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Tuesday, February 2, 2021

मातापिता

माता पिता भी तो इंसान हैं हमारे सपनों को पूरा करने के लिए न जाने अपने कितने अरमानों को अधूरें  सपनों को त्याग दिये  होंगे बिना पूरा किये। उनके सपने चाहें पूरे हुए या नहीं वो उसे भूल नहीं पाते उन अधूरे सपनों की एक पोटली बनाकर रख देते हैं। और हमारा भविष्य संवारने में जुट जाते हैं स्वयं को भूल जाते हैं।


और हम बच्चें बस उनसे मांगते ही रहते  हैं कभी ये नहीं सोंच पाते कि हमें भी उनके लिये कुछ करना  चाहिए ।
हमारे सपनों को पूरा करते करतें वो खुद खो जाते हैं ।
समय अपनी गति से चलते रहता है और एक वक़्त ऐसा आता है जब हम उनकी जगह स्वयं को  पाते हैं जब हम माता पिता बनते हैं और अपने सपनों को अपने बच्चों के लिए त्यागते है। पर तब भी हमारा स्वार्थी मन अपने माता पिता के बारे में नहीं सोच पाता एक पुराना सामान समझकर या तो फेंक देते हैं या घर के किसी कोने में निरर्थक सा रख देते हैं हमें ये तक याद नहीं रहता कि आज हम जो भी हैं ये उनकी देन हैं अपने सुख सुविधाओं के मद में खोये रहतें हैं मिटा देते हैं उनके त्याग और प्यार को ।

जितना प्यार और दुलार हम अपने बच्चों से करते   हैं हमारें माता पिता ने  भी हमें उतने ही प्यार दुलार से पाला पोषा था। जितनी सुख सुविधाएं हम  अपने बच्चों को देते हैं वो भी हमें दिये थें। हाँ ये जरूर हो सकता हैं कि कुछ अभावों के चलतें वो हमें सबकुछ नहीं दे पाये होंगे परंतु हमारी ज़रूरतें  और जिम्मेदारियां बखूबी निभाये और पूरे कियें। ये उनके सफलतापूर्वक निर्वहन किये गये  जिम्मेदारियों का ही प्रतिफल है कि आज हम सफल हैं।

हमसे वो चाहते ही  क्या हैं बस थोड़ा सा प्यार और सम्मान क्या हम इतना भी नहीं दे सकते उन्हें जिन्होनें हमें जीवन दिया जीना सिखाया ,हमारे डगमगाते क़दमों को चलना सिखाया तो क्या हम उनके लड़खड़ाते क़दमों को अपनी मजबूत बांहों का सहारा नहीं दे सकते ??

क्या सही और क्या ग़लत सोचिएगा जरूर मेरी सोंच तो यही कहती हैं जो काम करने से पहले सोचना न पड़े वो सही। और जो करने से पहले और करने के  बाद सोचना पड़े वो गलत। सही का मार्ग मुश्किल जरूर होता है किन्तु सही होता है जबकि गलत का रास्ता बहुत आसान होता है फिर भी गलत ही होता है।

माता पिता बनने में और होने में बहुत अंतर होता है मां बाप कोई भी बन सकता हैं कितुं माता पिता वो होते हैं जो अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हैं सिर्फ हमें जीवन ही नहीं देते अपितु जीने  योग्य जिन्दगी देते हैं ।

आज हम जो भी हैं इसलिए हैं कि हमें इतने अच्छे माता पिता मिले जिन्होंने अपनी खुशियों की परवाह किये बिना हमें कामयाब बनाया  जिसका ऋण  हम जीवन भर नही उतार सकते ।

जो हमें दिन रात अनमोल दुआंएं देते रहते हैं बिना किसी स्वार्थ के हमारी सारी बलाएं स्वयं के लिए मागते रहते हैं ईश्वर से  और हमारे लिए सिर्फ दुआएं, कितने अनमोल होते हैं हमारे माता पिता। अब ये हम पर निर्भर हैं हम अपना कल कैसा चाहते हैं हमारा कल उतना ही सुखद होगा जितना उनका आज।

"आदर एक निवेश हैं"


प्रफुल्ल सिंह "बेचैन कलम"

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