अधिकारियों की  मिलीभगत के खेल में किसान आत्मदाह करने को मजबूर




दैनिक अयोध्या टाइम्स 

सिधौली तहसील के अंतर्गत इस्माईलगंज गांव के किसानों की जमीन को हड़पने में लगे खनन माफिया व राजस्व अधिकारी हाईकोर्ट के स्टे को बताया फर्जी उच्च पहुंच रखने वालों के सामने राजस्व अधिकारी भी दिखे नतमस्तक मिलीभगत के खेल में किसान आत्मदाह करने को मजबूर है यह मामला है सिधौली तहसील के सदना थाना क्षेत्र के अंतर्गत इस्माइल गंज ग्राम का है जहां भोले भाले गरीब किसानों की पुश्तैनी जमीन को खनन माफियाओं व राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन को हड़पने का प्रयास किया जा रहा है जब किसान नारायण सिंह पुत्र सूर्य बकश सिंह, राम सिंह, संजय सिंह और श्री राम शंकर सिंह और सुखपाल सिंह, गिरजा शंकर सिंह व अन्य पीड़ित किसानों ने मामले की शिकायत एसडीएम सिधौली से की तो महोदय ने तहसीलदार साहब को मामले की जांच के निर्देश दिए लेकिन जब मौके पर जांच करने तहसीलदार मिथिलेश कुमार त्रिपाठी पहुंचे तो किसानों पर ही दबाव बनाने लगे और न्यायालय द्वारा आदेशित स्टे को ही फर्जी करार बता दिया साथ ही अधिकारियों के निर्देश में खानापूर्ति करते हुए किसानों की पुश्तैनी जमीनों को ही मौके पर ना होने होना बता दिया लेकिन सवाल इस बात का है अगर निरीक्षण की गई जमीन किसानों की नहीं है तो वह लगभग 200 वर्षों से उस पर खेती किसानी कैसे कर रहे हैं इस संपूर्ण मामले की जानकारी जब दैनिक जागरण अयोध्या टाइम्स न्यूज़पेपर की टीम को हुई तब किसानों से बातचीत करके मामले की जानकारी हासिल की विस्तृत जानकारी के लिए हमारे पत्रकार द्वारा जब तहसीलदार से बातचीत करनी चाहिए तहसील तहसीलदार ने अपनी तबीयत का आव्हान देते हुए कहा कि यह पूरा मामला एसडीएम साहब के संज्ञान में है एसडीएम साहब से पूछने पर उन्होंने कुछ ना बोलते हुए सारा मामला डीएम साहब के ऊपर सौंप दिया और जिलाधिकारी सीतापुर से मामले के बारे में संज्ञा नित होने की बात कही जब ऐसे माहौल में जहां किसान अपने आर्थिक परेशानी और राजस्व अधिकारियों के उत्पीड़न से ग्रस्त हैं और किसानों का कहना है कि यदि उनकी सुनवाई नहीं की गई तो वह आत्मदाह करने पर मजबूर है अब देखना होगा कि जिला अधिकारी सीतापुर इस मामले पर अपनी क्या प्रतिक्रिया जाहिर करते हैं। और जिस जगह का उनको टेंडर पास किया गया था। वहां पर पानी का संचालन अभी जारी है। किसानों को पानी की पूर्ति होती है। इस लिये वहां खदान करने से किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है।


 

 



 

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