जिंदगी भाग- एक




मन में न कोई उलझन रखना,

मेरे वास्ते बस जरा सी फुर्सत रखना।

 

होंगे हजार तेरी जिंदगी में अपने,

मगर भीड़ में बिछड़ों की थौड़ी खबर ऱखना,

मेरे वास्ते बस जरा सी फुर्सत रखना।

 

है वक्त के सितम मैं जानता हूँ, 

फासलों की हकीकत मैं जानता हूँ, 

हो कहीं भी बस जरा सी याद मगर रखना,

मेरे वास्ते बस जरा सी फुर्सत रखना।

 

मिल नहीं सकता मजबूरी होगी,

दिलों में न मगर कोई दुरी होगी,

मिले जो पल मेरी राह इक सफर रखना,

मेरे वास्ते बस जरा सी फुर्सत रखना।

 

रिस्ता ये वो है जो हमने चुना है,

इश्क इबादत है ऐसा सुना है,

हो चाहे कुछ रस्मों की इसके कदर रखना,

मेरे वास्ते बस जरा सी फुर्सत रखना।

 

हँसती हुई तेरी सुबह के साथी हजार होंगे,

रौशनी से नहायी शामें दिन गुलजार होंगे,

जो आये उदासी 'सुजल' ,याद मेरी डगर रखना,

मेरे वास्ते बस जरा सी फुर्सत रखना।

 

ब्रह्मानंद गर्ग सुजल

जैसलमेर

 

 


 



 

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