खाकी

आश है खाकी।

विश्वास है खाकी।

निर्बल का बल है खाकी।

जन जन की सुरक्षा है खाकी।

सीमाओं की प्रहरी है खाकी।

अपराधियों का भय है खाकी।

सेवा है खाकी।

सुरक्षा है खाकी।

सहयोग है खाकी।

अपराधियों पर अंकुश है खाकी।

आदर्श समाज का प्रतिबिंब है खाकी।

करुणा दया और न्याय है खाकी।

सकारात्मक सोच है खाकी।

त्याग और बलिदान है खाकी।

तन का गौरव है खाकी।

प्रत्येक संकट का निदान है खाकी। 

दिन और रात कर्तव्य का निर्वहन है खाकी।  

फिर भी बदनाम है खाकी।

रचयिता- डॉ. अशोक कुमार वर्मा


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