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Sunday, January 17, 2021

शिक्षा को सामाजिक विकास का केंद्र मानते थे शेर-ए-बिहार रामलखन यादव:- गौतम


नरसिम्हा राव सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे स्वर्गीय श्री रामलखन सिंह यादव सैकड़ों विद्यालय और महाविद्यालय खोलने के लिए एकीकृत अविभाजित बिहार (झारखंड समेत)में श्रद्धा के साथ याद किए जाते हैं।बिहार और झारखंड का शायद कि कोई ऐसा जिला होगा जहां राम लखन सिंह यादव के नाम पर कोई शैक्षणिक संस्थान न हो।वे जहां भी जाते थे लोगों को शिक्षा के प्रति इस तरह से प्रेरित करते थे की उसी सभा में कोई न कोई व्यक्ति आगे आकर उनके नाम पर शैक्षणिक संस्थान खोलने के लिए घोषणा कर देता था। स्वर्गीय राम लखन सिंह यादव एक मध्यवर्गीय किसान परिवार से थे।उनके पिता का नाम स्वर्गीय श्री पलटू सिंह यादव था,जो एक सफल किसान और राष्ट्र वादी विचारधारा के धनी व्यक्ति थे।वे सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे और सामाजिक धार्मिक कुरीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे।पिता के विचारधारा का प्रभाव राम लखन सिंह यादव पर भी पड़ा था।राम लखन सिंह यादव का जन्म 9 मार्च 1920 को हरिरामपुर गांव, दुल्हन बाजार पटना में हुआ था।स्वर्गीय श्री रामलखन यादव गांधी जी के सिद्धांतों को मानने वाले एक स्वतंत्रता सेनानी भी रहे थे।इन्होंने अपनी युवा अवस्था में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ झंडा बुलंद कर दिए थे।ब्रिटिश सरकार और जमींदारों के खिलाफ कई लड़ाइयों में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई।अंग्रेजों को परेशान करने में उन्हें बहुत आनंद आता था।उनके गतिविधियों से अंग्रेज पानी पानी हो गए थे।स्वर्गीय श्री रामलखन सिंह यादव की शिक्षा दीक्षा भरतपुरा हाई स्कूल और पटना विश्वविद्यालय से हुआ था।आज़ाद भारत में बिहार के पहले विधानसभा चुनाव में पटना जिले के पालीगंज से 1951 में स्वर्गीय श्री रामलखन  विधायक चुनकर बिहार विधानसभा में पहुंचे।उसके बाद लगातार(1951-57, 1962-67, 1980-85, 1985-1990, 1990-1991) पालीगंज से पांच बार विधायक रहे। एक बार बिहार के आरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी चुने गए जिसके बाद नरसिम्हा राव मंत्रिमंडल में खाद एवं उर्वरक मंत्री का ओहदा संभाले थे।इसके अलावे राजनीतिक दलों के कई महत्वपूर्ण पदों पर भी आसीन रहे।

 इन मह्वपूर्ण पदों पर रहने के साथ साथ स्वर्गीय श्री रामलखन सिंह यादव ने देश और विदेशों उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में कनाडा ब्रिटेन अमेरिका रूस जैसे महत्वपूर्ण देशों भारत का प्रतिनिधित्व किया। जहां अपने देश और राज्य का नाम रोशन किया।श्री राम लखन सिंह यादव जी को शेरे- ए- बिहार की उपाधि देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी ने उनके राजनीतिक कद सामाजिक कार्यों में योगदान और शिक्षा के क्षेत्र में किये गये योगदान को देखते हुए ही दिया था।शेरे - ए - बिहार श्री राम लखन सिंह यादव का अपने राज्य के लोगों (गरीब गुरबों,किसान, मजदूर, वंचित दलित के प्रति महत्वपूर्ण योगदान है,जब बिहार और झाखण्ड एक था तब हर जिला और  हर  ब्लॉक में लगभग पांच सौ स्कूल और कॉलेज खुलवाए ताकि वंचित दलित गरीब मजदूर किसान का एक एक बच्चा पढ़ लिख सके और आगे बढ़ सके।अपने हक और अधिकार की लड़ाई अपने बुद्धि-विवेक से लड़ सके।वे अपने जिंदगी के अंतिम क्षण तक शिक्षा और समाज को समर्पित कर दिया।

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