प्रकृति से प्यार

प्रकृति,जो है अपने नाम में ही है परिपूर्ण।

सुख, प्रेम,दया ,छाया, संतृप्ति है जिसके गुण।

 

परोपकार है जिसके संस्कार, लेती नहीं किसी के उपकार।

सेवा ही प्रदान करती हैं कभी जननी,तो कभी संरक्षक बनकर।

 

माँ की ही छवि है इनमें ,केवल देने का भाव रखती हैं।

लाख कष्ट देते हैं संतान,फिर भी सेवाभाव से पीछे हटती नहीं हैं।

 

प्रकृति ने दिखाया हमेशा हम पर  प्यार,

अब हमारी बारी है चलो हम भी करें "प्रकृति से प्यार"।

 

Comments

Popular posts from this blog

सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की जन्म कुण्डली जानिये : पं0 सुधांशू तिवारी

राघोपुर में बिजली चोरी करते पकड़े गए 11 लोग जेई ने दर्ज कराई प्राथमिकी

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमन्त्री केशव प्रसाद मौर्य की जीवन कुण्डली : पं. सुधांशु तिवारी के साथ