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Tuesday, December 29, 2020

नया साल

नए साल की नई उमंगें 

नई तरंगें लेकर
आओ फिर से जी लें अब हम
जीवन में रस लेकर
बीता है यह साल बहुत ही
कष्टों में हम सबका
गंवा दिया जीवन कितनों ने
मानव मन है भटका
लेकिन सब कुछ भुला नई
शुरुआत करें हम उठकर
आओ फिर से जी लें अब हम
जीवन में रस लेकर
क्या पाया है क्या खोया है
सोच बड़ा है भारी
कुदरत के दण्डों के आगे
मानवता भी हारी
फिर भी आगे बढ़ना है अब
हमको सब कुछ सहकर
आओ फिर से जी लें अब हम
जीवन में रस लेकर
हार नहीं जाना है हमको
यथा व्यथा से अपनी
हो चाहे जितनी भी भीषण
धरती लगती तपनी
गंगा जैसा पावन बनना है
हमको अब बहकर
आओ फिर से जी लें अब हम
जीवन का रस लेकर

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