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Thursday, January 28, 2021

लोजस पार्टी ने विशाल किसानों का रैली लेकर एसडीएम नौतनवा को तीन बिल के खिलाफ ज्ञापन सौंपा- सतीश कुमार चतुर्वेदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष

दैनिक अयोध्या टाइम्स संवाददाता दिनेश चौधरी की रिपोर्ट

लोजस पार्टी की मांग, बवाल रोकने में नाकाम प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को बर्खास्त करें

(भगवानपुर)महाराजगंज। लोक जन समाज पार्टी (भारत) ने 26 जनवरी के दिन दिल्ली में हुई हिंसा के लिए देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया है। लोक जन समाज पार्टी ( भारत) ने किसान रैली व प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह हिंसा योजनाबद्ध तरीके से की गई जिसे केंद्र से संरक्षण मिला। लोक जन समाज पार्टी ने कहा कि आंदोलन को छलपूर्वक हटाने की कोशिश की गई। लोक जन समाज पार्टी ने ये भी मांग की है कि, राष्ट्रपति पीएम मोदी और गृहमंत्री को बर्खास्त करना चाहिए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने क्षेत्र के सैकड़ों किसानों और कार्यकर्त्ता के साथ विशाल रैली लेकर एसडीएम नौतनवा प्रमोद कुमार को तीन बिल के लिए राष्ट्रपति को बोधित ज्ञापन सौंपा और प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना पक्ष रखा।
  जिसमे लोजस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संस्थापक सतीश कुमार चतुर्वेदी ने प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर निशाना साधते हुए कहा कि किसान आंदोलन की आड़ में हुई हिंसा के लिए सीधे-सीधे गृहमंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं। उन्हें एक पल भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं, उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए। लोजस पार्टी (भारत) की ये मांग है।
लोजस पार्टी(भारत) के राष्ट्रीय सचिव ने कहा कि दिल्ली में उपद्रव को रोकने में असफल रहे गृहमंत्री अमित शाह के इशारे पर दिल्ली पुलिस उन उपद्रवियों पर मुकदमा दर्ज करने की बजाय संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं पर मुकदमा दर्ज कर रही है। यह भाजपा सरकार की साजिश को साबित करता है।
लोजस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश कुमार चतुर्वेदी ने दो टूक शब्दों में कहा कि कानून व्यवस्था और खुफिया तंत्र की नाकामी के लिए गृहमंत्री अमित शाह बर्खास्त हों!
उपद्रवियों की अगुवाई कर रहे अवांछित तत्वों पर मुकदमे दर्ज न कर किसान मोर्चा नेताओं पर मुकदमे दर्ज करने ने मोदी सरकार-उपद्रवियों की मिलीभगत व साजिश को बेनकाब किया।
सतीश कुमार चतुर्वेदी ने ज्ञापन सौंपते समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर सरकार द्वारा बनाए गए तीन बिल वापस नहीं हुए और किसानों को अधिकार नहीं मिला तो हम मजबूर और बाध्य होकर जिलाधिकारी सहित प्रदेश और केंद्र सरकार को विशाल किसानों की रैली लेकर दिल्ली और लखनऊ सचिवालय को घेरेंगे या फिर सरकार अपने बिल वापस ले और किसान आयोग बनाएं जिससे किसान अपनी पक्ष और प्रतिपक्ष रख सके।

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