवा को शुद्ध करने के लिए 4400 करोड़ रुपये दिए थे. इसके लिए 42 प्रमुख प्रदूषित शहरों पर यह पैसा खर्च होना था. हालांकि वह पैसा कैसे-कहां खर्च हुआ और उसका क्‍या परिणाम रहा यह तो स्‍टेटस रिपोर्ट आने के बाद ही कहा जाएगा लेकिन इस मद में इस साल भी इसमें 2267 करोड़ रुपये बढ़ाया गया है तो यह राहत की बात है.

कोरोना महामारी और इस दौरान प्रदूषण एक बड़ी समस्‍या रहा है. इस दौरान बस ट्रांसपोर्ट सेवा पर भी बड़ा खराब प्रभाव पड़ा था और हम लोगों की मांग भी थी जिस पर इस बजट में ध्‍यान दिया गया है बसों के लिए    करीब1800 करोड़ रुपये के पैकेज की बात कही गई है तो इससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में भी सुधार होगा. वहीं 15 साल पुराने सार्वजनिक और 20 साल पुराने निजी वाहनों की फिटनेस की जांच और स्‍क्रेपिंग से फायदा होगा.|

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