बताओ ज़रा

एक बात बताओ

किसी की अंतरात्मा को

पीड़ित करके
कितना सुकून
मिल रहा है तुमको ?
जरा सोच कर बताओ
तुम्हें बात करना तो
कभी आया नहीं,
मगर किसी की अंतरात्मा को
प्रताड़ित करना
तुमने कहां से सीखा?
शायद तुम अपने अहम में
भूल चुके हो की जिस हर की
हर रोज पूजा करते हो,
वो हर
हर हृदय में वास करता है।
क्या आपकी सोच में वो हर
किसी की आत्मा को
प्रताड़ित करने पर
ज्यादा खुश होते हैं क्या?

राजीव डोगरा 'विमल'
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(भाषा अध्यापक)

Comments

Popular posts from this blog

सकारात्मक अभिवृत्ति

Return टिकट तो कन्फर्म है

प्रशासन की नाक के नीचे चल रही बंगाली तंबाकू की कालाबाजारी, आखिर प्रशासन मौन क्यों