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Monday, March 1, 2021

चालाक चीन से सतर्कता की जरूरत

          पिछले कई महीनों से भारत और चीन के बीच उतार-चढ़ाव की स्थिति जो बनी थी उसमें थोड़ा परिवर्तन दिखाई दे रहा है तथा चीन ने पैगोगं झील से पीछे हटने का फैसला जो किया है जो कहीं ना कहीं भारत और चीन के बीच चली आ रही लंबे समय के विवाद में थोड़ी कमी दिखाई दे रही है | यह सिर्फ एक क्षेत्र का ही मामला है अभी चीन से और भी दूसरे क्षेत्रों से भारत का विवाद है उस पर भी नजर रखने की आवश्यकता है | जिस प्रकार भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में चीन से चली आ रही विवाद की सूची के बारे में देश को विस्तार पूर्वक  बताते हुए चीन को आड़े हाथो लिया है यहाँ तक तो ठीक है परंतु इतने जल्दी चीन पर विश्वास करना अभी भारत के लिए ठीक नहीं होगा क्योंकि चीन का इतिहास हमेशा धोखा देना और विस्तार वादी नीति का ही रहा है पर फिर भी यहां यह समझना भी आवश्यक है कि आखिर चीन पैगोंग झील से पीछे हटने को क्यों तैयार हुआ | 

             इसके लिए भारत की कूटनीति, राजनीतिक, आर्थिक , सैन्य दबाव और  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के खिलाफ एक माहौल को खड़ा करना रहा है | जिसके कारण चीन भारत से डरने लगा कूटनीतिक व रणनीति के तहत भारत ने क्वाड संगठन में नई प्रक्रिया  के तहत जिस प्रकार से मालाबार संयुक्त अभ्यास किया | जिसमें अमेरिका और जापान के साथ आस्ट्रेलिया को भी आमंत्रित किया जिससे संगठन में एक नई ताकत मिली और चीन को भारत ने एक सख्त संदेश देने का जो कार्य किया है | इससे भारत अपनी इस रणनीति में सफल रहा इसके साथ ही कोरोना महामारी के अंतर्गत चीन का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो असंतोष है उसे भी भारत ने अच्छे तरीके से भुनाने का प्रयास किया | जिससे चीन कहीं ना कहीं लड़खड़ाता हुआ नजर आ रहा है | इसके साथ भारत के द्वारा आर्थिक प्रतिबंध के तहत कई चीनी एप्प पर प्रतिबंध लगाने से चीन को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है क्योंकि दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहां पर पूरे विश्व को एक अच्छा बाजार नजर आता है परंतु भारत ने सही समय पर सही निर्णय लेते हुए चीन के खिलाफ जो आर्थिक प्रतिबंध लगाने का दृढ निश्चय कार्य किया इससे चीन की आर्थिक स्थिति कहीं ना कहीं लड़खड़ाती हुए नजर आई क्योंकि चीन दुनिया में महाशक्ति बनने की दिशा में चल रहा था परंतु उसके इस रास्ते में रोड़ा भारत ने आर्थिक रूप से लगाकर उसे रोकने का और कड़ा संदेश देने का जो प्रयास किया यह अपने आप में बहुत बड़ा कार्य था | 
           ऐसे में भारत ने आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए चीन की दुखती नस पर जो चोट पहुंचाकर काम किया है तथा इसी कड़ी में भारत ने चीन से आने वाले प्रत्यक्ष रूप से विदेशी निवेश अर्थात एफडीआई को लेकर भी जो नए कड़े नियम बनाए जिससे चीन की दूरसंचार कंपनियों के लिए राह बहुत मुश्किल भरी हो गई | इन कदमों से जहां भारत की साख दुनिया में बड़ी वहीं चीन की बौखलाहट भरी प्रतिक्रिया भी हम सब ने देखी और महसूस की परंतु भारत उन प्रतिक्रियाओं के समक्ष कभी भी झुका नहीं बल्कि भारत ने समय-समय पर चीन के खिलाफ कड़े कदम उठाते हुए जो कार्य किया है, जिससे भारत का निशाना एकदम चीन पर सटीक  प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार से लगा है, और दुनिया ने भारत के इस प्रकार के कदम को जहां सराहा वहीं भारत को एशिया की उभरती हुई महाशक्ति के रूप में भी देखा | 
           इसके साथ ही भारत ने चीन के खिलाफ अपनी सेनाओं को हर मोर्चे पर जिस निडरता के साथ खड़ा कर चीन को विवश कर दिया | इससे भी कहीं ना कहीं चीन का घमंड खत्म हुआ है | समानता चीन पड़ोसी देशों को अपनी सैन्य ताकत से ही डराने का प्रयास करता रहा है परंतु इस बार चीन की यह रणनीति भारत के खिलाफ काम नहीं आई और भारत ने उसे परास्त करते हुए अपनी सेना को खुली छूट देकर जिस तरीके से चीन के सामने खड़ा किया और मुंह तोड़ जवाब दिया जिसकी चाहुओर प्रशंसा भी हुई | वैसे तो भारत और चीन के बीच बहुत ज्यादा विश्वसनीय संबंध आज तक नहीं स्थापित हो पाए हैं क्योंकि चीन भारत के हर क्षेत्र में रोड़े का कार्य करता हुआ चला रहा है जबकि भारत ने हमेशा चीन का सहयोग कर उसे यूनाइटेड संघ का सदस्य बनवाने में मदद की थी परंतु चीन हमेशा भारत के हर एक पक्ष में विरोध करता रहा है | भारत और चीन के बीच वर्तमान में तब संबंध बिगड़े जब गलवान की घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच सीमा विवाद को लेकर बिना हथियार के खूनी संघर्ष हुआ । जिसमें भारत के जांबाज बीस जवान शहीद हो गए थे | जिससे भारत के सैनिकों में आक्रोश था तब इसी संघर्ष में भारत ने अपने शहीद सैनिकों का बदला उसी रणनीति के तहत लिया और भारत के बीर सैनिकों ने चीन के कई सैनिकों को हताहत किया लेकिन उसने कभी भी यह स्वीकार नहीं किया कि उसके कितने सैनिक मारे गए | लेकिन रूस की एक एजेंसी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार ऐसा माना गया कि इस झड़प में चीन के 45 से 50 सैनिकों के मरने की बात सामने आई | इस नुकसान से चीन को स्पष्ट संदेश मिला कि भारत उसे करारा जवाब हर क्षेत्र में देने के लिए आज तैयार है क्योंकि अब यह भारत 1962 वाला नहीं 2020 वाला भारत है | चीन की अब दादागिरी किसी भी प्रकार से भारत या कोई भी देश स्वीकार नहीं करेगा और सभी चीन को जवाब देने के लिए तैयार थे | जिसका भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जापान , ऑस्ट्रेलिया, इजरायल, अमेरिका और ब्रिटेन  जैसे बड़े देश तथा भारत की सीमाओं को छूने वाले कुछ छोटे देश भी भारत के साथ सहयोग करने और हर क्षेत्र में सहायता देने के लिए तैयार थे | जिसके कारण चीन की बौखलाहट और बढ़ गई और कहीं ना कहीं चीन ये समझने लगा कि भारत से किसी भी क्षेत्र पर अब निपटना कठिन है । 
          सीमा पर भारत की सेना द्वारा चीन के सैनिकों को मौत के घाट उतारना, आर्थिक रूप से कड़े प्रतिबंध लगाना, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों द्वारा भारत का सहयोग करना एवं भारत की दुनिया में एक अलग पहचान बनना 
जिससे चीन कहीं ना कहीं भारत की शक्ति से लड़खड़ा गया और उसे आज पीछे हटने पर विवश होना पड़ा | यदि हम चीन की आंतरिक स्थिति की बात करें तो चीन के राष्ट्रपति के खिलाफ बहुत ज्यादा आक्रोश है और वह ध्यान भटकाने के लिए इस प्रकार से विस्तारवादी नीति को अपनाता है ताकि वह अपनी अंतः कलाह का ध्यान भटका सके, भारत ने उसकी इस रणनीति को भी फेल कर दिया | फिर भी भारत को अब यह देखना पड़ेगा कि आने वाले समय में चीन की क्या रणनीति है ? क्योंकि चीन हमेशा रुक कर किसी भी देश पर बार करता है और चीन एक विश्वसनीय देश नहीं है, हमेशा धोखे से ही कार्य करता है उसके इतिहास को देखते हैं तो चीन की रणनीति हमेशा हमें समझ में आती है धोखे से वार करना | 
           वर्तमान में भारत के लिए आवश्यक है कि वह चीन को संदेश देने के साथ-साथ उस पर आपनी पैनी नजर भी रखे क्योंकि कभी भी धोखे से चीन बार कर सकता है | आज वह घायल भी है क्योंकि भारत ने चीन को हर एक मोर्चे पर असफल करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन को पूरी तरीके से विफल कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हर क्षेत्र में अग्रणी एवं उत्कृष्ट रहकर भारत ने अपनी शक्ति का जो प्रदर्शन किया है निसन्देह पूरा विश्व आज भारत की शक्ति का लोहा मानने के लिए विवश है | 
     अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद शायद चीन ने यह सोचा था की वाइडन की नई सरकार बनने से चीन को कुछ सहयोग मिलेंगा परंतु वाइडन प्रशासन ने सख्त संदेश देते हुए चीन को निराश किया इसके साथ ही वाइडन प्रशासन ने कहा कि चीन से तकनीकी, व्यापार, सागर तथा अन्य क्षेत्रों में शक्ति से निपटने की आज जरूरत है का जो संदेश दिया जिससे भारत को ताकत मिली तो चीन को जो उम्मीद थी बाइडन की सरकार से उसे निराशा हुई | इससे यह स्पष्ट होता है कि कहीं ना कहीं भारत की विदेश नीति तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छाशक्ति बहुत ताकतवर दिखाई दी उन्होंने दुनिया को दिखा दिया कि भारत चीन की आंख में आंख डालकर खड़ा हो सकता है तथा उतनी ही ताकत से जवाब देने के लिए भी आज भारत तैयार है | क्योंकि भारत ने कभी किसी के साथ विस्तार वादी नीति का प्रयोग नहीं किया है और ना ही भारत कभी किसी पड़ोसी देश को डराना चाहता है | नरेंद्र मोदी ने अपनी सत्ता संभालते ही कहा था कि भारत ना किसी को डराना चाहता है बल्कि भारत आंख में आंख मिला कर बात करने की ताकत रखता है इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने जिस प्रकार कोरोना महामारी को सकारात्मक दिशा में बदलने का कार्य करते हुए आत्मनिर्भर भारत अभियान के माध्यम से चुनौती को अवसर में बदला है | उनके इस नेतृत्व में भारतीय विदेश नीति के नए तेवरों वाले कामों को भी एक नई दिशा मिली है तथा दुनिया इस बात को समझने लगी है कि भारत उभरती हुई नई शक्ति का एक सहयोगी देश है | 
         प्रधानमंत्री की इच्छा शक्ति और भारत सरकार के दृढ़ निर्णय के कारण आज भले ही चीन पीछे हटने को तैयार है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अभी भी हालात अस्थिर ही बने रहेंगे क्योंकि विगत कई महीनों से दोनों देशों के बीच जो दरार पड़ी है वह इतने जल्दी से भरने वाली नहीं है तथा भारत भी चीन पर इतनी जल्दी विश्वास करने वाला नही है और यहां जरूरी भी है कि भारत , चीन से और अधिक चौकन्ना रहे क्योंकि चीन हमेशा धोखे से तथा रुक कर ही पीठ पर वार करता है और पीठ पर वार करने वाला हमेशा कुख्यात डरपोक और धोकेवाज होता है | 


भारत आंख में आंख मिलाकर , सामना करेगा | 
हुई जरूरत तो अब  घर में , जाकर बार करेगा || 
यह बदलते हुए युग में,भारत का नया स्वरूप है , 
आत्म निर्भर भारत से,दुनिया मे पहचान करेगा || 
 

 
                         पूर्व सैनिक 
                  प्रमोद कुमार चौहान 

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