लघु उद्योगों में सरकार की भूमिका


भारत देश एक बहुत बड़ी जनसंख्या वाला देश है एक बड़ी जनसंख्या होने के कारण यहां पर बेरोजगारी और गरीबी चुनौतियों के रूप में प्रत्येक आने वाली सरकार के लिए परेशानी और संघर्ष का विषय बन जाती हैं। हमारे देश में 35 से कम आयु वाले युवा वर्ग की बहुत बड़ी संख्या है। जिसके आधार पर हम एक युवा देश होने का दम भरते हैं। किन्तु यही युवा बेरोजगारी और गरीबी से परेशान संघर्ष में अपनी युवावस्था गुजारते हैं। जिसके कारण उनके पास बहुत सा खाली समय होता है। जिसके चलते हमारे देश में चोरी-डकैती, महिलाओं के साथ होने वाले अपराध, चाल सांझी इत्यादि अपराधों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। एक ओर हम अपने देश को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देख रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर हमारे में बेरोजगारों का बढ़ता आंकड़ा एक बहुत बड़ी समस्या है। हमारे देश में प्रत्येक युवा सरकारी नौकरी का सपना देखता है। लेकिन उनमें से एक तिहाई लोगों को ही सरकारी नौकरी प्राप्त हो पातीं है। जिसके चलते बहुत से युवा प्राइवेट नौकरी के सहारे अपना जीवन जीते हैं। कुछ युवक छोटा-मोटा अपना व्यवसाय करके जीवन जीतें है। किन्तु बहुत बड़ी संख्या में ऐसे युवक होते हैं, जिन्हें अपना जीवन बेरोजगारी में जीना पड़ता है। उनके पास कोई भी रास्ता उपलब्ध नहीं हो पाता है। जब हमारे देश में बेरोजगारी इतनी अधिक है। तब हम कैसे आत्मनिर्भर बनेंगे। देश के आत्मनिर्भर बनने के लिए हमारा आत्मनिर्भर होना जरूरी है। लेकिन हमारे देश में लोगों के हुनर को बढ़ावा भी नहीं दिया जाता है और ना ही उनके हुनर के आधार पर उनको कार्य मिलता है। हमारे यहां इंजीनियरिंग और साइंस यह दो मुख्य विषय है। जिनके आधार पर आसानी से नौकरियां प्राप्त की जा सकती है चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट। इसके बाद वह अन्य विषय जिनको हम बड़ी जनसंख्या को पढ़ा रहें है। वह अध्यापक, या कुछ सरकारी नौकरियों और कुछ प्राइवेट नौकरियां का आधार बनती हैं। 


एक कड़वा सच जिसके चलते हमारे देश के अधिकतर शिक्षित युवकों को बेरोजगारी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ता है। व्यापार करना हमारे देश में एक बहुत बड़ी चुनौती है। अधिकतर व्यापार कार्य वहीं कर पाते हैं, जिनके  घरों में पहले से कोई व्यापार कर रहा हो। इंडिया स्पेंड की  रिपोर्ट में इकॉनॉमिक सर्वे 2016-17 के हवाले से बताया गया है कि 2013-14 के 4.9 प्रतिशत की तुलना में बेरोजगारी की दर बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई है। जुलाई 2014 से दिसंबर 2016 के बीच 8 मुख्य सेक्टर्स में 641000 नए रोजगार उत्पन्न हुए। यह उत्पन्न किए गए जबकि जुलाई 2011 से दिसंबर 2013 के मध्य 1280000 नए रोजगार पैदा हुए थे। 

बड़ी संख्या में अपने घरों की ओर होता मजदूरों का पलायन। यह भी बताता है कि हम बड़े राज्यों में रोजगार की कमी को पूरा करने का प्रयास करते हैं। किन्तु छोटे राज्यों या गांवों में हम यह कोशिश नहीं कर पा रहे कि वहां रहने वाले नागरिकों को उसी स्थान पर रोजगार की प्राप्ति हो जाए और वह अपना घर छोड़ किसी अन्य राज्य में काम की तलाश में ना जाए।  देश का आत्मनिर्भर बनना जरूरी है क्योंकि देश के हाथ में बंधने से ही हमारे आपने बदलने का सपना पूरा होगा किंतु उससे पहले हमें आर्थिक रूप से मजबूत होने की आवश्यकता है जिसके लिए हमें आवश्यक है अधिक से अधिक रोजगार ताकि हमारे देश में रहने वाले सभी व्यक्तियों की आवश्यकताएं पूरी होने के साथ उनकी बेरोजगारी भी खत्म हो सके। हमें और सरकार को चाहिए कि हम केवल चंद नौकरियों के भरोसे ही अपने युवाओं को उम्मीद लगा कर बैठे ना रहने दें। हमें अपने देश में भ्रष्टाचार को खत्म करना होगा। ताकि सरकार द्वारा बनाई जाने वाली ऐसी योजनाएं जिनके प्रयोग से युवा अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। उनका लाभ वह आम लोग उठा सकें जिनकी इन्हें आवश्यक है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि बैंकों द्वारा झूठें ऋण देकर अपना और अपनों से जुड़े लोगों का ही लाभ करवाएं। क्योंकि इस प्रकार से यदि भ्रष्टाचार बना रहा तो कभी भी हम अपने देश से बेरोजगारी खत्म नहीं कर पाएंगे और देश का आत्मनिर्भर बनने का सपना बस एक सपना ही रह जाएगा। अधिक से अधिक लघु उद्योगों को कार्य की प्राप्ति होने चाहिए। ताकि हमारे यहां पर जो छोटे लघु उद्योग चल रहे हैं वह समाप्त ना हो जाए। जिसका डर बहुत ही समय से हमारे यहां बना हुआ है। सरकार को ऐसे छोटे लघु उद्योगों को मदद देने की आवश्यकता है ताकि वहां अपना सामान देश में ही नहीं विदेश में भी आसानी से बेच सकें। हमारे देश में हमेशा से ही हाथों द्वारा की जाने वाली सिलाई, कढ़ाई, पेंटिंग, इत्यादि कार्य किए जाते हैं। जिनका आज हमारे देश में प्रचलन बहुत कम है और जिसके कारण हमारे देश में ऐसे कार्य करने वाले व्यक्तियों के काम को अधिक महत्व नहीं दिया जाता है। बस कुछ बड़े नाम और कुछ बड़े लेबल वाले लोगों को ही इस प्रकार के कार्य से लाभ की प्राप्ति होती हैं। किंतु यह भी एक सकते हैं कि इस प्रकार का कार्य केवल हमारे ही देश में नहीं, बाहर से भी देशों में बहुत पसंद किया जाता है। लेकिन हमारे देश में ऐसे कार्य करने वाले लोगों के लिए कोई मार्गदर्शन नहीं है जिसके चलते उनकी यह कला बेकार हो जाती है। यदि हमारी सरकार ऐसे लोगों के कार्य को समर्थन दे और हमारे ही देश में नहीं, विदेशों में भी इन लोगों के द्वारा तैयार की जाने वाली वस्तु को बेचने का प्रबंध करें। इससे हम ऐसे कार्य करने वालों अच्छा रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही बेरोजगारी से परेशान युवकों को एक नया कार्य भी दे सकते हैं। साथ ही अपने देश की संस्कृति और कला को बचाने में भी अपना सहयोग प्रदान कर सकते हैं। देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमें आवश्यकता है। अपने देश के युवकों का हुनर समझने की ताकि उनको उनके हुनर के हिसाब से उनके ही राज्य और घरों के आसपास कार्य दिलाया जा सके ताकि उन्हें अपना घर छोड़कर किसी अन्य राज्य या देश में जाने की आवश्यकता ना पड़े। यही एक कार्य है जिसके आधार पर हम अपने यहां पर बेरोजगारी खत्म कर सकते हैं और अधिक से अधिक लोगों को अपने घरों से पलायन करने से रोक सकते हैं। 

         राखी सरोज

 


 




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