Tuesday, October 29, 2019

जीवन की डोर

 जीवन की डोर बहुत कमजोर होती है। कब टूट जाये इसका कोई भरोसा नहीं। इस जीवन में कई मोड़ आते हैं। उनमें सबसे महत्वपूर्ण मोड़ सुख तथा दुःख का होता है। जिस मनुष्य ने दुःख का अनुभव किया है वही सुख की कल्पना कर सकता है। आज तक बहुत कम लोगों ने जीवन का अर्थ समझा है। आज कल के तो नवयुवक जीवन का अर्थ यह बताते हैं कि जीवन सिर्फ मनोरंजन है। चाहे कोई मरे या जिए हमें उससे कोई मतलब नहीं है। अब यह दुनिया कितनी स्वार्थी हो गई है। उन्हें किसी से मतलब नहीं है। अगर मैं कुछ अच्छी बातें नवयुवकों को बताऊँ तो इसको एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देंगे। मैं 16 वर्षीय छात्रा हूँ। मैंने जीवन के थोड़े से पहलुओं को समझा है। मैं चाहती हूँ कि दूसरे मनुष्य जीवन के पहलुओं को समझो, उस पर अमल करे और उन पहलुओं को अपने जीवन में प्रयोग करें। पर ऐसा हो नहीं सकता है क्योंकि सबकी आँखों पर स्वार्थ तथा लालच की पट्टी बंधी हुई है। सभी मनुष्य स्वार्थी है।। मैं भी स्वार्थी हूँ। पूरे संसार में ऐसा कोई मनुष्य नहीं है। जो स्वार्थी न हो। सभी स्वार्थी हैं जैसे - (1) हम भगवान की पूजा इसलिए करते हैं कि भगवान हमारी सारी इच्छा पूरी करें तथा हमें सुखी रखें। (2) एक दोस्त दूसरे दोस्त से मेलजोल इसलिए बढ़ाता है क्योंकि मुसीबत में उसकी सहायता करे और जब उसकी मुसीबत टल जाती है तो वह अपने मित्र से मेलजोल खत्म कर लेता है। इससे पता चलता है कि वह उसका स्वार्थ था। अगर स्वार्थ के बारे में और बताऊँ तो उसका लेख कभी खत्म नहीं होता।


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