गैंगस्टर की गिरफ्तारी का कॉमेडी ड्रामा

आठ पुलिसवालों की हत्या करने वाले एक खूंखार अपराधी को सात रात और सात दिनों तक उत्तर प्रदेश पुलिस की चालीस थानों की टीमें और पांच राज्यों की पुलिस दिन रात ढूंढ़ती है, किन्तु पकड़ने में असफल रहती है, और एक दिन अचानक वह उज्जैन के महाकाल मंदिर के प्रांगण में टहलता दिखाई देता है। वह सात दिनों में 1200 किमी की यात्रा करता है, गाड़ी में बैठ कर आराम से खाते पीते मंदिर पहुंचता है, वीआईपी दर्शन की पर्ची कटवा कर, इसप्रकार आराम से घूम फिर रहा था, मानो वो फरार न हो कर घूमने आया हो। 

        जिस गैंगस्टर को उत्तर प्रदेश के बड़े-बड़े अधिकारी तथा पांच राज्यों की पुलिस नहीं पकड़ पाई, उसे महाकाल मंदिर का एक गार्ड जिसका नाम लखन है, पहचान लेता है। वह इस पर लगातार दो घंटे तक नजर बनाए रखता है और स्थानीय पुलिस वालों को इसकी सूचना देता है और पुलिस विकास दुबे को वहां से गिरफ्तार कर लेती है।

       जब पुलिस वाले उसको पकड़ने के लिए भाग दौड़ कर रहे थे तो वह उज्जैन में महाकाल से शायद अपने बचने की प्रार्थना करने गया था कि कहीं पुलिस उसका एनकाउंटर न कर दे।इस दौरान वह दस से ज्यादा टोलप्लाजा पर टोल देने के लिए रुका होगा, लेकिन कहीं भी पहचाना नहीं गया।जबकि हर टोल प्लाजा पर सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं।हर टोलप्लाजा पर पुलिस रहती है, नाकाबंदी रहती है और उत्तर प्रदेश की पुलिस नोएडा से गुजरने वाली गाड़ियों की गहराई से जांच भी कर रही थी। पकड़े जाने पर विकास दुबे चिल्ला कर बोला, 'मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला।' मानो वो अपराधी न होकर कोई ब्रांड एंबेसडर हो।

        ये पूरी गिरफ्तारी फिल्मी कहानियों की तरह हुई। 2 और 3 जुलाई की रात आठ पुलिसवालों को इसने गोलियों से छलनी कर दिया था। इसकी गिरफ्तारी पर 5 लाख का इनाम था और आखिर कार ये मोस्ट वांटेड मध्य प्रदेश में उज्जैन के महाकाल मंदिर में पकड़ा गया।

 

रंजना मिश्रा ©️

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