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Saturday, May 9, 2020

 वर्तमान पर भारी भविष्य की बेरोजगारी

वर्तमान में समूची दुनिया के सम्मुख कोविड -19 अर्थात कोरोना महामारी के चलते भविष्य की बेरोजगारी रूपी सुरसा मुह खोले खड़ी है। जगह-जगह लॉकडाउन से तंगेहाल मजदूरों का पलायन तीव्र गति से हो रहा है। वैश्विक रिपोर्टों पर नजर डालें तो पता चलता है कि सम्पूर्ण विश्व में लगभग 2.5 करोड़ रोजगार पूर्णतः ख़तम हो चुका है।
अगर बात अपने भारत देश की करें तो "सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी" की रिपोर्ट के अनुसार भारत में बेरोजगारी दर 27.11 फीसदी हो गई है जो बेहद चिंताजनक विषय है। भारत के अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले महानगरों की हालत और भी बद्तर है बात मुम्बई की करें तो यहाँ के शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 29.22%, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह बेरोजगारी 26.69%आंकी गई है।
बेरोजगारी की समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार के 1.70 लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय प्रोत्साहन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को आय व भोजन प्रबंधन में लग रहा है। ऐसे में बेरोजगारी से से निपटना बहुत बड़ी चुनौती है। किसी ने सोचा भी नहीं था कि कोई ऐसी भी महामारी आएगी जो वर्तमान की रोटी और भविष्य का जरिया दोनों छीन ले जायेगी।
बेरोजगारी पहले भी सरकारों के सम्मुख एक कठिन समस्या थी पर इस महामारी ने इसे इस हद तक बढ़ा दिया कि इससे निपटना एक टेढ़ी खीर सी लग रही है। बेरोजगार हुए लोग परिवार चलाने की चिंता से अवसादग्रस्त होते जा रहे हैं जिसके चलते कहीं न कहीं प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से अपराध का खतरा बढ़ेगा।
कोरोना महामारी से जैसे-तैसे सरकार लड़ ही लेगी मगर इस महामारी से उपज रही यह बेरोजगारी रूपी महामारी से सरकार कैसे निपटेगी एक कठिन प्रश्न है क्या पहले जैसी स्थिति फिर से हो पाएगी? सरकार इन बेरोजगारों को फिर से रोजगार मुहैया करा पाएगी? क्या जन-जीवन की गाड़ी फिर से पटरी पर दौड़ लगाएगी? यह सारे प्रश्न अभी तक निरुत्तर हैं जिनका उत्तर हर बेरोजगार पाना चाहता है।


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