Wednesday, September 16, 2020

मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर समस्या 

मानसिक विकार का ग्राफ पूरी दुनिया में बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है, इसका प्रमुख कारण है कि लोगों में समयाभाव व संतुष्टि की बेहद कमी का होना। मानसिक विकार का सीधा संबंध व्यक्ति की निजी भावना व सामाजिक परिदृश्य से है, इसमें विषम परिस्थिति का समावेश, जो व्यक्ति के सोचने, समझने, महसूस करने व कार्य शैली को प्रभावित करने लगती है। ज्यादातर मानसिक विकार के कारण व्यक्ति में अनेक प्रकार की बुराइयों का जन्म भी हो जाता है, जिससे व्यक्ति कुढ़न व नशे का आदी बनने लगता है। मानसिक रोगों के अंतर्गत डिमेंशिया, डिस्लेक्सिया, डिप्रेशन, भूलने की बीमारी, चिंता, आटिज्म, अल्जाइमर आदि आते हैं, जो व्यक्ति की भावनाओं, विचारों व सामाजिक व्यवहारों को बहुत ही तीव्र गति से प्रभावित व परिवर्तित कर देते हैं। मानसिक विकार को जन्म देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका समाज व परिवार ही अदा करता है, बाकी लगभग नगण्य भूमिका में प्राकृतिक बीमारी व दुर्घटना आदि आते हैं। मानसिक विकार को लेकर वैज्ञानिकों का दावा है कि जिस तीव्र गति से यह बढ़ता जा रहा है, जल्दी ही यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बीमारी का स्थान ले लेगी। 

हालांकि मानसिक विकार के तीव्र गति से बढ़ने के बावजूद भी दुनिया इस बीमारी को महज काल्पनिक कथानक के रूप में लेकर, इसकी उपेक्षा कर रही है, जबकि भावी परिस्थिति में इस बीमारी के प्रति गंभीर चिंतन-मनन की आवश्यकता है। शारीरिक विकार जिस प्रकार व्यक्ति को प्रभावित करते हैं, वैसे ही मानसिक विकार भी व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, बस यह मानसिक विकार आँखों के समक्ष परिलक्षित नहीं होते, यही कारण है कि इसकी उपेक्षा पूर्णतः की जाती रही है। मानसिक विकार का सबसे बड़ा सच आत्महत्या के रूप में पूरी दुनिया के समक्ष मौजूद है, फिर भी इस पर गहन चिंतन-मनन की कमी साफ दिखाई देती है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के प्रति चार व्यक्तियों में से एक व्यक्ति किसी ना किसी रूप में मानसिक विकार से प्रभावित है। हालांकि यह बीमारी व्यक्ति के मानसिक रासायनिक असंतुलन से भी उत्पन्न होती है, मगर इस असंतुलन का मुख्य कारण भी कहीं न कहीं हमारे परिवेश, परिवार व समाज से ही जुड़ा हुआ होता है। अतः मानसिक विकार से बचने के लिए सबसे पहला उपाय यह है कि हमें अपने परिवेश, परिवार व समाज में संतुलन स्थापित करना होगा। मानसिक तौर पर सकारात्मक विचारों को बढ़ावा देने से यह बीमारी काफी हद तक कम की जा सकती है। एक सुदृढ़ व स्वस्थ्य मानसिक समाज के विकास के लिए, हमारा सामाजिक ढांचा स्वस्थ्य होना बेहद जरूरी है, तभी इस विकट समस्या से निजात पाना संभव है। 

 

मिथलेश सिंह मिलिंद 

मरहट पवई आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) 

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