केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2047 के भारत के लिए युवा प्रतिभाओं का मार्गदर्शन करना भारत के लिए सबसे अच्छा निवेश है

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि युवा प्रतिभाओं का मार्गदर्शन करना 2047 के भारत के लिए सबसे अच्छा निवेश है। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों से सक्रिय युवा वैज्ञानिकों को अगले 25 वर्षों के रोडमैप में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी, जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष का उत्सव मनाएगा।

 

डॉ. जितेंद्र सिंह हमारी वैज्ञानिक उपलब्धियों की अनिवार्यता और भव्यता का उत्सव मनाने के लिए एक अखिल भारतीय कार्यक्रम "विज्ञान सर्वत्र पूज्यते" को यादगार बनाने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर राष्ट्रीय विज्ञान सप्ताह के समापन समारोह में बोल रहे थे।

 

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि "विज्ञान सर्वत्र पूज्यते" के इस एक सप्ताह के स्मरणोत्सव की भावना विज्ञान का उत्सव मनाना और उसका पूजन करना है। उन्होंने कहा कि यह आत्मनिरीक्षण करने और यह देखने का अवसर है कि जो हमारे पास नहीं है, उसकी भरपाई कैसे करते हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और वैज्ञानिक सोच को आम आदमी तक ले जाने का लक्ष्य भी है, जहां वे वैज्ञानिक जानकारी और नवाचारों को आत्मसात करके लाभान्वित होने के साथ-साथ एक गहन वैज्ञानिक सोच विकसित कर  सकेंगे।

 

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मोदी ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर वैज्ञानिकों को बधाई दी है, जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा, "सभी वैज्ञानिकों और विज्ञान के प्रति उत्साही लोगों को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की बधाई। आइए हम अपनी सामूहिक वैज्ञानिक जिम्मेदारी को पूरा करने और मानव की प्रगति के लिए विज्ञान की शक्ति का लाभ उठाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करें।”

 

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम - विज्ञान सर्वत्र पूज्यते” (विज्ञान के लिए सार्वभौमिक सम्मान) को व्यापक भागीदारी और चौतरफा सराहना मिली है, जिसे हमने 22 फरवरी, 2022 को दिल्ली सहित 75 स्थानों पर शुरू किया था। आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर समाप्त होने वाला यह राष्ट्रीय विज्ञान सप्ताह, उस संघर्ष और बलिदान को प्रतिबिंबित करने की एक पहल थी, जिसके कारण भारत में आधुनिक विज्ञान का उदय हुआ और 2047 के सपने के अनुरूप अगले 25 वर्षों के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया। यह आयोजन भारतीय स्वतंत्रता के 75वें वर्ष के उत्सव के तौर पर "आज़ादी का अमृत महोत्सव" का हिस्सा था। इसलिए यह भारत की स्वतंत्रता के 75 गौरवशाली वर्षों की उपलब्धियों को याद करने के साथ-साथ उसे प्रदर्शित करने का भी अवसर है।

 

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित सभी मंत्रालयों और विभागों ने संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में देश भर में इस कार्यक्रम को अंजाम देने के लिए हाथ मिलाया था और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) कार्यालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक संगठन - विज्ञान प्रसार को इस कार्यक्रम को कार्यान्वित करने की भूमिका सौंपी गई।

 

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा, जब हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के साथ, भारतीय स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में आजादी का अमृत महोत्सव का उत्सव मना रहे हैं, हम महेंद्रलाल सरकार, जे.सी. बोस और पी.सी. रे जैसे भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान को भी याद करना चाहते हैं, जिन्होंने भारत में आधुनिक विज्ञान की आधारशिला रखने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि आज भारत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा, नैनो-प्रौद्योगिकी, कृषि, डिजिटल और आईटी क्षेत्र और जीवन विज्ञान जैसे क्षेत्रों में तेजी से और परिवर्तनकारी बदलाव पर जोर दे रहा है।

 

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जिसने अपने संविधान में विशेष रूप से विज्ञान का उल्लेख किया हैको प्रमुख स्थान दिया है। उन्होंने कहा, वैज्ञानिक सोच, मानवतावाद साथ-साथ पूछताछ एवं सुधार की भावना का पोषण करना भारत के प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है।

 

डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विज्ञान संचार पुरस्कार भी प्रदान किए, जो हर साल 28 फरवरी को सर सी.वी. रमन द्वारा ‘रमन इफेक्ट’ की खोज की घोषणा को यादगार बनाने के लिए आयोजित किया जाता है, जिसके लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने 1987 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संवाद कायम करने तथा उसे लोकप्रिय बनाने में उत्कृष्ट प्रयासों को बढ़ावा देने, प्रोत्साहित करने और मान्यता देने के साथ-साथ लोगों के बीच वैज्ञानिक सोच पैदा करने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारों की स्थापना की। ये पुरस्कार हर साल राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर प्रदान किए जाते हैं। पुरस्कार में एक स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि शामिल है। (पुरस्कार विजेताओं की सूची संलग्न है)

 

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान प्रसार द्वारा प्रकाशित तीन कॉफी-टेबल पुस्तकों का विमोचन किया। "विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग: अतीत-वर्तमान-भविष्य" शीर्षक वाली पहली पुस्तक में इस बात का उल्लेख किया गया है कि 1971 में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की स्थापना के बाद से इसको कैसे आकार दिया गया है और इसने भारत में वैज्ञानिक परंपरा और निर्देशित नवाचार को कैसा आकार दिया है। यह अपने भविष्य के वैज्ञानिक लक्ष्यों की एक झलक भी प्रदान करती है।

 

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दूसरी पुस्तक का शीर्षक है - "75 अंडर 50: साइंटिस्ट्स शेपिंग टुडेज़ इंडिया", जिसमें 75 वैज्ञानिकों के व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर उपलब्धियों को शामिल किया गया है, जो उनके आसपास की विविधता पर गहराई से नज़र डालते हैं, जैसे कि उनकी अलग-अलग पृष्ठभूमि, वैज्ञानिक बनने के कारण, उनके सामने आने वाली बाधाएं और विभिन्न विषयों में उनके कार्य।

 

तीसरी पुस्तक का शीर्षक है - "75 फाउंडर्स ऑफ मॉडर्न साइंस इन इंडिया", जिसमें भारत को समकालीन दुनिया में एक महान सभ्यता बनाने में आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों के उत्कृष्ट योगदान को याद करते हुए, भारत की आजादी के 75वें वर्ष का उत्सव, यानी आजादी का अमृत महोत्सव मनाया गया है।

 

परमाणु ऊर्जा विभाग के प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान के डॉ. बी.एस. मुंजाल और डॉ. सूर्यकांत गुप्ता द्वारा लिखित, मीट, ग्रीट एंड ट्वीट विद प्लाज़्मा टून्स नामक एक विज्ञान कार्टून पुस्तक का भी विमोचन किया गया। यह भारत के तीक्ष्ण बुद्धि वाले युवा की शुरुआत में पहचान करके उन्हें आकर्षित करने का एक नया प्रयास है। यह कार्टून पुस्तक सामाजिक लाभ के लिए प्लाज्मा अनुसंधान के अधिकतम इस्तेमाल को लेकर एक विस्तृत कैनवास प्रदान करती है।

 


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