बहादुर बच्चे

रवि और शनि अच्छे दोस्त थे और एक दूसरे के पड़ोसी भी थे। दोनों में काफी गहरी मित्रता थी इसलिए उनके माता - पिता ने दोनों का एक ही स्कूल में दाखिला कर दिया। दोंनो साथ-साथ स्कूल जाते थे। दोनों का अधिकतर समय साथ में ही बीतता था।

एक दिन जब छुट्टी के बाद दोनों घर लौट रहे थे तो उन्होंने देखा कि एक वृद्ध आदमी को एक गाड़ी वाले ने टक्कर मार दी जिससे उसके सिर में चोट आ गयी और खून बहने लगा। गाड़ी वाले ने उस वृद्ध को अस्पताल पहुँचाने के बजाय झट से गाड़ी बढ़ाकर जाने लगा। रवि ने बड़ी चालाकी से तुरन्त गाड़ी का नंबर नोट कर लिया। और दोनों बिना समय गवाए उस वृद्ध की मदद के लिए दौड़ पड़े।

शनि ने अपने बैग से पानी की बोतल निकालकर उन्हें पानी पिलाया। रवि ने अपना रुमाल निकालकर उनके सिर में बाँधा जिससे ज्यादा खून न बहने पाए। उसके बाद उन्हें सहारा देकर उठाया और एक पेड़ की छाया के नीचे बैठाया।

रवि और शनि ने देखा कि अभी तक कोई भी उनकी मदद के लिए नहीं आया। रवि ने शनि से कहा - तुम इनके पास रहो। तब तक मैं किसी से मोबाइल माँगता हूँ। 

रवि वहीं पास में रखी एक पैन गुमटी के पास गया और पान वाले अंकल से बोला- अंकल जी एक कॉल कर दीजिए प्लीज़।

पान वाले अंकल ने कहा- बेटा, मेरे पास मोबाइल तो है लेकिन मैं पढ़ा-लिखा नही हूँ इसीलिए किसी का फ़ोन आता है तो ये हरा बटन दबाकर उठा लेता हूँ और लाल बटन दबाकर काट देता हूँ लेकिन किसी को फ़ोन नहीं कर पाता।
रवि ने कहा- कोई बात नहीं अंकल जी , आप मुझे फ़ोन दे दीजिए मैं कॉल करना जनता हूँ।

रवि ने फ़ोन लिया और 102 नंबर डायल करके एम्बुलेंस को बुलाया। उसके बाद 112 नंबर डायल करके पुलिस को घटना की सारी जानकारी दी और उस गाड़ी का नंबर भी बताया जिसने टक्कर मारी थी। 

थोड़ी देर में ही एम्बुलेंस आ गयी। उन्होंने उन वृद्ध को एम्बुलेंस में बैठाया । और ड्राइवर से कहा- अंकल जी आप इन्हें अस्पताल ले जाइए, हमने पुलिस को फ़ोन कर दिया है, वो लोग आते ही होंगे। आप देर करेंगे तो दादाजी की हालत और न बिगड़ जाए।

इतना कहकर दोनों ने उन वृद्ध से कहा- दादाजी अब आप ठीक हो जाएंगे। अभी आप इन लोगो के साथ अस्पताल जाइये, हम लोगों को काफी देर हो गयी है और देर होगी तो घर वाले परेशान होंगे। हम लोग कल अपने मम्मी पापा को लेकर अस्पताल आएंगे।
इतना कहकर वो दोनों घर आ गए और अपने मम्मी पापा को सारी बात बताई। रवि के दादाजी ने रवि के पापा से कहा - बेटा कल तुम जल्दी आ जाना और इन दोनों को अस्पताल लिवा ले जाना और साथ में हम भी चलेंगे।

अगले दिन जब रवि और शनि स्कूल गए तो सुबह प्रार्थना कर बाद बताया गया कि आज प्रधानाचार्य जी छुट्टी पर है और महीने का अंतिम दिन होने के कारण आज हाफ डे हो जाएगा।

रवि और शनि ये सुनकर काफी खुश हुए। क्योंकि अब वो अस्पताल में दादाजी से मिल भी आएंगे और समय से अपना होमवर्क भी कर लेंगे। छुट्टी के बाद दोनों घर गए और कपड़े बदले और खाना खाएं। फिर अपने पापा और दादाजी के साथ दोनो अस्पताल गए।

अस्पताल पहुँचने के बाद देखा कि उनके प्रधानाचार्य जी इमरजेंसी के बाहर बैठे हुए हैं। रवि के पापा उनके पास गए और पूछा- सर आप यहाँ कैसे? प्रधानाचार्य ने बताया कि उनके पिताजी यहाँ भर्ती हैं। और आपका कैसे आना हुआ। बच्चे भी साथ आये हैं कोई बीमार है क्या?

रवि के पापा कुछ बोल पाते कि वो एम्बुलेंस वाला ड्राइवर वहाँ आया और प्रधानाचार्य जी से बोला-सर! ये वही बच्चे हैं जिन्होंने आपके पिताजी की कल मदद की थी।

इतना सुनते ही रवि और शनि एकदम से चौंक गए। प्रधानाचार्य जी भी उन दोनों के अच्छे संस्कार और बहादुरी से बहुत खुश हुए। रवि और शनि काफी देर तक अस्पताल में रहे। दादाजी से बातें भी की और शाम को घर वापस आ गए।

अगले कुछ दिनों बाद 14 नवंबर को स्कूल में बाल दिवस मनाया जाना था। इस दिन पंडित नेहरू का जन्म हुआ था। रवि और शनि भी स्कूल गए। सब बच्चे काफी खुश थे। सबसे पहले हिंदी वाले सर ने मां सरस्वती जी और फिर पंडित नेहरू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उसके बाद प्रधानाचार्य जी को मंच पर कुछ शब्द कहने के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानाचार्य जी ने पहले कुछ बातें पंडित नेहरू के बारे में बच्चों को बताई। उसके बाद रवि और शनि की बहादुरी वाली बातें भी सबको बतायीं की रवि और शनि ने कितने सूझ बूझ के साथ उनके पिताजी की मदद की थी। उनकी बहादुरी की बातें सुनकर सभी बच्चो ने तालियां बजायीं।

प्रधानाचार्य जी ने दोनों को मंच पर बुलाकर पुरस्कार दिए। और जीवन मे हमेशा खुश रहने और तरक्की करने का आशीर्वाद भी दिया। रवि और शनि भी बहुत खुश थे।


नाम–अरुण यादव
पता–हमीरपुर उत्तर प्रदेश 210501

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