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Saturday, January 16, 2021

एकेटीयू ने मनाया अपना 18वां दीक्षांत समारोह

लखनऊ। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विवि में शनिवार को विवि की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में विवि के अटल बिहारी वाजपेई बहुउद्देशीय सभागार में 18 वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पद्मभूषण एवं पर्यावरणविद् अनिल प्रकाश जोशी बतौर मुख्य अतिथि एवं प्राविधिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह बतौर विशिष्ट अतिथि मंचासीन रहे।

विवि के दीक्षांत समारोह के अवसर पर को विवि की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के द्वारा 55182 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गयी, जिसमें  41181 छात्र एवं 14001 छात्राएं शामिल हैं| इनमें 29949 सामान्य,  अन्य पिछड़ा वर्ग 17776, 7259 अनुसूचित जाति, 198 अनुसूचित जनजाति के विधार्थी  शामिल हैं| साथ ही इस दौरान 65 मेधावियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक एवं 90 शोधार्थियों की पीएचडी की उपाधि प्रदान की गयी|  इलेक्ट्रोनिक्स एंड कम्युनिकेशन की बीटेक की छात्रा श्रृष्टि सिंह को कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया| साथ ही इलेक्ट्रोनिक्स एंड कम्युनिकेशन की बीटेक की छात्रा ऋतू वर्मा को कमल रानी मेडल प्रदान किया गया| समारोह के दौरान टोरेन्टो, यूएसए से वीडियो कांफ्रेसिंग से जुड़े विवि के पूर्व छात्र नीरज सरन श्रीवास्तव को डिस्टेंगविस एल्युमिनाई अवार्ड प्रदान किया गया|  अलंकृत मातृ शक्ति नामक पुस्तक एवं  एल्युमनी ब्रोशर का विमोचन किया गया। साथ ही एल्युमनी सेल पोर्टल का उद्घाटन भी कुलाधिपति द्वारा किया गया| 
इस दौरान विवि के कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल एवं विवि के कुलपति प्रो वीके पाठक के द्वारा मंच पर टीवी ग्रस्त और प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को उपहार प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया| 
इस अवसर पर विवि के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने बताया कि विवि गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा की सुनिश्चितता के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है|  उन्होंने बताया कि विवि द्वारा लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से 40 हजार से अधिक ऑडियो-विजुअल व्याख्यान विवि के विद्यार्थियों को ईआरपी डैसबोर्ड पर उपलब्ध करवाए गये हैं। इन लेचर्स के 10 लाख से अधिक डाउनडोल अभी तक हो चुके हैं।  उन्होंने बताया कि विवि द्वारा स्वयं प्रभा के चैनल 15 पर भी ऑडियो-विजुअल व्याख्यान प्रसारित किये जा रहे हैं| उन्होंने बताया कि कोविड के बावजूद भी विवि के शिक्षकों एवं शोधार्थियों द्वारा 1288 शोध पत्र स्कोपस जर्नल्स में प्रकाशित किये गये हैं| उन्होंने बताया कि  विश्वविद्यालय द्वारा ‘आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस’ आधारित जनोपयोगी तकनीक को विकसित करने के लिए सफल प्रयास किये जा रहे हैं|  उन्होंने बताया कि विवि के विद्यार्थियों के 41 आईडिया को प्रोटोटाइप में तब्दील करने के लिए तीन लाख चौरानबे हज़ार आठ सौ बहत्तर रूपये की अनुदान धनराशि प्रदान की गयी है। विश्वेश्वरैया रिसर्च प्रमोशन स्कीम के अंतर्गत सम्बद्ध संस्थानों के शिक्षकों के 24 नवीन प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गयी। कोलैबरेटिव रिसर्च एंड इनोवेशन प्रोग्राम के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा 16 पेंटेंट फाइल किये गये हैं|  साथ ही विश्वविद्यालय ने वर्चुअल प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से 135 से अधिक ड्राइव्स  आयोजित की। इस दौरान नौकरियों के 30 हजार अवसर विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाए गये हैं। उन्होंने बताया कि विवि शिक्षण, प्रशिक्षण, शोध एवं नवाचारो के कार्यों के साथ ही सामाजिक उत्थान एवं पुर्नवास के कार्यों में भी प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है। उन्होंने बताय विवि द्वारा कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में टीबी ग्रस्त, कुपोषित बच्चो को गोद लेने का कार्य किया गया है साथ ही एनीमिया के प्रति जागरूकता फ़ैलाने के लिए भी कार्य किया गया| उन्होंने बताया कि लखनऊ जनपद के 40 आंगनबाड़ी केन्द्रों को  सुविधा सम्पन्न बनाने के लिए प्रयास किये गये हैं। उन्होंने बताया कि विवि जल्द ही सामाजिक समरसता के कार्यों के समन्वयन एवं प्रसार के लिए वेबसाइट लांच करेगा।
विवि की कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि हर्ष का विषय है कि एक साथ 90 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्राप्त हुयी है| वर्तमान में कोरोना महामारी के प्रभावों पर शोध कार्य करने की जरुरत है| उन्होंने कहा कि जब पूरा विश्व कोरोना महामारी भयावह परिणामों से नहीं बच पाया परन्तु भारत में यह लगभग नियंत्रित अवस्था में रहा है| भारत में कोरोना के प्रभावों पर विशेष शोध कार्य किये जाने की आवश्यकता  है।  ताकि, भविष्य में यदि कोई ऐसी स्थिति आती भी है तो उसे बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की स्थिति सुधरी है| जो महिलाएं घरों से निकलने में घबरती थीं वह आज स्वरोजगारपरक बनीं हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भी विश्वविद्यालयों में शोध कार्य किये जाने चाहिए| उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाओं को स्वस्थ और समृद्ध बनाने के लिए प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में गर्भधारण एवं कुपोषण से बचाव सम्बन्धी जागरूकता कार्यक्रम चलाये जाने चाहिए|  उन्होंने कहा कि देश में अधिकतर महिलाओं में खून की कमी पाई जाती है। उन्होंने कहा एनीमिया से बचाव के लिए जागरूकता फैलाये जाने की जरुरत है| उन्होंने विश्वविद्यालय एवं विद्यार्थियों से आंगनबाड़ी केन्द्रों के विकास के लिए कार्य किये जाने का भी आवाहन किया| 
 पर्यावरणविद् पद्मश्री एवं पद्मभूषण अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि पूर्व का विज्ञान पश्चिम के विज्ञान से श्रेष्ठ है। उन्होंने कहा कि हमारा रहन-सहन, भोजन और आचरण ही है जो हमें कोरोना के काल से बाहर निकाल रहा है|  उन्होंने कहा कि हमारा विज्ञान प्रकृति आधारित है। उन्होंने कहा कि हमारे गाँव हमारे पाँव हैं हमें अपने गावों को मजबूत बनाना होगा तभी हम विश्व पटल पर अग्रणी हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे देश ने पूरे विश्व में अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि हमने पूरे विश्व को संस्कार सिखाएं हैं।  उन्होंने कहा कि भारत इक्कीसवीं सदी में इतिहास रचने जा रहा है। क्योंकि हम सबसे ज्यादा युवाओं वाले राष्ट्र में निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में हमने तमाम कष्ट सहे, मगर इस बात को हमेशा स्मरण रखना होगा कि सुविधाओं से नहीं, कष्टों से सीखा जाता है। उन्होंने कहा कि हम आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहे हैं| उन्होंने कहा कि हम कितनी ही ऊचाइयों को छू ले पर हमें अपनी जमीन को नहीं भूलना चाहिए। 
राज्यमंत्री संदीप सिंह ने कहा कि विवि प्रो पाठक के नेतृत्व में सही दिशा में प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गयी पंडित दीनदयाल दयाल उपाध्याय गुणवत्ता सुधार योजना के अंतर्गत इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास का कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि इस योजना की सफलता के दृष्टिगत मुख्यमंत्री द्वारा सौ करोड़ रूपये की अतिरिक्त योजनाओ का शिलान्यास किया गया है। उन्होंने पदक और उपाधि प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को बधाई दी। 
समारोह में अपरमुख्य सचिव प्राविधिक शिक्षा राधा एस चौहान, प्रतिकुलपति प्रो विनीत कंसल, वित्त अधिकारी जीपी सिंह, विद्या परिषद् एवं कार्य परिषद् के सदस्य तथा डीन उपस्थित रहे।  विवि के कुलसचिव नन्द लाल सिंह ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह विधिवत सम्पन्न हो गया।

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