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Wednesday, June 17, 2020

एफडीआई के विरोध मे कोयला खदान श्रमिक कांग्रेस द्वारा विरोध जनसभा

सांकतोड़िया : कोल इंडिया के निजीकरण, कमर्शियल माइनिंग को मंजूरी के विरोध समेत विभिन्न मांगों को लेकर आईएनटीटीयूसी से संबद्ध कोयला खदान श्रमिक कांग्रेस द्वारा इसीएल मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। आईएनटीटीयूसी प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद दोला सेन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में केकेएससी समर्थक विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। इस मौके पर टीएमसी जिलाध्यक्ष सह आसनसोल के मेयर जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि कोयला उद्योग का राष्ट्रीयकऱण 1973 में हुआ था, यह मुझे इसलिए याद रहता हैं कि क्योंकि इसी वर्ष मेरा जन्म हुआ था, मेरी मां बताती थी कि जब कोलियरी का राष्ट्रीयकरण हुआ था, उसी वर्ष मेरा जन्म हुआ था। देश में राजनीति को धर्म के आधार पर बांटने का प्रयास किया जा रहा है, पहले इन मुद्दों को हम गंभीरता से नहीं लेते थे, सोचते थे कि भाजपा धर्म के नाम पर समाज को क्यों बांटना चाहती है, इसके पीछे मूल साजिश यह था कि अन्य क्षेत्र में जो लड़ाई होती है, श्रमिकों, छात्रों, किसानों को अपने हक की लड़ाई से ध्यान हटाकर धर्म की लड़ाई में शामिल किया जाये। श्रमिक वर्ग के दिमाग से अपने अधिकार की रक्षा की लड़ाई से कैसे दूर किया जाये, इस साजिश के तहत ही पिछले चार-पांच साल में धर्म के आधार पर बांटा जा रहा है। इसका परिणाम सामने हैं, सालभर हमलोग श्रमिकों, छात्रों, किसानों के हक की लड़ाई लड़ते हैं, लेकिन चुनाव के समय वह हिन्दू-मुसलमान में बंट जाता है। आपलोगों से निवेदन है कि अगर सही में अपने हक की लड़ाई लड़ना चाहते हैं, तो चुनाव के समय हिन्दू-मुसलमान में नहीं बंटना होगा। 2014 में जब दोला दी यहां उम्मीदवार थी, उस वर्ष भी हमलोग हिन्दू-मुसलमान में बंट गये, आज जब केन्द्र सरकार जनविरोधी और श्रमिक विरोधी नीति ला रही है, तो संसद में एसे प्रतिनिधि की जरूरत थी कि जो हमारी आवाज उठा सकें, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि यहां का नुमाइंदा मोदी सरकार के पक्ष में हैं, ममता बनर्जी ने दोला दी को राज्यसभा में भेजा ताकि वह श्रमिकों के हक की आवाज सरकार के पास उठा सकें। आसनसोल-दुर्गापुर श्रमिकों का क्षेत्र हैं, इसलिए हमारे दर्द को पहचनानेवाला यहां से दिल्ली में होना चाहिए, यह इच्छा हुये बिना हमारी लड़ाई कभी पूरी नहीं होगी। कारपोरेट स्तर की बैठक में नहीं बुलाते हैं, सीएमडी भले ही हमें न बुलाये लेकिन यह तय है कि टीएमसी चाहेगी तभी इसीएल चलेगा, अगर प्रबंधन टेस्ट करना चाहे तो कर ले, यहां की जनता और श्रमिक हमारे साथ है। जब सारे यूनियनें हड़ताल बुलाती हैं, तो प्रबंधन केकेएससी के पास ही मदद के लिए आती है, टीएमसी और केकेएससी अपने दम पर उत्पादन भी करके दिखाती है। कोल इंडिया और इसीएल टीएमसी के बल पर ही चल रहा है, लेकिन आधिकारिक रूप पर मान्यता देने के समय इसे लंबित रखा जा रहा है, इसलिए आनेवाले समय में हमें सोचने की जरूरत है। केन्द्र सरकार ने एसा प्रस्ताव लाया है कि श्रमिकों के साथ अधिकारियों का भी बुरा होगा। 500 उद्योगपतियों को जब कोयला बेचने का अधिकार मिलेगा तब जीएम, सीएमडी का क्या महत्व रह जायेगा, पहले सिर्फ श्रमिक आतंकित थे, इस लड़ाई में अगर साथ नहीं देते हैं तो अधिकारियों का भी अस्तित्व समाप्त हो जायेगा। आप खुलकर हमारा साथ नहीं दे रहे हैं तो चुपचाप करें। चुपचाप टीएमसी को समर्थन करें, जहां भी टीएमसी और केकेएससी के लोग हैं, उनका समर्थन करें तभी कोल इंडिया, इसीएल और आपकी ठाट बचेगी। उन्होंने कहा कि इसीएल श्रमिकों के साथ ग्रामीण के जीवन में भी संकट आनेवाला है। निजी कंपनियों के आने के बाद गांव मे बिजली, सड़क, पानी, रास्ता, कम्यूनिटी हाल का काम गांव में कैसे होगा, श्रमिकों के साथ ही कोयलांचल के हर व्यक्ति के जीवन पर इसका प्रभाव पड़ेगा। इसका प्रचार टीएमसी द्वारा पूरे शिल्पांचल में किया जायेगा। लॉकडाउन के बाद एक लाख लोगों को लेकर इसीएल मुख्यालय का घेराव किया जायेगा, तब तक यह आन्दोलन तबतक चलेगा जब तक केकेएससी को कारपोरेट जेसीसी में प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है। भगवान इसीएल अधिकारियों को सद्बुद्धि दे।


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