Friday, July 10, 2020

विश्व जनसंख्या समस्या पर वैश्विक चेतना 2020

साल दर साल विश्व जनसंख्या विस्फोट की स्थिति में हो रही वृद्धि के मद्देनजर, इस स्थिति से अनभिज्ञ हो चुकी समस्त मानव जाति को एक मंच पर लाकर उन्हें बढ़ती हुई जनसंख्या के प्रति सचेत करने की एक पहल विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) के रूप में आयोजित की जाती है। जिसमें दुनिया के लगभग सभी देश मिलकर जनसंख्या विस्फोट से उत्पन्न हो रही समस्त समस्याओं पर आपसी विचार-विमर्श करते हुए इन समस्याओं से निजात पाने हेतु कई वैश्विक सुझावों पर सहमति जाहिर करते हैं। हालांकि इस वर्ष जनसंख्या दिवस का विषय ' परिवार योजना एक मानव अधिकार है ' के अंतर्गत स्वस्थ व सुदृढ़ परिवार की स्थापना में समस्त मानव जाति की भागीदारी को सुनिश्चित करना, मगर फिर भी हर वर्ष जनसंख्या दिवस की भाँति इस बार भी बढ़ती जनसंख्या को केंद्र में रखकर, समस्त मानव जाति को जनसंख्या के महत्व को समझाया जाएगा।
हालांकि जनसंख्या किसी भी राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। संसाधनों के मुकाबले अगर जनसंख्या की वृद्धि कम है तो यह किसी भी राष्ट्र की बेहतर सामाजिक-आर्थिक स्थिति को प्रेरित करती है। जनसंख्या वृद्धि के प्रति सचेत करते हुए, समस्त मानव जाति को इससे अनवरत घट रहे संसाधनों के प्रति जागरूक करना इस दिवस का मुख्य लक्ष्य होता है। तीव्र गति से बढ़ती हुई वैश्विक जनसंख्या कई बड़ी समस्याओं को जन्म देती है, जिसका प्रभाव मानव जाति के साथ-साथ प्राकृतिक चक्र पर भी प्रत्यक्षतः देखा जा सकता है। बात अगर स्वास्थ्य करें तो एक बच्चे को जन्म देने में प्रतिदिन लगभग 800 महिलाओं की मृत्यु हो जाती है, अतः हम कह सकते हैं कि जननीय स्वास्थ्य और परिवार नियोजन की तरफ समस्त मानव जाति को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर इन मुद्दों पर विशेष जोर दिया जाता रहा है, क्योंकि एक स्वस्थ प्रजनन एक सुदृढ़ विकास को बढ़ावा देता है।
वर्तमान समय में विश्व की जनसंख्या लगभग 7.7 अरब के पार पहुंच चुकी है, इस विशाल जनसंख्या वृद्धि में सबसे ज्यादा योगदान चीन और भारत के द्वारा किया गया है, जो कि एक चिंतनशील मुद्दा है। इस तरह की तीव्र जनसंख्या वृद्धि के मद्देनजर प्रश्न यह उठता है कि क्या हम इतनी बड़ी जनसंख्या के भरण-पोषण हेतु संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सक्षम हैं ? अगर हैं ! भी तो आखिर कब तक ? आज जनसंख्या का दबाव जिस तरह संसाधनों के ऊपर बढ़ता जा रहा है, उसे देखकर यह नहीं लगता कि हमारे मौजूदा संसाधन भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित रह सकेंगे। यूएन के एक रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान व्यक्त किया गया है कि 2023 तक विश्व की जनसंख्या 8 अरब तथा 2056 तक 10 अरब को पार कर जाएगी। ऐसे में यह आंकड़ें काफी चौकाने वाले हैं कि अगर ऐसा होता है तो दुनिया अनेक समस्याओं का सामना करेगी, मौजूदा जनसंख्या के भरण-पोषण, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं व रोजगार मुहैया कराना, एक बड़ी चुनौती हो जाएगी।
आज जनसंख्या की यह तीव्र वृद्धि पूरी दुनिया के सम्मुख जनसंख्या विस्फोट के रूप में एक चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। इस विस्फोटक चुनौती को संभालना पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि जनसंख्या और संसाधन के बीच गहरा संबंध है, अधिक जनसंख्या अधिक संसाधन का उपयोग करेगी। अतः इस तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या को नियंत्रित करना पूरी दुनिया के लिए बेहद जरूरी हो गया है, जिसके लिए समस्त मानव जाति को हम दो हमारे एक या दो को अपनाते हुए, स्वास्थ्य व सुरक्षा के प्रति जागरूक होना होगा। तीव्र गति से घट रहे संसाधनों का संतुलित उपयोग व संरक्षण सुनिश्चित करना होगा, ताकि भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित व संरक्षित संसाधनों को बचाया जा सके। क्योंकि संसाधन ही किसी समाज के सुदृढ़ विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं।


रचनाकार - मिथलेश सिंह 'मिलिंद'
मरहट, पवई, आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)


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